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कुटरा गांव में अधूरे पड़े शौचालय
अमर उजाला ब्यूरो, खटीमा
Updated Wed, 07 Dec 2016 12:44 AM IST
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स्वच्छ भारत मिशन की योजना कुटरा ग्राम में मजाक बनकर रह गई है। मनरेगा सहित प्रधानमंत्री आवास योजना का ग्रामीण लाभार्थियों को कोई लाभ नहीं मिला है। कई निर्माण अधूरे पड़े होने से ग्रामीण आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं।
मनरेगा योजना के तहत बना गए शौचालय आज तक पूरे नहीं हुए हैं। जिन लाभार्थियों के शौचालय पूरे हुए भी हैं तो उन्हें उसका भुगतान तक नहीं मिला है। थारु जनजाति बाहुल्य ग्रामसभा में शौचालयों का निर्माण अधूरा पड़ा है। कुछ शौचालयों को ग्राम सभा ने बनवाया है। शेष शौचालयों के लिए लाभार्थियों को 1700 की किश्त दी गई है। शौचालय निर्माण की 12 हजार लागत के एवज में गांव के बिल्लू को 1700, सुरेंद्र, रामस्वरूप, अमित, शिवाजीदेवी, जस्सा, घुम्मन को पहली किश्त बतौर 1500-1500 रुपए दिए गए हैं।
इसके अलावा नंदा बुंगला, भीकम, नारायण सिंह, भगवान सिंह, बचन सिंह, हरिनंदन, बल्दीप, विजेंद्र, रंजीत, रतन, विजय सिंह, रामबचन, छोटू, दीवान के घर पर शौचालय का मात्र ढांचा खड़ा किया गया है। लाभार्थियों के तमाम प्रयास पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। आज ग्रामीण खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
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मनरेगा योजना के तहत बना गए शौचालय आज तक पूरे नहीं हुए हैं। जिन लाभार्थियों के शौचालय पूरे हुए भी हैं तो उन्हें उसका भुगतान तक नहीं मिला है। थारु जनजाति बाहुल्य ग्रामसभा में शौचालयों का निर्माण अधूरा पड़ा है। कुछ शौचालयों को ग्राम सभा ने बनवाया है। शेष शौचालयों के लिए लाभार्थियों को 1700 की किश्त दी गई है। शौचालय निर्माण की 12 हजार लागत के एवज में गांव के बिल्लू को 1700, सुरेंद्र, रामस्वरूप, अमित, शिवाजीदेवी, जस्सा, घुम्मन को पहली किश्त बतौर 1500-1500 रुपए दिए गए हैं।
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इसके अलावा नंदा बुंगला, भीकम, नारायण सिंह, भगवान सिंह, बचन सिंह, हरिनंदन, बल्दीप, विजेंद्र, रंजीत, रतन, विजय सिंह, रामबचन, छोटू, दीवान के घर पर शौचालय का मात्र ढांचा खड़ा किया गया है। लाभार्थियों के तमाम प्रयास पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। आज ग्रामीण खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
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