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Udham Singh Nagar News: रुद्रपुर में बनेगी कुमाऊं की पहली साइबर लैब

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Oct 2025 10:51 PM IST
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Kumaon's first cyber lab will be built in Rudrapur
रुद्रपुर। देहरादून के बाद अब रुद्रपुर में कुमाऊं की पहली साइबर लैब बनेगी। खास बात ये होगी कि जिस साफ्टेवयर या मोबाइल के जरिये ठगी होगी। उसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। जहां उसका क्लोन बनाकर यह पता लगाया जाएगा कि ठगी का प्रयोग कहां से और कैसे हुआ है।
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उत्तराखंड में साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में हर दिन औसतन पांच से सात लोग साइबर ठगी के शिकार होते हैं। ऑनलाइन खरीदारी से लेकर बैंकिंग व बिजली-पानी तक का बिल जमा करने के लिए गूगल पर हुबहू वेबसाइट बनी हुई हैं। अनजाने में गलत साइट पर आते ही बैंक खाता खाली हो जाता है। डिजिटल अरेस्ट के मामले भी बढ़ रहे हैं। लोग पुलिस के पास पहुंचते है लेकिन ठगों तक पहुंचना आसान नहीं होता। ठग पुलिस से एक कदम आगे रहते हैं। साथ ही ऐसे सिम कार्ड का प्रयोग होता है जिनका ठगी से कोई लेना-देना नहीं होता। साइबर ठगी पर रोक लगाने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने जा रही है। देहरादून के बाद अब फोरेंसिक साइंस लैब रुद्रपुर में साइबर लैब तैयार की जाएगी। जहां पर उपकरण मशीन व विशेषज्ञ की नियुक्ति होगी। अभी तक गंभीर मामले में जांच के लिए सेंपल देहरादून या दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं।
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ऐसे होगी जांचें
साइबर लैब आधुनिक उपकरणों से पूरी तरह लेस होगी। मोबाइल व लैपटॉप के जरिये यदि ठगी होती है तो उसे जांच के लिए पुलिस रुद्रपुर फोरेंसिक साइबर लैब लाएगी। विशेषज्ञ हार्ड डिस्क निकालकर व डिवाइस के माध्यम से उसका क्लोन बनाएंगे। इसके बाद पड़ताल शुरू होगी। क्लोन बनाने के पीछे कारण ये है कि यदि मोबाइल व लैपटॉप को जांच के लिए आगे भेजा जाए तो उस पर कोई असर न पड़े और जांच प्रभावित न हो।
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डिलीट डाटा भी होगा रिकवर
साइबर लैब में मोबाइल व अन्य डिवाइस से डिलीट किया गया डाटा भी रिकवर कर लिया जाएगा। कई बार ऐसी स्थिति आती है कि ठग पूरे मोबाइल व सिस्टम को हैग कर उसका अलग प्रयोग करते हैं। महत्वपूर्ण साक्ष्य को डिलीट कर दिया जाता है।

कोट- बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए कुमाऊं में साइबर लैब बनाने की प्रक्रिया चल रही है। विशेषज्ञ व सिस्टम जल्द फोरेंसिक साइंस लैब में आएगा। इसके लिए शासन को पत्राचार किया जा चुका है। -डाॅ. मनोज अग्रवाल, संयुक्त निदेशक, फोरेंसिक साइंस लैब।
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