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भाजपा किसान आंदोलन को तोड़ने के लिए आंदोलन में करती है घुसपैठ

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Aug 2022 12:04 AM IST
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Kisan Andolan in Us Nagar
जगतार सिंह बाजवा। - फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। दिल्ली में सोमवार को हुई महापंचायत में तराई के किसानों के शामिल न होने पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर स्थानीय नेताओं के कई तर्क हैं। किसी का कहना है कि सोमवार को महापंचायत में शामिल हुए किसान संगठनों में भाजपा की घुसपैठ है तो किसी का कहना है कि यह किसान संगठन पहले ही संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण हटाए जा चुके हैं।
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बाजपुर के किसान नेता जगतार सिंह बाजवा का आरोप है कि किसान आंदोलन के दौरान तैयार संगठनों को आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में संयुक्त मोर्चा से हटा दिया गया। भाजपा की घुसपैठ वाले संगठनों ने सोमवार को दिल्ली में धरना दिया। इन संगठनों के माध्यम से भाजपा किसान आंदोलन को तोड़ कर आंदोलन की दिशा को भ्रमित करना चाहती है। मध्यप्रदेश के एक किसान नेता पर तो सीधे आरएसएस से जुड़े होने का आरोप है। उसका संगठन भी दिल्ली में जंतर मंतर पर सक्रिय था। इसी कारण संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य दिल्ली नहीं गए।
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उधर, भारतीय किसान यूनियन युवा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने कहा कि दिल्ली में धरना देने वाले संगठनों को संयुक्त किसान मोर्चा पहले ही संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में हटा चुका है। इनमें से कुछ संगठन तो चुनाव भी लड़ चुके हैं। किसी पर भाजपा के साथ सांठगांठ रखने का आरोप है जबकि संयुक्त किसान मोर्चा के सभी घटक संगठन केवल किसान हितों की लड़ाई लड़ते हैं। वह राजनीतिक गतिविधियों से अलग रहते हैं। बाजपुर, काशीपुर, जसपुर के अधिकतर किसान संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य के रूप में आंदोलन में सक्रिय रहे हैं।
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किसानों के मुद्दे पर सरकार ने की वादाखिलाफी : विर्क
रुद्रपुर। तराई किसान संगठन के अध्यक्ष और किसान नेता तजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि किसानों के मुद्दे पर सरकार ने वादाखिलाफी की है। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सरकार ने नौ दिसंबर 2021 को जो लिखित वादे किए थे, उससे भी पीछे हट गई है। उन्होंने एमएसपी कमेटी बनाने, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने सहित कई वादे शामिल थे। ऐसे में किसानों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है।
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