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शर्मनाक : प्रसव होते ही निर्मोही मां ने खेत में फेंक दिया शिशु
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काशीपुर। एक निर्मोही मां ने प्रसव के तुरंत बाद अपने कलेजे के टुकड़े का परित्याग कर दिया। श्यामपुरम कॉलोनी स्थित एक गेहूं के खेत से नवजात (लड़का) की किलकारियां सुनकर लोग स्तब्ध रह गए। एक महिला ने ई-रिक्शा से शिशु को सरकारी अस्पताल पहुंचाया। वहां से नवजात को एक निजी अस्पताल की चाइल्ड केयर यूनिट में रखा गया है। शिशु की हालत में कुछ सुधार बताया जा रहा है।
रविवार सुबह करीब 10:30 बजे बाजपुर रोड श्यामपुरम कॉलोनी स्थित हरिशंकर मंदिर के पास गेहूं के खेत से एक शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर लोग वहां पहुंचे तो खेत में एक नवजात पड़ा था। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था और उसकी नाल तक नहीं कटी थी। कॉलोनी की ही दीपा पत्नी प्रदीप ने शिशु को गर्म कपड़े में लपेटा और ई-रिक्शा से उसे सरकारी अस्पताल ले गईं। अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. राजीव चौहान के निर्देश पर प्रसव कर्मी नेहा जोशी और प्रियंका ने शिशु की नाल काटकर उसके शरीर को साफ किया।
प्रभारी सीएमएस डॉ. पीके सिन्हा ने श्रीकृष्णा अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद मोहन को बुलाकर शिशु का चेकअप कराया। इधर, तहसीलदार वीसी पंत भी अस्पताल पहुंचे। उनके निर्देश पर नवजात को श्री कृष्णा अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद मोहन की देखरेख में एनबीएसयू में रखा गया है। डॉ. आनंद ने बताया कि शिशु स्वस्थ है। पैदा होते ही शिशु को खुले में छोड़ दिए जाने से उसे हाइपोथर्मिया (शरीर के तापमान में गिरावट) होना पाया गया।
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अस्पताल में लगा नि:संतान दंपतियों का तांता
काशीपुर। गेहूं के खेत से नवजात मिलने की खबर पर अस्पताल में नि:संतान दंपतियों का शिशु को गोद लेने के लिए तांता लग गया। लेकिन शिशु के उपचाराधीन होने के कारण किसी को उसे देखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने शिशु का शिवा नाम दिया है। श्रीकृष्णा अस्पताल के निदेशक डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि शिशु के इलाज का पूरा खर्च अस्पताल उठाएगा। बता दें कि तीन वर्ष जसपुर रोड पर नाले में मिली नवजात गौरी का भी अस्पताल प्रशासन ने मुफ्त इलाज किया था।
पांच वर्ष में फेंके हुए मिले चार शिशु
काशीपुर। पांच वर्षों के दौरान काशीपुर में निर्मोही माताओं ने चार नवजातों का परित्याग किया है। श्यामपुरम कॉलोनी में गेहूं के खेत में छोड़े गए शिशु का परित्याग करने के मामले में आईटीआई थाना पुलिस धारा 317 के तहत केस दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
इससे पूर्व वर्ष 2015 में सांई मंदिर में एक नवजात कन्या मिली। सूचना पर पहुंचे मंदिर के ट्रस्टी कैलाश गहतोड़ी ने इस शिशु को गोद लिया। गहतोड़ी इस बच्ची का लालन पालन कर रहे हैं।
वर्ष 2017 में जसपुर बस अड्डे पर नाले में एक नवजात कन्या मिली। वहीं, वर्ष 2018 दिसंबर में रामनगर रोड पर सड़क किनारे मिले एक नवजात शिशु (लड़का) मिला। दोनों शिशुओं को इलाज के बाद सीडब्ल्यूसी, देहरादून भेजा गया। जिला बाल कल्याण समिति की पूर्व अध्यक्ष डॉ. रजनीश बत्रा ने बताया कि शिशुओं का परित्याग करना चिंता का विषय है। इस संबंध में सूचना उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी को दे दी गई है।
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रविवार सुबह करीब 10:30 बजे बाजपुर रोड श्यामपुरम कॉलोनी स्थित हरिशंकर मंदिर के पास गेहूं के खेत से एक शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर लोग वहां पहुंचे तो खेत में एक नवजात पड़ा था। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था और उसकी नाल तक नहीं कटी थी। कॉलोनी की ही दीपा पत्नी प्रदीप ने शिशु को गर्म कपड़े में लपेटा और ई-रिक्शा से उसे सरकारी अस्पताल ले गईं। अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. राजीव चौहान के निर्देश पर प्रसव कर्मी नेहा जोशी और प्रियंका ने शिशु की नाल काटकर उसके शरीर को साफ किया।
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प्रभारी सीएमएस डॉ. पीके सिन्हा ने श्रीकृष्णा अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद मोहन को बुलाकर शिशु का चेकअप कराया। इधर, तहसीलदार वीसी पंत भी अस्पताल पहुंचे। उनके निर्देश पर नवजात को श्री कृष्णा अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद मोहन की देखरेख में एनबीएसयू में रखा गया है। डॉ. आनंद ने बताया कि शिशु स्वस्थ है। पैदा होते ही शिशु को खुले में छोड़ दिए जाने से उसे हाइपोथर्मिया (शरीर के तापमान में गिरावट) होना पाया गया।
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अस्पताल में लगा नि:संतान दंपतियों का तांता
काशीपुर। गेहूं के खेत से नवजात मिलने की खबर पर अस्पताल में नि:संतान दंपतियों का शिशु को गोद लेने के लिए तांता लग गया। लेकिन शिशु के उपचाराधीन होने के कारण किसी को उसे देखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने शिशु का शिवा नाम दिया है। श्रीकृष्णा अस्पताल के निदेशक डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि शिशु के इलाज का पूरा खर्च अस्पताल उठाएगा। बता दें कि तीन वर्ष जसपुर रोड पर नाले में मिली नवजात गौरी का भी अस्पताल प्रशासन ने मुफ्त इलाज किया था।
पांच वर्ष में फेंके हुए मिले चार शिशु
काशीपुर। पांच वर्षों के दौरान काशीपुर में निर्मोही माताओं ने चार नवजातों का परित्याग किया है। श्यामपुरम कॉलोनी में गेहूं के खेत में छोड़े गए शिशु का परित्याग करने के मामले में आईटीआई थाना पुलिस धारा 317 के तहत केस दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
इससे पूर्व वर्ष 2015 में सांई मंदिर में एक नवजात कन्या मिली। सूचना पर पहुंचे मंदिर के ट्रस्टी कैलाश गहतोड़ी ने इस शिशु को गोद लिया। गहतोड़ी इस बच्ची का लालन पालन कर रहे हैं।
वर्ष 2017 में जसपुर बस अड्डे पर नाले में एक नवजात कन्या मिली। वहीं, वर्ष 2018 दिसंबर में रामनगर रोड पर सड़क किनारे मिले एक नवजात शिशु (लड़का) मिला। दोनों शिशुओं को इलाज के बाद सीडब्ल्यूसी, देहरादून भेजा गया। जिला बाल कल्याण समिति की पूर्व अध्यक्ष डॉ. रजनीश बत्रा ने बताया कि शिशुओं का परित्याग करना चिंता का विषय है। इस संबंध में सूचना उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी को दे दी गई है।