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अनियोजित विकास का दंश झेल रहा काशीपुर
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पक्काकोट में सीवर टैंक से गंदगी निकालते लोग।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। तीन लाख से अधिक आबादी वाला काशीपुर शहर अनियोजित विकास का दंश झेल रहा है। सीमा विस्तार के बाद नगरनिगम में ऐसे क्षेत्र शामिल हुए हैं, जिन्हें कॉलोनाइजर्स ने अनियोजित ढंग से बसाया है। कहने को तो ये अब निगम में हैं, लेकिन धरातल पर हालात किसी पिछड़े गांवों जैसे ही हैं।
दो वर्ष पूर्व काशीपुर नगरनिगम की सीमा का विस्तार कर वार्डों की संख्या 20 से बढ़ाकर 40 कर दी गई थी। नये शामिल किए गए क्षेत्रों की आबादी भी एक लाख से अधिक है। नये वार्डों में दस वर्ष तक टैक्स माफी की घोषणा की गई है। पक्काकोट निवासी रमेश यादव का कहना है कि सीवर और पेयजल लाइनों की लीकेज से भी सड़कों पर गंदगी जमा रहती है। शहरी सीमा से सटे इलाकों में अनियोजित ढंग से हुई बसासत भी एक बड़ी वजह है। प्रापर्टी डीलरों ने जमीनें खरीदकर मुनाफे के लालच में बगैर किसी प्लान के कालोनियां काट दीं। यहां के लोग विद्युतीकरण, पेयजल, स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी सुविधाओं से महरूम हैं। वार्डों में गंदगी का आलम यह है कि घरों के पास प्लॉटों में लंबी घास और भांग के पौधे खड़े है। इनमें नशेड़ी दिनभर जमे रहते हैं। घरों से निकलने वाला गंदा पानी खाली भूखंडों में जमा हो जाता है। निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण मामूली बारिश में भी सड़कों पर जलभराव हो जाता है।
इनसेट
टेंडर न होने से शहर में पसरी गंदगी
काशीपुर। नगरनिगम में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का ठेका समाप्त हुए चार माह का समय बीत चुका है लेकिन निगम ने अभी तक नया ठेका नहीं किया है। निगम प्रशासन टेंडर की राशि अधिक बताकर ठेका स्वीकृत नहीं कर रहा है। इससे शहर में गंदगी पसरी हुई है। देवभूमि सफाई कर्मचारी संघ ने उपनल के माध्यम से पर्यावरण मित्रों की नियुक्तियां किए जाने की मांग की है।
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निगम में शामिल होने के बाद मेरा क्षेत्र उन सुविधाओं से भी महरूम हो गया, जो देहात में होने के कारण मिलती रही थी। पिछले दो वर्षों में किसी भी नए वार्ड में कोई पेयजल योजना नहीं आई है। वार्डों में न तो हैंडपंप लगाए गए हैं और न ही पुराने हैंडपंपों की मरम्मत हुई है। यहां सड़कों की स्थिति भी बदतर है।
- एलम सिंह, पार्षद, वार्ड-छह
काशीपुर की बढ़ती आबादी के मद्देनजर मास्टर प्लान के लिए सर्वे कराया जा चुका है। जल्द ही मास्टर प्लान तैयार कर इसे लागू किया जाएगा। इससे शहर के नियोजित विकास में मदद मिलेगी।
गौरव कुमार, एमएनए, नगरनिगम काशीपुर।
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दो वर्ष पूर्व काशीपुर नगरनिगम की सीमा का विस्तार कर वार्डों की संख्या 20 से बढ़ाकर 40 कर दी गई थी। नये शामिल किए गए क्षेत्रों की आबादी भी एक लाख से अधिक है। नये वार्डों में दस वर्ष तक टैक्स माफी की घोषणा की गई है। पक्काकोट निवासी रमेश यादव का कहना है कि सीवर और पेयजल लाइनों की लीकेज से भी सड़कों पर गंदगी जमा रहती है। शहरी सीमा से सटे इलाकों में अनियोजित ढंग से हुई बसासत भी एक बड़ी वजह है। प्रापर्टी डीलरों ने जमीनें खरीदकर मुनाफे के लालच में बगैर किसी प्लान के कालोनियां काट दीं। यहां के लोग विद्युतीकरण, पेयजल, स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी सुविधाओं से महरूम हैं। वार्डों में गंदगी का आलम यह है कि घरों के पास प्लॉटों में लंबी घास और भांग के पौधे खड़े है। इनमें नशेड़ी दिनभर जमे रहते हैं। घरों से निकलने वाला गंदा पानी खाली भूखंडों में जमा हो जाता है। निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण मामूली बारिश में भी सड़कों पर जलभराव हो जाता है।
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टेंडर न होने से शहर में पसरी गंदगी
काशीपुर। नगरनिगम में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का ठेका समाप्त हुए चार माह का समय बीत चुका है लेकिन निगम ने अभी तक नया ठेका नहीं किया है। निगम प्रशासन टेंडर की राशि अधिक बताकर ठेका स्वीकृत नहीं कर रहा है। इससे शहर में गंदगी पसरी हुई है। देवभूमि सफाई कर्मचारी संघ ने उपनल के माध्यम से पर्यावरण मित्रों की नियुक्तियां किए जाने की मांग की है।
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निगम में शामिल होने के बाद मेरा क्षेत्र उन सुविधाओं से भी महरूम हो गया, जो देहात में होने के कारण मिलती रही थी। पिछले दो वर्षों में किसी भी नए वार्ड में कोई पेयजल योजना नहीं आई है। वार्डों में न तो हैंडपंप लगाए गए हैं और न ही पुराने हैंडपंपों की मरम्मत हुई है। यहां सड़कों की स्थिति भी बदतर है।
- एलम सिंह, पार्षद, वार्ड-छह
काशीपुर की बढ़ती आबादी के मद्देनजर मास्टर प्लान के लिए सर्वे कराया जा चुका है। जल्द ही मास्टर प्लान तैयार कर इसे लागू किया जाएगा। इससे शहर के नियोजित विकास में मदद मिलेगी।
गौरव कुमार, एमएनए, नगरनिगम काशीपुर।