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कड़कनाथ हैचरी से 500 महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
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kadaknath hatchery
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रुद्रपुर। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र खटीमा के झनकट में कड़कनाथ कुक्कुट प्रक्षेत्र की स्थापना के बाद 500 महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत 37 लाख 90 हजार रुपये की लागत से कड़कनाथ कुक्कुट प्रक्षेत्र की स्थापना की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से 19 किलोमीटर की दूरी पर झनकट की ग्राम पंचायत रतनपुरा में उज्जवल सीएलएफ के तहत 500 महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। कुक्कुट प्रक्षेत्र में अंडा स्टोर, स्टोर रूम, मशीनें आदि लगाई जाएंगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गोपाल सिंह धामी ने बताया कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की नस्ल वाला कड़कनाथ (काली मासी) मुर्गे की बाजार में अच्छी खासी मांग है। बेहद पौष्टिक होने की वजह से इसका मांस अन्य प्रजाति के मुर्गों से महंगा बिकता है। बताया कि इन मुर्गों का रखरखाव अन्य प्रजाति के मुकाबले आसान होता है। इसके मांस में बॉयलर मुर्गे के मुकाबले कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। इसके अलावा अमीनो एसिड का स्तर ज्यादा होता है। बताया कि कड़कनाथ मुर्गे की अधिक मांग होने पर हैचरी में 500 मुर्गियां और 50 मुर्गे की छमता वाला स्टोर बनाया जाएगा। इसको खोलने के लिए मुख्यमंत्री बीएडीपी (बॉर्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम) योजना के तहत बजट दिया गया है।
कड़कनाथ मुर्गा खाने के ये हैं फायदे
1-एक किलो मांस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा करीब 184 एमजी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में करीब 214 एमजी होती है।
2- मांस में 25 से 27 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि अन्य मुर्गों में केवल 16 से 17 प्रतिशत ही प्रोटीन होता है।
3- कड़कनाथ मुर्गों में एक प्रतिशत चर्बी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में पांच से छह प्रतिशत चर्बी होती है।
4- कड़कनाथ मुर्गे का इस्तेमाल यौन शक्ति बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा से 19 किलोमीटर की दूरी पर झनकट की ग्राम पंचायत रतनपुरा में उज्जवल सीएलएफ के तहत 500 महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। कुक्कुट प्रक्षेत्र में अंडा स्टोर, स्टोर रूम, मशीनें आदि लगाई जाएंगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गोपाल सिंह धामी ने बताया कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की नस्ल वाला कड़कनाथ (काली मासी) मुर्गे की बाजार में अच्छी खासी मांग है। बेहद पौष्टिक होने की वजह से इसका मांस अन्य प्रजाति के मुर्गों से महंगा बिकता है। बताया कि इन मुर्गों का रखरखाव अन्य प्रजाति के मुकाबले आसान होता है। इसके मांस में बॉयलर मुर्गे के मुकाबले कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। इसके अलावा अमीनो एसिड का स्तर ज्यादा होता है। बताया कि कड़कनाथ मुर्गे की अधिक मांग होने पर हैचरी में 500 मुर्गियां और 50 मुर्गे की छमता वाला स्टोर बनाया जाएगा। इसको खोलने के लिए मुख्यमंत्री बीएडीपी (बॉर्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम) योजना के तहत बजट दिया गया है।
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कड़कनाथ मुर्गा खाने के ये हैं फायदे
1-एक किलो मांस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा करीब 184 एमजी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में करीब 214 एमजी होती है।
2- मांस में 25 से 27 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि अन्य मुर्गों में केवल 16 से 17 प्रतिशत ही प्रोटीन होता है।
3- कड़कनाथ मुर्गों में एक प्रतिशत चर्बी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में पांच से छह प्रतिशत चर्बी होती है।
4- कड़कनाथ मुर्गे का इस्तेमाल यौन शक्ति बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।