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मजदूर था...मजबूर था: परिवार की बेहतरी के लिए घर से दूर था, मौत बनकर आए बाघ से जिंदगी की जंग हार गया जितेंद्र

Thu, 19 Jun 2025 12:53 PM IST
हीरा मेहरा महेश चंद, संवाद
महेश चंद, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 19 Jun 2025 12:53 PM IST
सार

जितेंद्र बाघ के हमले में जिंदगी की जंग हार गया। परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण उस पर जिम्मेदारियां अधिक थीं। मजदूरी कर वह किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। 

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Jitendra was killed by a tiger in Majhola Khatima
बाघ

विस्तार

परिवार को बेहतर जीवन देने के लिए घर से करीब 75 किमी दूर आया जितेंद्र बाघ के हमले में जिंदगी की जंग हार गया। परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण उस पर जिम्मेदारियां अधिक थीं। मजबूरी में मजदूरी कर वह किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। पीलीभीत से खटीमा के मझोला तक आई उसकी मजबूरी की यात्रा, बाघ के खूनी पंजों के साथ खत्म हो गई। सिर से पिता का साया उठने से चारों बच्चे गुमसुम हैं और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। खनका उछसिया (पीलीभीत) निवासी जितेंद्र सिंह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वह अक्सर मजदूरी करने के लिए मझोला और खटीमा में आता रहता था। इस बार धान की रोपाई के लिए वह अपने गांव के ही नौ साथियों के साथ 13 जून को किसान जसवंत सिंह के यहां काम करने आया था।

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उसके साथियों ने बताया कि बुधवार को धान की रोपाई खत्म होने वाली थी। इसके बाद सभी घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। उनके अनुसार यदि जितेंद्र सुबह पानी पीने के लिए नहीं रुकता तो शायद उसकी जान बच जाती। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मचा है। बेटी नेहा (17) व अंशिका (15) और बेटे अनुराग (8) व आयुष (6) का रो-रोकर बुरा हाल है। उसकीू मौत की खबर सुन पत्नी बेसुध हो गई।

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अपने शिकार की तलाश में दोबारा लौटा बाघ
साथी मजदूरों ने बताया कि जब वे घायल जितेंद्र को लेकर खेत के किनारे आए तो कुछ देर बाद बाघ फिर लौटकर उनकी ओर आने लगा। उसके कुछ आगे आने पर जब उन्होंने शोर मचाया तो बाघ चला गया।

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पानी की तलाश में आबादी में आने की आशंका
बाघ के पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में आने की आशंका जताई जा रही है। खेत के बगल में एक नाला भी है, जिसमें बाघ छुपा हुआ था। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि बाघ पानी पीने के लिए नाले में आया होगा।

हल्दीघेरा गांव में फिर दिख रहा बाघ
मझोला क्षेत्र के हल्दीघेरा गांव में फिर से बाघ दिख रहा है। इससे ग्रामीण सहमे हुए हैं। किसान गुरप्रीत सिंह खिंडा ने बताया कि हल्दी और हल्दीघेरा गांव के बीच बहने वाली देवहा नदी के आसपास कई दिनों से बाघ नजर आ रहा है। इसके बावजूद विभाग की ओर से ट्रैप कैमरे नहीं लगाए जा रहे हैं।

डीएफओ ने ग्रामीणों से अकेले खेतों में न आने की अपील की
डीएफओ हिमांशु बागड़ी ने ग्रामीणों से रोपाई व अन्य कृषि कार्य के लिए अकेले खेतों में न जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेतों में कृषि कार्य करने के लिए किसान व मजदूर समूह में जाएं। शोर भी करते रहें, जिससे वन्यजीव वहां न आ सके। खासकर सुबह-शाम बाघों के आबादी क्षेत्र में आने की अधिक आशंका रहती है।

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