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एसएसपी स्वयं करें धोखाधड़ी केस में विवेचना की निगरानी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 12:30 AM IST
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Investigation Officer Can Change of Fraud Case in Kashipur
काशीपुर। धोखाधड़ी से जमीन की दाखिल खारिज कराने के मामले में दर्ज केस की विवेचना में कोताही बरतने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने एसएसपी को सीओ स्तर के अधिकारी से विवेचना का पर्यवेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इस केस में यदि विवेचना अधिकारी (आईओ) की कोताही उजागर होती है तो उससे विवेचना वापस लेकर किसी अन्य अधिकारी को सौंपी जाए।
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ग्राम पैगा निवासी सुमन कुमार ने न्यायालय को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि प्रीतनगर, जालंधर निवासी उसके ताऊ तरसेम लाल के नाम काशीपुर तहसील के गांव पैगा में 4.002 हेक्टेअर भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। तरसेम की मृत्यु 30 नवंबर 2012 को हो गई। बाद में पैगा निवासी उनके भतीजों सुदर्शन, सुखदेव, सरजीत, सुभाष कुमार, सतेंद्र आदि ने मोहल्ला कटोराताल नईबस्ती निवासी जमील अहमद और बाजपुर के ग्राम हजीरा निवासी पवन शर्मा के साथ षड्यंत्र रचकर पांच दिसंबर को तरसेम लाल का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया।
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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन लोगों ने 18 जनवरी 2013 को पांच एकड़ भूमि की दाखिल खारिज अपने नाम करा ली। इन दस्तावेजों में मृतक तरसेम को ग्राम पैगा का निवासी दर्शाया गया है जबकि तरसेम मूलत: ग्राम पैगा के निवासी नहीं थे। गांव के परिवार रजिस्टर में भी उनका नाम दर्ज नहीं है। पैगा के पते पर उन्होंने कोई वसीयत नहीं कराई थी।
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तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। बाद में कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज होने के बावजूद आईओ ने न तो केस में संलग्न दस्तावेजों की पड़ताल की और न ही वादी या आरोपियों के बयान लिए। इसलिए केस के वादी सुमन ने अपने अधिवक्ता अभिषेक वर्मा के माध्यम से नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की।

याचिका में आईओ की भूमिका पर सवाल उठाए गए। सुनवाई कर न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि इस केस की विवेचना एसएसपी स्वयं या किसी सीओ स्तर के अधिकारी के पर्यवेक्षण में कराएं। अगर इस केस में आईओ की कोताही मिलने पर आईओ बदलकर अन्य सक्षम अधिकारी को विवेचना सौंपी जाए।
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