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असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगे आरोपो की जांच पूरी, रिपोर्ट प्राचार्य को सौंपी
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Investigation of allegations on Assistant Professor completed, report submitted to Principal
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काशीपुर। राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगे आरोपों की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट महाविद्यालय के प्राचार्य को सौंप दी है। असिस्टेंट प्रोफेसर ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सूत्रों के अनुसार जांच में असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगाए गए अधिकांश आरोप निराधार पाए गए।
विदित हो कि 21 अक्तूबर को काशीपुर से पंजीकृत डाक द्वारा एक शिकायती पत्र उच्च शिक्षा निदेशक को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि काशीपुर महाविद्यालय में एक असिस्टेंट प्रोफेसर अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। क्लास में भी वह हमेशा नशे की हालत में रहते हैं। आरोप है कि असाइनमेंट के नाम पर वह छात्राओं का शोषण करते हैं। रुपये नहीं देने पर छात्राओं को फेल कर दिया जाता है या फेल करने की धमकी दी जाती है।
आरोप था कि एक महत्वपूर्ण संकाय के एचओडी होने के बावजूद असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एचसी पंत ने प्राचार्य डॉ. चंद्रराम से जांच आख्या मांगी थी। प्राचार्य ने इस मामले में जांच के लिए वनस्पति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीता सचान के नेतृत्व में समिति का गठन किया था।
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इसमें अर्थशास्त्र की एचओडी जानकी सुयाल व हिन्दी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुनीता कुशवाहा को शामिल किया गया था। जांच समिति ने एमकॉम प्रथम व तृतीय सेमेस्टर की 67 छात्राओं से इन आरोपों के संबंध में जानकारी जुटाई। छात्राओं ने असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगे गंभीर आरोपों को गलत बताया।
अलबत्ता कुछेक छात्राओं ने असाइनमेंट में अंक देने में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे षड्यंत्र करार दिया। प्राचार्य डॉ. चंद्रराम ने बताया कि समिति ने जांच रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है। इसे वह उच्च शिक्षा निदेशक को भेज रहे हैं।
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विदित हो कि 21 अक्तूबर को काशीपुर से पंजीकृत डाक द्वारा एक शिकायती पत्र उच्च शिक्षा निदेशक को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि काशीपुर महाविद्यालय में एक असिस्टेंट प्रोफेसर अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। क्लास में भी वह हमेशा नशे की हालत में रहते हैं। आरोप है कि असाइनमेंट के नाम पर वह छात्राओं का शोषण करते हैं। रुपये नहीं देने पर छात्राओं को फेल कर दिया जाता है या फेल करने की धमकी दी जाती है।
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आरोप था कि एक महत्वपूर्ण संकाय के एचओडी होने के बावजूद असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एचसी पंत ने प्राचार्य डॉ. चंद्रराम से जांच आख्या मांगी थी। प्राचार्य ने इस मामले में जांच के लिए वनस्पति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीता सचान के नेतृत्व में समिति का गठन किया था।
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इसमें अर्थशास्त्र की एचओडी जानकी सुयाल व हिन्दी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुनीता कुशवाहा को शामिल किया गया था। जांच समिति ने एमकॉम प्रथम व तृतीय सेमेस्टर की 67 छात्राओं से इन आरोपों के संबंध में जानकारी जुटाई। छात्राओं ने असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगे गंभीर आरोपों को गलत बताया।
अलबत्ता कुछेक छात्राओं ने असाइनमेंट में अंक देने में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे षड्यंत्र करार दिया। प्राचार्य डॉ. चंद्रराम ने बताया कि समिति ने जांच रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है। इसे वह उच्च शिक्षा निदेशक को भेज रहे हैं।