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भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच जल परामर्श कार्यशाला आयोजित
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पंतनगर। भारत-ऑस्ट्रेलियाई नीति और तकनीकी साझा कार्यक्रम के तहत जल परामर्श कार्यशाला का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य साझा कार्यक्रम के तहत जल संसाधन प्रबंधन में अनुभवों को साझा करना, ऑस्ट्रेलियाई और भारत सरकार के अधिकारियों, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों का जल संसाधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता व दोनों देशों के जल पेशेवरों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था।
सोमवार को ऑनलाइन आयोजित इस कार्यशाला में जीबी पंत कृषि विवि स्थित प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. अलकनंदा अशोक समेत सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक डॉ. एचजे शिवा प्रसाद व डॉ. ज्योति प्रसाद ने भाग लिया। डॉ. शिवा प्रसाद ने कहा कि साझा कार्यक्रम के तहत दोनों देश जल संसाधनों की पहचान करें। इसका उद्देश्य सहयोग और नेटवर्किंग के लिए दोनों देशों के जल पेशेवरों को एक साथ लाना, जल, शिक्षा और क्षमता निर्माण के लिए ज्ञान उत्पाद के रूप में वेबिनार पर आधारित वीडियो की श्रृंखला व एक चर्चा पत्र विकसित करना था। राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त राकेश कश्यप ने कार्यशाला के उद्देश्य और अपेक्षित परिणामों के बारे में बताया। कार्यक्रम का पर्यवेक्षण पश्चिमी सिडनी विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर बसंत माहेश्वरी ने किया।
इस द्विपक्षीय वर्चुअल कार्यशाला में विशेषज्ञों ने क्षमता निर्माण की जरूरतों सहित भारत के लिए जल प्रबंधन, जल नीति और जल प्रशासन के प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा की। इसमें कई विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया। वेबिनार, लघु पाठ्यक्रम, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण आदि के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया और भारत के पेशेवरों के बीच नेटवर्किंग गतिविधियों को मजबूत करने का प्रस्ताव दिया गया।
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साथ ही निर्णय लिया गया कि अगले बारह महीनों के दौरान वर्चुअल कार्यशालाएं आयोजित होती रहेंगी। अंत में हाल ही में आयोजित वर्चुअल वर्कशॉप का सारांश और निष्कर्ष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी रुड़की के डॉ. अनिल कुमार लोहनी की ओर से पढ़ा गया। इस वर्कशाप में ऑस्ट्रेलिया के कई संगठनों ने भाग लिया।
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सोमवार को ऑनलाइन आयोजित इस कार्यशाला में जीबी पंत कृषि विवि स्थित प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. अलकनंदा अशोक समेत सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक डॉ. एचजे शिवा प्रसाद व डॉ. ज्योति प्रसाद ने भाग लिया। डॉ. शिवा प्रसाद ने कहा कि साझा कार्यक्रम के तहत दोनों देश जल संसाधनों की पहचान करें। इसका उद्देश्य सहयोग और नेटवर्किंग के लिए दोनों देशों के जल पेशेवरों को एक साथ लाना, जल, शिक्षा और क्षमता निर्माण के लिए ज्ञान उत्पाद के रूप में वेबिनार पर आधारित वीडियो की श्रृंखला व एक चर्चा पत्र विकसित करना था। राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त राकेश कश्यप ने कार्यशाला के उद्देश्य और अपेक्षित परिणामों के बारे में बताया। कार्यक्रम का पर्यवेक्षण पश्चिमी सिडनी विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर बसंत माहेश्वरी ने किया।
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इस द्विपक्षीय वर्चुअल कार्यशाला में विशेषज्ञों ने क्षमता निर्माण की जरूरतों सहित भारत के लिए जल प्रबंधन, जल नीति और जल प्रशासन के प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा की। इसमें कई विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया। वेबिनार, लघु पाठ्यक्रम, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण आदि के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया और भारत के पेशेवरों के बीच नेटवर्किंग गतिविधियों को मजबूत करने का प्रस्ताव दिया गया।
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साथ ही निर्णय लिया गया कि अगले बारह महीनों के दौरान वर्चुअल कार्यशालाएं आयोजित होती रहेंगी। अंत में हाल ही में आयोजित वर्चुअल वर्कशॉप का सारांश और निष्कर्ष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी रुड़की के डॉ. अनिल कुमार लोहनी की ओर से पढ़ा गया। इस वर्कशाप में ऑस्ट्रेलिया के कई संगठनों ने भाग लिया।