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UK: नकली दवाइयों से लेकर अवैध शराब तक...बाजपुर रेड ने खोल दी ‘कालाबाजारी’ की पोल, हरियाणा तक फैला नेटवर्क

Sun, 19 Jul 2026 11:50 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, रुद्रपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रुद्रपुर Published by: Heera Updated Sun, 19 Jul 2026 11:50 PM IST
सार

बाजपुर में हुई कार्रवाई ने सिर्फ नकली दवाइयों के कारोबार के साथ अवैध शराब के समानांतर चल रहे नेटवर्क का भी खुलासा कर दिया। एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी ने हरियाणा से शराब मंगाकर उत्तराखंड में सप्लाई करने की बात स्वीकार की है।

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Illegal liquor and fake medicine business exposed in bazpur
अपराध - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

 

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बाजपुर में हुई कार्रवाई ने सिर्फ नकली दवाइयों के कारोबार के साथ अवैध शराब के समानांतर चल रहे नेटवर्क का भी खुलासा कर दिया। एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी ने हरियाणा से शराब मंगाकर उत्तराखंड में सप्लाई करने की बात स्वीकार की है। इससे साफ है कि नेटवर्क का दायरा राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ था।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली दवाइयों और अवैध शराब की सप्लाई के लिए एक ही परिवहन और वितरण तंत्र का इस्तेमाल किया जाता था या दोनों के अलग-अलग नेटवर्क थे। बरामद पैकिंग सामग्री और मशीनों से यह भी संकेत मिले हैं कि सामान को वैध उत्पाद जैसा दिखाकर बाजार में उतारने की तैयारी की जाती थी।

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एसटीएफ सूत्रों के अनुसार अब हरियाणा से जुड़े सप्लायरों, परिवहनकर्ताओं, गोदाम संचालकों और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।

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नकली दवाइयां बन सकती थीं जानलेवा
एसटीएफ की कार्रवाई में बरामद नकली दवाइयां अम्लता, जीवाणु संक्रमण, दर्द, नसों की बीमारी, प्रोस्टेट, कैल्शियम और आयरन की कमी जैसे सामान्य और गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली थीं। अगर ये दवाइयां मरीजों तक पहुंच जातीं तो इलाज बेअसर होने के साथ संक्रमण बढ़ने, बीमारी गंभीर होने और जान पर खतरा पैदा होने की आशंका रहती। डॉक्टर के अनुसार, नकली दवाइयों में सही मात्रा में दवा का तत्व नहीं होता, जिससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या भी बढ़ सकती है।

निशाने पर थी लाखों मरीजों की सेहत
बरामदगी में करीब एक लाख टैबलेट और 15 हजार से अधिक सिरप की बोतलें शामिल हैं। ये दवाइयां रोजमर्रा में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली श्रेणी की हैं, जिनका उपयोग बच्चे, बुजुर्ग और गंभीर मरीज तक करते हैं। इतनी बड़ी मात्रा यह संकेत देती है कि इनकी सप्लाई केवल एक शहर तक सीमित नहीं थी, बल्कि बड़े बाजार को निशाना बनाया गया था। अगर यह खेप बाजार में पहुंच जाती तो लाखों लोगों की सेहत जोखिम में पड़ सकती थी।

मशीनों से अवैध कारोबार, लाइसेंस की आड़ में खेल
एसटीएफ की छापेमारी में एसएस टैंक, फिलिंग मशीन, सीलिंग मशीन और लेबलिंग मशीन सहित कई उपकरण मिले। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नकली दवाइयों का निर्माण छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था। इसके अलावा आरोपी के पास एलोपैथिक दवा निर्माण का वैध लाइसेंस नहीं था। आरोप है कि आयुर्वेदिक और फूड लाइसेंस की आड़ लेकर एलोपैथिक दवाइयों का अवैध निर्माण किया जा रहा था। जांच एजेंसियां अब लाइसेंस के दुरुपयोग की भी पड़ताल कर रही हैं।

आरोपी से पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं और इस नेटवर्क के तार कहां तक फैले हैं यह भी पता लगाया जा सकेगा। मामले में टीम हर स्तर से अपनी जांच में जुटी हुई है। -नीलेश आनंद भरणे, आईजी एसटीएफ

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