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Udham Singh Nagar News: हिंदी प्रेम सभा ने सात साल से नहीं खरीदी कोई किताब
Fri, 28 Apr 2023 11:19 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 28 Apr 2023 11:19 PM IST
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पुस्तकालय के कोषाध्यक्ष मनोज कौशिक।
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काशीपुर। हिंदी प्रेम सभा ने सात-आठ साल से कोई किताब नहीं खरीदी है। इसका कारण लोगों का किताबों से लगातार कम होता लगाव है। अब लोग किताब पढ़ने के बजाय इंटरनेट पर समय बिताना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। प्रेम सभा के कोषाध्यक्ष मनोज कौशिक ने बताया कि आम लोगों तक इंटरनेट पहुंचने के कारण लोगों ने पुस्तकालय आना लगभग बंद कर दिया है। आज के दौर में सब कुछ ऑनलाइन पढ़ने के लिए घर बैठे मिल रहा है। इसलिए संस्था ने भी नई किताबें खरीदना बंद कर दिया है। वहां सभी समाचार पत्र मंगाए जाते हैं क्योंकि अखबारों के पाठक आज भी रोजाना आते हैं। उन्होंने बताया पुस्तकालय में करीब 150 लोग पंजीकृत हैं जिनमें से 50-60 लोग ही पुस्तकालय में रोजाना आते हैं। इनमें कुछ युवा वर्ग भी शामिल है।
नगर क्षेत्र के डॉक्टर लेन में करीब 105 वर्ष पुरानी हिंदी प्रेम सभा का पुस्तकालय है। इसकी स्थापना भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत ने की थी। इस पुस्तकालय का संचालन हिंदी प्रेम सभा संस्था अपने संसाधनों से करती हैं। इस पुस्तकालय में दो लाइब्रेरियन और दो सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं जो कि पुस्तकों का रखरखाव करते हैं। यह पुस्तकालय सुबह आठ बजे से 12 बजे तक और शाम चार से सात बजे तक खोला जाता है।
यहां इतिहास, भूगोल, राजनीति से संबंधित बहुत पुरानी पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। भाषण प्रतियोगिता समेत कई बड़ी यात्राओं से संबंधित पुस्तकें यहां मौजूद हैं। संस्कृत साहित्य, पुराने साहित्यकार, विज्ञान, नोबेल पुरस्कार से संबंधित पुस्तकों को यहां पर संरक्षित करके रखा गया है। यहां उर्दू की भी बहुत किताबें हैं। पुरानी किताबों को रसायन लगाकर सुरक्षित रखा जा रहा है।
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35-40 लोगों के बैठने की है व्यवस्था
काशीपुर। हिंदी प्रेम सभा के पुस्तकालय में किताबों को रखने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है जबकि पढ़ने के लिए एक हाॅल में चार बड़ी टेबल लगाई गई हैं जहां 35-40 लोग बैठकर अपनी मनपसंद किताबों को पढ़ सकते हैं जबकि इसमें पुस्तकालय और वाचनालय की जरूरत है।
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नगर क्षेत्र के डॉक्टर लेन में करीब 105 वर्ष पुरानी हिंदी प्रेम सभा का पुस्तकालय है। इसकी स्थापना भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत ने की थी। इस पुस्तकालय का संचालन हिंदी प्रेम सभा संस्था अपने संसाधनों से करती हैं। इस पुस्तकालय में दो लाइब्रेरियन और दो सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं जो कि पुस्तकों का रखरखाव करते हैं। यह पुस्तकालय सुबह आठ बजे से 12 बजे तक और शाम चार से सात बजे तक खोला जाता है।
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यहां इतिहास, भूगोल, राजनीति से संबंधित बहुत पुरानी पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। भाषण प्रतियोगिता समेत कई बड़ी यात्राओं से संबंधित पुस्तकें यहां मौजूद हैं। संस्कृत साहित्य, पुराने साहित्यकार, विज्ञान, नोबेल पुरस्कार से संबंधित पुस्तकों को यहां पर संरक्षित करके रखा गया है। यहां उर्दू की भी बहुत किताबें हैं। पुरानी किताबों को रसायन लगाकर सुरक्षित रखा जा रहा है।
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35-40 लोगों के बैठने की है व्यवस्था
काशीपुर। हिंदी प्रेम सभा के पुस्तकालय में किताबों को रखने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है जबकि पढ़ने के लिए एक हाॅल में चार बड़ी टेबल लगाई गई हैं जहां 35-40 लोग बैठकर अपनी मनपसंद किताबों को पढ़ सकते हैं जबकि इसमें पुस्तकालय और वाचनालय की जरूरत है।