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Udham Singh Nagar News: खादों में पोषक तत्वों की भारी कमी, 56 नमूने फेल

Thu, 18 May 2023 12:28 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Thu, 18 May 2023 12:28 AM IST
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Heavy shortage of nutrients in fertilizers, 56 samples failed
रुद्रपुर स्थित राज्य उर्वरक एवं कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला रुद्रपुर।
रुद्रपुर। फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए खेतों में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में पोषक तत्वों और कीटनाशकों में कीटनाशक तत्वों की भारी कमी पाई गई है। रुद्रपुर स्थित राज्य उर्वरक एवं कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला की सालाना रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। जांच में उर्वरकों के 37 और कीटनाशकों के 19 नमूने फेल हुए हैं। यह उर्वरक और कीटनाशक मिट्टी की उर्वरता और पौधों के लिए नुकसानदायक हैं। जांच रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग ने राज्य स्तरीय प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट कृषि निदेशालय भेज दिया है। जहां से रिपोर्ट को कृषि मंत्रालय भारत सरकार को भेजा जाएगा।
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रुद्रपुर स्थित राज्य उर्वरक एवं कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला में एक अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक उत्तराखंड के अलावा यूपी, चेन्नई, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश से उर्वरकों के 237 नमूनों और कीटनाशकों के 386 नमूनों की जांच की गई थी। इनमें खेती में सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों डीएपी (डाई अमोनियम फास्फेट) के दो और एनपीके (नाइट्रेजन फास्फोरस व पोटेशियम) के आठ नमूने शामिल हैं। जांच में एनपी, एमओपी, एपीएस, जिंक, पोटाश और माइक्रोन्यूट्रेंट (बोरोन, मैग्नीज, कॉपर, आयरन आदि) समेत कुल 37 नमूने फेल हुए हैं। इसके अलावा कीटनाशकों में इमीडा, इथेप्रॉन, प्रोपीकोना जॉल, कारबेंडा जीन समेत 19 के नमूने फेल हुए हैं। संवाद
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बाहरी राज्यों के हैं अधिकतर नमूने
जांच में फेल हुए अधिकतर नमूने चेन्नई, तमिलनाडु, हैदराबाद, कनार्टक, मध्य प्रदेश आदि राज्यों हैं। इन राज्यों की प्रयोगशालाओं में इन उर्वरकों और कीटनाशकों के नमूने फेल होने के बाद इन्हें रेफरल जांच के लिए उत्तराखंड की रुद्रपुर स्थित प्रयोगशाला में भेजा गया था। इन नमूनों के दोबारा फेल होने पर इसकी गोपनीय जांच रिपोर्ट कृषि निदेेशालय देहरादून के माध्यम से कृषि मंत्रालय भारत सरकार को भेजा जाएगा। जहां से सरकार की ओर से संबंधित राज्यों को यह रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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उर्वरकों के नमूनों का ब्यौरा
उर्वरक -- कुल नमूने -- फेल नमूने
एनपीके --20 --08
जिंक -- 09--05
एनपी--06--02
एपीएस--19--04
डीएपी-- 53--02
पोटाश--25--01
एमओपी--04--01
बेंटोनाइट सल्फर --01--01
माइक्रोन्यूट्रेंट-30--13


जुताई और बुवाई के समय इस्तेमाल होती है डीएपी और एनपीके
रुद्रपुर। डीएपी एक छारीय प्रकृति का रासायनिक उर्वरक है। हरित क्रांति के बाद इस खाद का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है। खेतों की जुताई व बीजों की बुवाई के समय इसे मिट्टी में मिलाया जाता है, जो पौधों की जड़ों के विकास में काम आता है। धान गेहूं के साथ ही तिलहन व दलहन के उपयोगी है। यह पौधों में नाइट्रोजन और नाइट्रोजन की कमी दूर होती है। जबकि एनपीके पौधों में फास्फोरस, पोटेशियम और नाइट्रोजन की कमी दूरी करते हुए पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण है। पोटाश मिट्टी के पीएच के बढ़ाता है, इसकी कमी से पौधे पीले पड़ जाते हैं। संवाद

उर्वरकों और कीटनाशकों की जांच रिपोर्ट को कृषि निदेशालय उत्तराखंड के बाद कृषि मंत्रालय भारत सरकार को भेजे जाएंगे। इसके बाद प्रदेश सरकारों की ओर से उर्वरकों व कीटनाशकों के स्टॉक को नष्ट करवाने के साथ ही निर्माताओं व विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

- एके वर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी।

जांच रिपोर्ट में उर्वरकों के 37 और कीटनाशकों के 19 नमूने फेल हुए हैं। अधिकतर नमूने दूसरे राज्यों से भेजे गए थे। चूंकि यह नमूने दूसरी बार फेल हुए इसलिए निर्माता कंपनी और विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त होने के साथ ही मुकदमे भी हो सकते हैं। - मो. ताहिर, सहायक निदेशक, राज्य उर्वरक एवं कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला रुद्रपुर।
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