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Udham Singh Nagar News: चिकित्सकों, संसाधनों और स्टाफ की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं कोमा में

Mon, 09 Feb 2026 01:46 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Mon, 09 Feb 2026 01:46 AM IST
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Healthcare services in a coma due to a shortage of doctors, resources and staff.
रुद्रपुर। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं इस समय कोमा में चल रही हैं। आलम यह है कि कहीं संसाधन नहीं हैं। कहीं स्टाफ का टोटा है। कहीं चिकित्सकों की कमी है तो कहीं सर्जन, ईएनटी नहीं हैं। कहीं मरीज एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए भटकते हैं तो कहीं वार्ड ब्वॉय और वार्ड आया का टोटा है। कहीं टेक्नीशियन और रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं तो कहीं चीफ फार्मासिस्ट ही नजर नहीं आते। सबसे अहम बात तो यह है कि विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का मुंह देखना पड़ता है।
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गदरपुर में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं

गदरपुर। सीएचसी गदरपुर में पिछले छह माह से हड्डी रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2005 में पीएचसी से परिवर्तित होकर अस्तित्व में आया सीएचसी गदरपुर कभी चिकित्सक तो कभी संसाधनों की कमी झेलता रहता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद छह माह से रिक्त हैं। गंभीर मरीजों को रुद्रपुर, बाजपुर और काशीपुर जाना पड़ता है। सीएचसी में मरीजों को सर्जन, ईएनटी और ईएमओ की भी कमी खलती है।
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जनता अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित किए जाने की मांग कर रही है। रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत न होने की स्थिति में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। यहां पैथोलॉजी में जांच की सुविधा है, लेकिन लैब में स्थायी टेक्नीशियन की कमी बनी हुई है। सीएचसी में मात्र एक वार्ड ब्वॉय है जबकि पांच की जरूरत है। तीन सफाई कर्मियों के स्थान पर मात्र एक सफाई कर्मी है। सीएचसी से संबद्ध पीएचसी सकैनिया और गूलरभोज में तो सफाई कर्मी की नियुक्ति ही नहीं है। संवाद
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वर्जन

सीएचसी में चिकित्सकों, बुनियादी सुविधाएं और संसाधनों की कमी के लिए चिकित्सा प्रबंधन की बैठक में आए सीडीओ के अलावा सीएमओ को मौजूदा समस्या से अवगत कराया गया है। रिक्त पदों पर नियुक्तियां शासन स्तर से होनी है। - डाॅ. अंजनी कुमार, प्रभारी, सीएचसी गदरपुर


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किच्छा सीएचसी में डाक्टरों का टोटा

किच्छा। नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डाॅक्टरों की कमी के कारण लोगों की उम्मीदों पर खरा नही उतर पा रहा है। हालत यह है कि डाक्टरों के 10 पदों में से पांच महत्वपूर्ण पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं मरीजों की संख्या में रोज बढ़ोतरी हो रही है। सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है। वर्तमान में यहां पर चिकित्सा अधीक्षक, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, सर्जन व चीफ फार्मासिस्ट के पद रिक्त चल रहे हैं।

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सितारगंज में पीडियाट्रिशियन नहीं

सितारगंज। उप जिला अस्पताल सितारगंज में लंबे समय से पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) की तैनाती न होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में पीडियाट्रिशियन की तैनाती न होने से सबसे ज्यादा असर नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। कई मामलों में गंभीर स्थिति होने पर समय पर इलाज न मिल पाने का खतरा भी बना रहता है। जिला अस्पताल की दूरी और वहां की भीड़ के चलते मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। संवाद


-इंसेट

अस्पताल में पीडियाट्रिशियन की नियुक्ति के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। उम्मीद है जल्द ही अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होगी।
- डॉ. कुलदीप यादव, सीएमएस, उप जिला अस्पताल, सितारगंज


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संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है दिनेशपुर का पीएचसी



दिनेशपुर। नगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी है। यहां स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। रक्त के अलावा किसी भी प्रकार की जांच की सुविधा और आपातकालीन परिस्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है।




साफ सफाई और बेहतर व्यवस्थाओं के लिए दो बार जिले में प्रथम स्थान का अवार्ड जीतने वाले इस अस्पताल में प्रतिदिन 120 ओपीडी होती हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी के स्थानांतरण के बाद वर्तमान में यहां कोई स्थाई चिकित्सक नहीं है। व्यवस्था के तौर पर यहां एक महिला चिकित्सक की तैनाती की गई है, जो तीन बजे के बाद अस्पताल से चली जाती हैं। छह साल से वार्ड ब्वॉय भी नहीं हैं। चार साल पहले लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति हुई थी, मगर टेक्नीशियन ने चार्ज नहीं लिया। लेबर रूम में वार्ड आया भी नहीं हैं। अस्पताल में रक्त की जांच के अलावा किसी प्रकार की जांच नही होती। वर्तमान में अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी, स्थाई महिला चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ, लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय और वार्ड आया की नितांत आवश्यकता है। संवाद
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