हे उत्तराखंड की भूमि तेरी जय-जयकार
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रुद्रपुर के गांधी मैदान में रविवार को लोक कलाकारों ने गढ़वाल और कुमाऊं की झलक दिखाकर पहाड़ की भूली बिसरी यादों को ताजा कर दिया। कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने घंटों दर्शकों को बांधे रखा। दिल्ली से आए कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों की जमकर वाहवाही भी लूटी। उत्तराखंड की संस्कृति पर आधारित एक से बढ़कर एक गीतों के बीच दो दिवसीय उत्तरायणी महोत्सव का समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी कुमाऊं अजय रौतेला थे जबकि विशिष्टि अतिथि के रूप में सीजेएम अंबिका पंत थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हीरा बल्लभ शास्त्री ने की।
शैल सांस्कृतिक समिति रुद्रपुर की ओर से आयोजित दो दिवसीय उत्तरायणी महोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई। शिवदत्त पंत के गीत ‘दैंणी हैजाए मेरी नंदा भगवती मां’ के साथ नंदा राजजात यात्रा की प्रस्तुति दिखाई गई। इसके साथ ही कलाकारों ने उत्तराखंड की संस्कृति और सभ्यता को दर्शकों के समक्ष रखा। ‘ओ मेरी धनुली धना, हिट उत्तरेणी को म्याला’ पर लोग जमकर झूमे। दीपा पंत ने ‘घुघूती ना बसां आमा की डाई मा’ की शानदार प्रस्तुति दी। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता दिवाकर पांडे और मंजू बहुगुणा ने किया। कलाकारों की टीम आकाशवाणी और दूरदर्शक दिल्ली के मशहूर कलाकार शिव दत्त पंत के नेतृत्व में यहां पहुंची थी।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डीआईजी कुमाऊं अजय रौतेला ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन से हम अपनी संस्कृति और धरोहर को संजोकर रख सकते हैं। वहां पीएसी के सहसेना नायक रमेश चंद्र जोशी, आरपी शर्मा, सिडकुल इंटरप्रिन्योर सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष अजय तिवारी, प्रताप सिंह धानक, चंद्र सिंह रावत, नागेंद्र शर्मा, भरत लाल शाह, केएस नेगी, दिनेश चंद्र भट्ट आदि थे।
‘घास कुटलो इजू ऊंचा डाना मा’
उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से चल रहे तीन दिवसीय उत्तरायणी कौतिक का रविवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया। मशहूर लोक गायक पप्पू कार्की और गायिका हेमा ध्यानी ने अपने गीतों से समां बांध दिया। हेमा ध्यानी ने ‘घास कुटलो इजू ऊंचा डाना मा’, ‘हिलमा चांदी कुघटना’, ‘मार छपाया सुरम्पाली कॉलिक तेरो मार छपाया’ गीत गाया। पप्पू कार्की ने ‘पार भीड़े की बसंती छोरी’, ‘लाली हो हौसिया लाली’ आदि लोकगीतों की प्रस्तुति दी। इसके अलावा इंदू आर्य ने ‘अगीली बगीली है लौंडा चंदरा’ गीत गाया। वहां समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट, महामंत्री प्रमोद भट्ट, हेमंत बोरा, राजेंद्र सिंह बिष्ट, मुकेश सनवाल, पार्वती कपिल, ललित मैनाली, डीके पंतोला, एनबी जोशी आदि थे।