{"_id":"5873d7b64f1c1b1829ba91f7","slug":"first-there-is-the-problem-of-people-notbandi","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी के बाद थम नहीं रही लोगों की परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी के बाद थम नहीं रही लोगों की परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Tue, 10 Jan 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के पचास से अधिक दिन गुजरने के बाद शहर के लोगों की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बैंकों में कैश तो उपलब्ध हो गया है, लेकिन पांच सौ के नए नोट ज्यादा नहीं आने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नोटबंदी की ज्यादा मार मजदूर वर्ग पर पड़ रही है। मजदूरों का अधिकतर समय बैंकों में लाइन में खड़े होने में लगता है। पीएनबी के मुख्य शाखा प्रबंधक रमेश थांगी ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए बताया कि पांच सौ के नए नोट आरबीआई की ओर से ही ज्यादा नहीं आने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरों के बैंक एकाउंट खोलने के लिए उनकी टीम सिडकुल में जाकर खाते खोलने के प्रयास कर रही है।
वहीं बैंकों में दो हजार के नोट तो लगातार आ रहे हैं, लेकिन बड़ा नोट होने के कारण लोगों को बाजार में दो हजार का नोट खपाना चुनौती साबित हो रहा है। दो हजार के नोट से अधिकांश महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक में रुपये निकालने पहुंची प्रतिभा जोशी ने बताया कि पांच सौ के नये नोट नहीं मिलने से उन्हें बाजार में सब्जियों की खरीददारी और बच्चों की जरुरत का सामान लेने में सबसे अधिक मुश्किल का सामना करना पड़ता है। दो हजार का नोट देने पर दुकानदार और ज्यादा सामान लेने का आग्रह करता है। नहीं चाहते हुए भी महिलाओं को अधिक सामान खरीदना पड़ रहा है। इससे महिलाओं को परेशानी हो रही है और रसोई का बजट भी गड़बड़ा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नोटबंदी की ज्यादा मार मजदूर वर्ग पर पड़ रही है। मजदूरों का अधिकतर समय बैंकों में लाइन में खड़े होने में लगता है। पीएनबी के मुख्य शाखा प्रबंधक रमेश थांगी ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए बताया कि पांच सौ के नए नोट आरबीआई की ओर से ही ज्यादा नहीं आने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरों के बैंक एकाउंट खोलने के लिए उनकी टीम सिडकुल में जाकर खाते खोलने के प्रयास कर रही है।
विज्ञापन
वहीं बैंकों में दो हजार के नोट तो लगातार आ रहे हैं, लेकिन बड़ा नोट होने के कारण लोगों को बाजार में दो हजार का नोट खपाना चुनौती साबित हो रहा है। दो हजार के नोट से अधिकांश महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक में रुपये निकालने पहुंची प्रतिभा जोशी ने बताया कि पांच सौ के नये नोट नहीं मिलने से उन्हें बाजार में सब्जियों की खरीददारी और बच्चों की जरुरत का सामान लेने में सबसे अधिक मुश्किल का सामना करना पड़ता है। दो हजार का नोट देने पर दुकानदार और ज्यादा सामान लेने का आग्रह करता है। नहीं चाहते हुए भी महिलाओं को अधिक सामान खरीदना पड़ रहा है। इससे महिलाओं को परेशानी हो रही है और रसोई का बजट भी गड़बड़ा रहा है।
विज्ञापन