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गन्ना उत्पादक जिला बनने की ओर अग्रसर पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ के एक खेत में उगाए गए गन्ने में महिलाएं। संवाद
- फोटो : KASHIPUR
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कुंदन शाह
काशीपुर। पिथौरागढ़ जिला ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार की तरह गन्ना उत्पादक जिला बनने की दिशा में अग्रसर है। पिथौरागढ़ के लगभग डेढ़ सौ किसान दशकों से गन्ने की खेती करते आ रहे हैं। बीते दिनों मामला संज्ञान में आने के बाद गन्ना आयुक्त ने शोध कराया।
विषय विशेषज्ञ डॉ. रीना नौलिया ने शोध कर रिपोर्ट गन्ना आयुक्त कार्यालय को सौंप दी है। अब रिपोर्ट पर विचार किया जा रहा है। अगर पिथौरागढ़ में पर्याप्त मात्रा में गन्ने का उत्पादन होने की बात सामने आती है तो पिथौरागढ़ को गन्ना उत्पादक जिलों में शामिल कर दिया जाएगा।
पिथौरागढ़ जिले में दशकों से गन्ने का उत्पादन किया जाता है, लेकिन गन्ना उत्पादक जिलों में उसका नाम नहीं है। बीते दिनों जैविक खेती के विकास में लगे हल्द्वानी के किसान नरेंद्र मेहरा ने इसकी जानकारी गन्ना एवं चीनी आयुक्त उत्तराखंड हंसा दत्त पांडेय को दी। गन्ना आयुक्त ने इस विषय पर शोध करने की जिम्मेदारी डॉ. रीना नौलिया को सौंपी।
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डॉ. रीना ने पिथौरागढ़ जिले के किसानों से जानकारी जुटाई। इस दौरान सामने आया कि सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पैतृक गांव हड़खोला में भी गन्ने का उत्पादन होता है और यह गांव भी पिथौरागढ़ में आता है। गन्ना शोध संस्थान काशीपुर के प्रभारी डॉ. आनंद सिंह जीना भी पिथौरागढ़ में पैदा होने वाले गन्ने पर शोध कर चुके हैं।
अब तक हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल का भाबर और चंपावत के कुछ भाग में गन्ने का उत्पादन होना ही माना जाता है। अब पिथौरागढ़ भी गन्ना उत्पादक की सूची में जोड़ा जा सकता है। गन्ना आयुक्त ने बताया कि पिथौरागढ़ में स्वयं सहायता समूह गन्ने के रस को पाउच बनाकर बेच सकते हैं। गुड़ भी उसी तर्ज पर बेच सकते हैं। यह किसानों और ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार का अच्छा माध्यम हो सकता है।
मैं जैविक फसलें उगाता हूं और सभी को इसके लिए प्रेरित करता हूं। मुझे पता चला था कि पिथौरागढ़ जिले में लगभग डेढ़ सौ किसान गन्ने का उत्पादन करते हैं। वे केवल गोबर की खाद से गन्ना उगाते हैं। यह जानकारी मैंने गन्ना एवं चीनी आयुक्त हंसा दत्त पांडेय को दी।
-नरेंद्र मेहरा, किसान, हल्द्वानी
मैं कई पीढ़ियों से गन्ने की खेती करता आ रहा हूं। हम गन्ने के रस से गुड़ बनाते हैं। हमारे पास गन्ने की बुवाई के सभी संसाधन हैं। हमारे लिए सबसे बड़ी परेशानी जंगली पशु हैं जो गन्ने की फसल को भारी नुकसान करते हैं।
-नील बहादुर चंद्र, किसान, पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ के किसान भी गन्ने का उत्पादन करते हैं। इस संबंध में विषय विशेषज्ञ डॉ. रीना नौलिया की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। यहां पाए जाने वाले गन्ने के रस का टेस्ट कराया जा रहा है। पिथौरागढ़ में गन्ने को जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं।
इससे बचाने के लिए पिथौरागढ़ के किसानों को फरवरी में एक विशेष प्रजाति का गन्ना दिया जाएगा। गन्ना किसानों की संख्या बढ़ने पर पिथौरागढ़ को भी ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार की तरह गन्ना उत्पादक क्षेत्र घोषित कराने की दिशा में कार्रवाई शुरू की जाएगी। चमोली जिले में भी गन्ने का उत्पादन हो सकता है। गन्ना उत्पादन के लिए चमोली में भी भूमि व वातावरण अनुकूल है।
-हंसा दत्त पांडेय, गन्ना एवं चीनी आयुक्त उत्तराखंड।
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काशीपुर। पिथौरागढ़ जिला ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार की तरह गन्ना उत्पादक जिला बनने की दिशा में अग्रसर है। पिथौरागढ़ के लगभग डेढ़ सौ किसान दशकों से गन्ने की खेती करते आ रहे हैं। बीते दिनों मामला संज्ञान में आने के बाद गन्ना आयुक्त ने शोध कराया।
विषय विशेषज्ञ डॉ. रीना नौलिया ने शोध कर रिपोर्ट गन्ना आयुक्त कार्यालय को सौंप दी है। अब रिपोर्ट पर विचार किया जा रहा है। अगर पिथौरागढ़ में पर्याप्त मात्रा में गन्ने का उत्पादन होने की बात सामने आती है तो पिथौरागढ़ को गन्ना उत्पादक जिलों में शामिल कर दिया जाएगा।
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पिथौरागढ़ जिले में दशकों से गन्ने का उत्पादन किया जाता है, लेकिन गन्ना उत्पादक जिलों में उसका नाम नहीं है। बीते दिनों जैविक खेती के विकास में लगे हल्द्वानी के किसान नरेंद्र मेहरा ने इसकी जानकारी गन्ना एवं चीनी आयुक्त उत्तराखंड हंसा दत्त पांडेय को दी। गन्ना आयुक्त ने इस विषय पर शोध करने की जिम्मेदारी डॉ. रीना नौलिया को सौंपी।
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डॉ. रीना ने पिथौरागढ़ जिले के किसानों से जानकारी जुटाई। इस दौरान सामने आया कि सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पैतृक गांव हड़खोला में भी गन्ने का उत्पादन होता है और यह गांव भी पिथौरागढ़ में आता है। गन्ना शोध संस्थान काशीपुर के प्रभारी डॉ. आनंद सिंह जीना भी पिथौरागढ़ में पैदा होने वाले गन्ने पर शोध कर चुके हैं।
अब तक हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल का भाबर और चंपावत के कुछ भाग में गन्ने का उत्पादन होना ही माना जाता है। अब पिथौरागढ़ भी गन्ना उत्पादक की सूची में जोड़ा जा सकता है। गन्ना आयुक्त ने बताया कि पिथौरागढ़ में स्वयं सहायता समूह गन्ने के रस को पाउच बनाकर बेच सकते हैं। गुड़ भी उसी तर्ज पर बेच सकते हैं। यह किसानों और ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार का अच्छा माध्यम हो सकता है।
मैं जैविक फसलें उगाता हूं और सभी को इसके लिए प्रेरित करता हूं। मुझे पता चला था कि पिथौरागढ़ जिले में लगभग डेढ़ सौ किसान गन्ने का उत्पादन करते हैं। वे केवल गोबर की खाद से गन्ना उगाते हैं। यह जानकारी मैंने गन्ना एवं चीनी आयुक्त हंसा दत्त पांडेय को दी।
-नरेंद्र मेहरा, किसान, हल्द्वानी
मैं कई पीढ़ियों से गन्ने की खेती करता आ रहा हूं। हम गन्ने के रस से गुड़ बनाते हैं। हमारे पास गन्ने की बुवाई के सभी संसाधन हैं। हमारे लिए सबसे बड़ी परेशानी जंगली पशु हैं जो गन्ने की फसल को भारी नुकसान करते हैं।
-नील बहादुर चंद्र, किसान, पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ के किसान भी गन्ने का उत्पादन करते हैं। इस संबंध में विषय विशेषज्ञ डॉ. रीना नौलिया की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। यहां पाए जाने वाले गन्ने के रस का टेस्ट कराया जा रहा है। पिथौरागढ़ में गन्ने को जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं।
इससे बचाने के लिए पिथौरागढ़ के किसानों को फरवरी में एक विशेष प्रजाति का गन्ना दिया जाएगा। गन्ना किसानों की संख्या बढ़ने पर पिथौरागढ़ को भी ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार की तरह गन्ना उत्पादक क्षेत्र घोषित कराने की दिशा में कार्रवाई शुरू की जाएगी। चमोली जिले में भी गन्ने का उत्पादन हो सकता है। गन्ना उत्पादन के लिए चमोली में भी भूमि व वातावरण अनुकूल है।
-हंसा दत्त पांडेय, गन्ना एवं चीनी आयुक्त उत्तराखंड।