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Udham Singh Nagar News: धान में बताया नमी, किसानों की आंखाें से बहा नीर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Oct 2025 02:02 AM IST
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Farmers were left teary-eyed after discovering moisture in paddy
रुद्रपुर। तराई भाबर में धान की कटाई और धान खरीद का सिलसिला जारी है। खेत से धान कटने के बाद सीधे आढ़तियों के पास पहुंच रहा है लेकिन 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। कई किसान हर दिन घाटे का सौदा कर मिलर्स को अपना धान बेच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशान ऊधमसिंह नगर जिले से सटे यूपी के काश्तकार हैं। धान में नमी के बहाने से किसानों की आंखों में पानी है।
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ऊधमसिंह नगर में 226 क्रय केंद्रों पर धान खरीद चल रही है। किसान ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से सैंकड़ों क्विंटल धान लेकर पहुंच रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों में 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाले धान की तौल में अड़चनें आ रही हैं। धान की नमी कम करने के लिए या तो उन्हें सूखना पड़ रहा है या फिर कम दाम पर उन्हें मिलरों को बेचना पड़ रहा है।
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सरकारी क्रय केंद्रों में नमी की मात्रा अधिक होने पर काश्तकार अपने धान को औने-पौने दामों पर निजी केंद्रों पर बेचने के लिए मजबूर हैं।
ऊधम सिंह नगर में 6.75 लाख मेट्रिक टन हुई धान खरीद
ऊधमसिंह नगर के सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद अनुमान से अधिक हो रही है। एक अक्तूबर से 22 अक्तूबर तक जिले के सरकारी क्रय केंद्रों पर 6.75 लाख धान खरीद हो गई है। दैनिक धान खरीद 85 हजार मीट्रिक टन है। 7236 प्रगतिशील व 927 दैनिक किसान अपना धान क्रय केंद्र में बेच चुके हैं।
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सरकारी क्रय केंद्र में हुई धान खरीद की स्थिति
एजेंसी का नाम धान खरीद प्रगतिशील किसान
खाद्य विभाग 1,20,210 1424
यूसीएफ 4,45,743 4982
एनसीसीएफ 32,731 238
यूपीसीयू 51,801 400
यूकेयूएसएस 25,224 192
(नोट- धान खरीद मीट्रिक टन में हैं। आंकड़े उप संभागीय विपणन कार्यालय के)
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किसानों की बात :
किसानों को बीघों के हिसाब से धान काटने होते हैं। खेत से धान कटने के बाद सीधे आढ़त में पहुंचता है। नमी का बहाना बनाकर अक्सर किसानों को परेशान किया जाता है। किसानों के सामने यह स्थिति आ जाती है कि उसे मजबूरी में निजी क्रय केंद्रों पर धान बेचना पड़ता है। - विक्रमजीत सिंह विर्क, किसान

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नमी मात्र बहाना है। असली वजह किसानों को परेशान करना है। सरकारी क्रय केंद्रों में तौल घटा दी गई है। किसान अपने धान को बेचने के लिए भटक रहा है। मनमानी को हम किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। - तजिंदर सिंह विर्क, किसान नेता
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