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किसान का दिव्यांग बेटा क्रिकेट के मैदान पर दिखा रहा जलवे
Sun, 03 Mar 2019 12:28 AM IST
अरुण कुमार
यासीन अंसारी
यासीन अंसारी
Published by: अरुण कुमार
Updated Sun, 03 Mar 2019 12:28 AM IST
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र्नामेंट में मैन ऑफ द मैच ट्राफी लेते दीपू सिंह राणा।
- फोटो : amar ujala
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अभावों का रोना रोकर मेहनत से जी चुराने वालों को दीपू सिंह राणा से प्रेरणा लेनी चाहिए। दिव्यांग होने के बाद भी वह क्रिकेट के मैदान पर जमकर चौके छक्के लगा रहे हैं। दीपू उत्तराखंड की दिव्यांग क्रिकेट टीम के बल्लेबाज हैं और उनका सपना देश के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना है।
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सितारगंज क्षेत्र के नकुलिया गांव निवासी दीपू सिंह राणा (26) ने बताया कि उन्हें दो वर्ष की उम्र में पोलियो हो गया था। इसके बाद वह दाएं पैर से दिव्यांग हो गए लेकिन उन्होंने हिम्मत न हारी। 2018 में रुद्रपुर ट्रायल में दिव्यांग टीम के कोच हरीश चौधरी ने उनको खेलते देखा और उनका चयन टीम में कर लिया।
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वह राज्य स्तर पर अब तक चार टूर्नामेंट खेल चुके हैं। उन्होंने हाल ही में दिल्ली में खेले गए दिव्यांग टी-20 टूर्नामेंट में उत्तराखंड टीम की ओर से सबसे तेज अर्ध शतक बनाने का रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में महाराष्ट्र की टीम के खिलाफ 14 गेंदों में 53 रनों की पारी खेल टीम को जीत दिलाई और मैन ऑफ द मैच बने।
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वह आठ मार्च से नागपुर में होने वाली टी-20 दिव्यांग व्हील चेयर टीम टूर्नामेंट में उत्तराखंड टीम की प्लेइंग इलेवन टीम का हिस्सा हैं। बताया कि इस मुकाम को हासिल करने में उनके दोस्त रुस्तम सिंह राणा ने बहुत सहयोग किया है। झनकट निवासी रुस्तम वर्तमान में बीएसएफ में हेड कांस्टेबल पद पर कोलकाता में तैनात हैं। दीपू ने बताया कि पिता तिवारी सिंह राणा किसान हैं और घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इससे वह खेल पर फोकस नहीं कर पा रहे है।