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ड्राइविंग ट्रैक और टेस्टिंग लेन के लिए एआरटीओ को जमीन नहीं मिल रही
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Sun, 18 Dec 2016 12:13 AM IST
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परिवहन विभाग रुद्रपुर को ड्राइविंग ट्रैक, आटोमेटिड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग स्कूल के लिए जमीन की दरकार है। इसके लिए एआरटीओ विभाग पिछले दो साल से भूमि उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन से कई बार फरियाद लगा चुका है, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई भी कामयाबी परिवहन विभाग को नहीं मिली।
यही कारण है कि एआरटीओ को शासन के आदेशों के कई नियमों को पूरी तरह से फालो करना उनके समक्ष एक बड़ी चुनौती बन गई है। ट्रैफिक नियमों के तहत वर्तमान में पिछले तीन साल से कई नए नियम परिवहन विभाग में लागू हो गए हैं। ऐसे में रुद्रपुर एआरटीओ को भी विभागीय नियमावली में अमल करने के लिए सबसे पहले विभाग को ड्राइविंग ट्रैक के लिए ही करीब 4000 स्क्वायर मीटर भूमि की सख्त जरूरत है।
वहीं इसके साथ ही विभाग को आटोमेटिड टेस्टिंग लेन के लिए भी करीब 5 एकड़ और ड्राइविंग स्कूल के लिए भी 5 एकड़ भूमि की सख्त जरूरत है।
एआरटीओ रुद्रपुर ने जमीन के लिए दो साल पहले तत्कालीन डीएम ब्रिजेश कुमार संत, उसके बाद डीएम पंकज पांडेय, प्रभारी डीएम डा. आशीष श्रीवास्तव और वर्तमान डीएम चंद्रेश कुमार यादव को भी जमीन का प्रस्ताव बनाकर दिया गया है, लेकिन विभाग की इस मांग पर अभी तक किसी भी डीएम ने इस दिशा में अपनी सक्रियता नहीं दिखाई। तत्कालीन डीएम डा. पंकज पांडेय ने एक बार अपने कार्यकाल में जमीन का चिन्हीकरण के लिए कदम जरूर उठाए लेकिन उसके बाद उनका स्थानांतरण हो गया और फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद विभाग ने फिर जमीन के लिए फरियाद लगाया लेकिन इस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई।
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अब वर्तमान डीएम चंद्रेश कुमार यादव को भी परिवहन विभाग ने जमीन के लिए प्रस्ताव तैयार कर मांग की है। बता दें कि हल्द्वानी परिवहन विभाग को एक साल पहले ही ड्राइविंग ट्रैक, आटोमेटिड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग स्कूल के लिए करीब दस एकड़ से अधिक भूमि गौला पार क्षेत्र में उपलब्ध हो गई है और वहां पर विभाग ने अपना कार्य भी आरंभ कर दिया है, लेकिन राज्य के सबसे अहम जिला माना जाने वाला ऊधमसिंह नगर के जिला मुख्यालय में एआरटीओ को जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
पिछले दो साल से ड्राइविंग ट्रैक के लिए करीब चार हजार मीटर जमीन और आटोमेटिड टेस्टिंग लेन के लिए करीब पांच एकड़ साथ ही ड्राइविंग स्कूल के लिए भी लगभग पांच एकड़ भूमि की मांग का प्रस्ताव बनाकर दिया गया था, लेकिन इस दिशा में अभी तक विभाग को भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। हाल ही में डीएम साहब को भी प्रस्ताव बनाकर दिया गया है। जमीन उपलब्ध होते ही मोटर लाइसेंस बनाने वालों के लिए आटोमेटिड टेस्टिंग लेन, ड्राइविंग ट्रैक और मोटर ड्राइविंग स्कूल के लिए विभाग अपना काम शुरू कर सकता है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने तक इन सभी क्षेत्रों में काम करना मुश्किल हो रहा है। विभाग के समक्ष ड्राइविंग ट्रैक की ज्यादा दिक्कत आ रही है। जमीन उपलब्ध होने का इंतजार है।
- नंदकिशोर, एआरटीओ (प्रशासन) रुद्रपुर
परिवहन विभाग को करीब दस एकड़ से अधिक की जगह की जरूरत है, इस दिशा में देखा जा रहा है कि एआरटीओ विभाग को जगह कहां उपलब्ध कराई जाए। शहर से ज्यादा दूर जमीन देने में भी लोगों को भी परेशानी होगी, इसलिए शहर के आसपास ही जमीन को देखा जा रहा है। जल्द ही इस दिशा में एआरटीओ विभाग को भूमि उपलब्ध कराने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।
- चंद्रेश कुमार यादव, डीएम, ऊधमसिंह नगर
यही कारण है कि एआरटीओ को शासन के आदेशों के कई नियमों को पूरी तरह से फालो करना उनके समक्ष एक बड़ी चुनौती बन गई है। ट्रैफिक नियमों के तहत वर्तमान में पिछले तीन साल से कई नए नियम परिवहन विभाग में लागू हो गए हैं। ऐसे में रुद्रपुर एआरटीओ को भी विभागीय नियमावली में अमल करने के लिए सबसे पहले विभाग को ड्राइविंग ट्रैक के लिए ही करीब 4000 स्क्वायर मीटर भूमि की सख्त जरूरत है।
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वहीं इसके साथ ही विभाग को आटोमेटिड टेस्टिंग लेन के लिए भी करीब 5 एकड़ और ड्राइविंग स्कूल के लिए भी 5 एकड़ भूमि की सख्त जरूरत है।
एआरटीओ रुद्रपुर ने जमीन के लिए दो साल पहले तत्कालीन डीएम ब्रिजेश कुमार संत, उसके बाद डीएम पंकज पांडेय, प्रभारी डीएम डा. आशीष श्रीवास्तव और वर्तमान डीएम चंद्रेश कुमार यादव को भी जमीन का प्रस्ताव बनाकर दिया गया है, लेकिन विभाग की इस मांग पर अभी तक किसी भी डीएम ने इस दिशा में अपनी सक्रियता नहीं दिखाई। तत्कालीन डीएम डा. पंकज पांडेय ने एक बार अपने कार्यकाल में जमीन का चिन्हीकरण के लिए कदम जरूर उठाए लेकिन उसके बाद उनका स्थानांतरण हो गया और फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद विभाग ने फिर जमीन के लिए फरियाद लगाया लेकिन इस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई।
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अब वर्तमान डीएम चंद्रेश कुमार यादव को भी परिवहन विभाग ने जमीन के लिए प्रस्ताव तैयार कर मांग की है। बता दें कि हल्द्वानी परिवहन विभाग को एक साल पहले ही ड्राइविंग ट्रैक, आटोमेटिड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग स्कूल के लिए करीब दस एकड़ से अधिक भूमि गौला पार क्षेत्र में उपलब्ध हो गई है और वहां पर विभाग ने अपना कार्य भी आरंभ कर दिया है, लेकिन राज्य के सबसे अहम जिला माना जाने वाला ऊधमसिंह नगर के जिला मुख्यालय में एआरटीओ को जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
पिछले दो साल से ड्राइविंग ट्रैक के लिए करीब चार हजार मीटर जमीन और आटोमेटिड टेस्टिंग लेन के लिए करीब पांच एकड़ साथ ही ड्राइविंग स्कूल के लिए भी लगभग पांच एकड़ भूमि की मांग का प्रस्ताव बनाकर दिया गया था, लेकिन इस दिशा में अभी तक विभाग को भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। हाल ही में डीएम साहब को भी प्रस्ताव बनाकर दिया गया है। जमीन उपलब्ध होते ही मोटर लाइसेंस बनाने वालों के लिए आटोमेटिड टेस्टिंग लेन, ड्राइविंग ट्रैक और मोटर ड्राइविंग स्कूल के लिए विभाग अपना काम शुरू कर सकता है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने तक इन सभी क्षेत्रों में काम करना मुश्किल हो रहा है। विभाग के समक्ष ड्राइविंग ट्रैक की ज्यादा दिक्कत आ रही है। जमीन उपलब्ध होने का इंतजार है।
- नंदकिशोर, एआरटीओ (प्रशासन) रुद्रपुर
परिवहन विभाग को करीब दस एकड़ से अधिक की जगह की जरूरत है, इस दिशा में देखा जा रहा है कि एआरटीओ विभाग को जगह कहां उपलब्ध कराई जाए। शहर से ज्यादा दूर जमीन देने में भी लोगों को भी परेशानी होगी, इसलिए शहर के आसपास ही जमीन को देखा जा रहा है। जल्द ही इस दिशा में एआरटीओ विभाग को भूमि उपलब्ध कराने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।
- चंद्रेश कुमार यादव, डीएम, ऊधमसिंह नगर