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Udham Singh Nagar News: महंगाई के चलते चैती मेले में दर्जनों दुकानें खाली
Tue, 08 Apr 2025 01:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 08 Apr 2025 01:06 AM IST
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काशीपुर। ऐतिहासिक चैती मेले में लगने वाली दुकानों का प्रत्येक वर्ष किराया बढ़ने से अब दुकानदारों का मेले में दुकान लगाने से मोह भंग होने लगा है। इसके चलते इस वर्ष दर्जनों दुकानें खाली पड़ी हैं। इस वर्ष मेले में दुकान व तहबाजारी का टेंडर दो करोड़ 21 लाख रुपये में हुआ था जो कि बीते वर्ष की अपेक्षा 21 लाख 66 हजार रुपये अधिक है।
चैती मेला वर्ष 2018 से प्रशासन की देखरेख में आयोजित किया जा रहा है। तब मेले में आने वाले दुकानदारों को उम्मीद थी कि मेला का सरकारीकरण होने से दुकानें सस्ती और सुलभ तरीके से मिल जाएंगी, लेकिन दुकानदारों को इसके विपरीत प्रत्येक वर्ष दुकानों का किराया कई गुणा अधिक देकर दुकान लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके चलते दुकानदारों ने अब सामान भी महंगा बेचना शुरू कर दिया है, ऐसे में उनकी दुकानदारी भी प्रभावित होने लगी है।
2024 में चैती मेले में लगने वाली दुकानों व तहबाजारी का ठेका एक करोड़ 99 लाख 33 हजार 352 रुपये में हुआ था। इस वर्ष दुकानों व तहबाजारी का टेंडर 2 करोड़ 21 लाख रुपये का हुआ है। दुकानदारों की मानें तो मेले का सरकारीकरण होने से पहले छोटी दुकान तीन हजार और बड़ी दुकान दस हजार रुपये तक में मिल जाती थी। तब मेले में सैकड़ों दुकान लगती थीं। जो अब 35-40 हजार से तीन से चार लाख रुपये तक में मिल रही हैं जिसके चलते दूर-दराज से आने वाले दुकानदारों ने बीते कुछ वर्षों से आना बंद कर दिया है।
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चैती मेला वर्ष 2018 से प्रशासन की देखरेख में आयोजित किया जा रहा है। तब मेले में आने वाले दुकानदारों को उम्मीद थी कि मेला का सरकारीकरण होने से दुकानें सस्ती और सुलभ तरीके से मिल जाएंगी, लेकिन दुकानदारों को इसके विपरीत प्रत्येक वर्ष दुकानों का किराया कई गुणा अधिक देकर दुकान लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके चलते दुकानदारों ने अब सामान भी महंगा बेचना शुरू कर दिया है, ऐसे में उनकी दुकानदारी भी प्रभावित होने लगी है।
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2024 में चैती मेले में लगने वाली दुकानों व तहबाजारी का ठेका एक करोड़ 99 लाख 33 हजार 352 रुपये में हुआ था। इस वर्ष दुकानों व तहबाजारी का टेंडर 2 करोड़ 21 लाख रुपये का हुआ है। दुकानदारों की मानें तो मेले का सरकारीकरण होने से पहले छोटी दुकान तीन हजार और बड़ी दुकान दस हजार रुपये तक में मिल जाती थी। तब मेले में सैकड़ों दुकान लगती थीं। जो अब 35-40 हजार से तीन से चार लाख रुपये तक में मिल रही हैं जिसके चलते दूर-दराज से आने वाले दुकानदारों ने बीते कुछ वर्षों से आना बंद कर दिया है।
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