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Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में हिंसा और तख्तापलट से तराई में बढ़ी बेचैनी, केंद्र सरकार से लगाई मदद की गुहार

Wed, 07 Aug 2024 12:44 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 07 Aug 2024 12:44 PM IST
सार

बांग्लादेश में हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल ने तराई के लोगों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) से विस्थापित होकर भारत में बसाए गए लोग वहां रह रहे रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

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Displaced people appealed to central government for safety of their relatives After the Bangladesh violence
बांग्लादेश में हिंसा और तख्तापलट से तराई में बढ़ी बेचैनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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बांग्लादेश में हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल ने तराई के लोगों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) से विस्थापित होकर भारत में बसाए गए लोग वहां रह रहे रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। शक्तिफार्म, रुद्रपुर और दिनेशपुर में बसाए गए लोगों ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की हैं।

दवा फैक्टरी में लगाई आग में बाल-बाल बचे शांति के बहनोई
ग्राम देवनगर निवासी शांति भंडार ने बताया कि उनके बहनोई नारायण मंडल ढाका की एक दवा फैक्टरी में कार्यरत है। दो दिन पहले उपद्रवियों ने उनकी फैक्टरी में आग लगा दी। इसमें वह और अन्य कर्मी बाल-बाल बचे। उनकी बहन माधवी मंडल को पांच दिन पहले ऑफिस आने से मना कर दिया गया। खुलना जिले के झालमोली गांव निवासी विधान भंडार ने बताया कि वर्तमान परिस्थिति वहां रहने लायक नहीं है।

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दूर-दराज के इलाकों में संघर्ष का असर नहीं
शिव मंदिर वार्ड निवासी अजीत कुमार ने बताया कि बांग्लादेश के जनपद जशोर स्थित गांव मंचपाडा में उनके चाचा रहते हैं। ढाका से दूर दराज क्षेत्र होने के करण उनके गांव में संघर्ष का ज्यादा असर नहीं दिखा है। शिक्षक विजन राय ने बताया कि खुलना जनपद के गांव बगेरहाट में उनका भाई प्रशांत राय रहता है। बताया कि उनके गांव में भी संघर्ष का असर नहीं दिख रहा है जबकि टीवी में संघर्ष की खबर से वह आशंकित है।

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