{"_id":"664fc5f7c5d631944303ea44","slug":"dhamma-followers-took-out-a-yatra-and-gave-a-message-of-peace-kashipur-news-c-235-1-ksp1004-112051-2024-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: धम्म अनुयायियों ने यात्रा निकालकर दिया शांति संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: धम्म अनुयायियों ने यात्रा निकालकर दिया शांति संदेश
Fri, 24 May 2024 04:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 24 May 2024 04:10 AM IST
विज्ञापन
काशीपुर में धम्म संदेश यात्रा में शामिल बौद्ध धर्म अनुयायी।
काशीपुर। डॉ. आंबेडकर पार्क जन कल्याण सेवा समिति भोगपुर की ओर से बुद्ध पूर्णिमा पर धम्म शांति संदेश पद यात्रा का आयोजन किया गया। बृहस्पतिवार को बौद्ध भिक्षु महेंद्रपाल भंते ने त्रीशरण पंचशील का संकल्प दिलवाकर द्रोण सागर से धम्म शांति संदेश पद यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान धम्म उपासक एवं उपासिकाएं सफेद कपड़ों में कतारबद्ध होकर हाथ में पंचशील का ध्वज लिए हुए बुद्धं शरणं गच्छामि का उच्चारण करते हुए चल रहे थे। बुद्ध की विशाल झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
यात्रा बाजपुर रोड, एमपी चौक, चीमा चौराहा समेत विभिन्न मार्ग से होते हुए महेशपुरा स्थित महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला पहुंचकर संपन्न हुई। यहां गोष्ठी में आजाद बौद्ध ने कहा कि काशीपुर स्थित गोविषाण टीला प्राचीन कालीन बौद्ध विरासत है। उन्होंने बताया गोविषाण स्थल पर भिक्षु द्रोण ने बुद्ध के बाल, नाखून और भिक्षा पात्र रखकर एक स्तूप और दो संघाराम का निर्माण करवाया था। संघाराम में सैकड़ों बौद्ध भिक्षुगण निवास करते थे। यह तथागत के अनुयायियों का आस्था का केंद्र है। बाद में सम्राट अशोक ने भी यहां कई स्तूपों का निर्माण करवाया था। पूर्व नायब तहसीलदार राम सिंह ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने बौद्ध विरासत पर गोविषाण टीले एवं उसके आसपास की भूमि पर अन्य विशेष के प्रतीकों की स्थापना कर दी है जिसे हटवाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। वहां पर समिति अध्यक्ष चंद्रहास गौतम, राज बहादुर गौतम, कपिल बौद्ध, इंद्रजीत आंबेडकर, आनंद बौद्ध, आरपी रवि, भोपाल सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, अशोक प्रधान, मोहनी बौद्ध, बीना बौद्ध, सुमन गौतम, जितेंद्र देवांतक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
यात्रा बाजपुर रोड, एमपी चौक, चीमा चौराहा समेत विभिन्न मार्ग से होते हुए महेशपुरा स्थित महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला पहुंचकर संपन्न हुई। यहां गोष्ठी में आजाद बौद्ध ने कहा कि काशीपुर स्थित गोविषाण टीला प्राचीन कालीन बौद्ध विरासत है। उन्होंने बताया गोविषाण स्थल पर भिक्षु द्रोण ने बुद्ध के बाल, नाखून और भिक्षा पात्र रखकर एक स्तूप और दो संघाराम का निर्माण करवाया था। संघाराम में सैकड़ों बौद्ध भिक्षुगण निवास करते थे। यह तथागत के अनुयायियों का आस्था का केंद्र है। बाद में सम्राट अशोक ने भी यहां कई स्तूपों का निर्माण करवाया था। पूर्व नायब तहसीलदार राम सिंह ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने बौद्ध विरासत पर गोविषाण टीले एवं उसके आसपास की भूमि पर अन्य विशेष के प्रतीकों की स्थापना कर दी है जिसे हटवाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। वहां पर समिति अध्यक्ष चंद्रहास गौतम, राज बहादुर गौतम, कपिल बौद्ध, इंद्रजीत आंबेडकर, आनंद बौद्ध, आरपी रवि, भोपाल सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, अशोक प्रधान, मोहनी बौद्ध, बीना बौद्ध, सुमन गौतम, जितेंद्र देवांतक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन