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देवभूमि के औषधीय पौधों से बहुरेंगे विदर्भ के दिन

Wed, 29 Jun 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Wed, 29 Jun 2016 11:56 PM IST
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Dev Bhoomi Bhurenge medicinal plants in Vidarbha days
औषधीय पौधों - फोटो : अमर उजाला

सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के विदर्भ में किसानों के दिन बहुरेंगे। पंतनगर के वैज्ञानिकों ने ऐसे औषधीय पौधों की खोज की है जो सूखी और बंजर जमीन पर भी न सिर्फ लहलहाएंगे बल्कि किसानों को अच्छा मुनाफा देकर उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत करेंगे।

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महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र पिछले लंबे समय से सूखे की चपेट में हैं। यहां के किसानों की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। विदर्भ के गंभीर हालातों को लेकर चिंतित केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूखे की समस्या का हल निकालने के लिए पंतनगर के वैज्ञानिकों को शोध करने का जिम्मा सौंपा था। 
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औषधीय पौधों पर शोध करने वाली पंतनगर की संस्था केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौध संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिकों ने इस जिम्मेदारी को चुनौती के रूप में लिया और कई महीनों तक शोध करके सूखी जमीन पर उगने वाली औषधीय पौध तैयार करने में सफलता हासिल की है। 
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वैज्ञानिकों ने जो पौध तैयार की है वह सूखी और बंजर जमीन पर आसानी से उगायी जा सकती है। इसकी लागत भी न्यूनतम है। वैज्ञानिकों ने जो औषधीय पौधे तैयार किए हैं उसमें नीबू घास, खस घास और रोशा घास शामिल है। इन पौधों का उपयोग आयुर्वेदिक औषधि बनाने के साथ-साथ एलोपैथिक दवाएं बनाने में भी होगा। 

दरअसल इन पौधों से प्राप्त होने वाले तेल की कीमत बाजार में बहुत अधिक है। खस घास से एक हेक्टेयर में 25 लीटर तेल प्राप्त किया जा सकता है, जिसकी कीमत बाजार में 20 हजार रुपये प्रति लीटर है। वहीं रोशा घास से एक हेक्टेयर में 150 लीटर तेल प्राप्त होता है, इस तेल की कीमत बाजार में 1500 से 2000 रुपये प्रति लीटर है।

वहीं नीबू घास से एक हेक्टेयर में 200 लीटर तेल प्राप्त होता है, इसकी कीमत बाजार में एक हजार रुपये प्रति लीटर है। यानी इन फसलों से सूखे की मार झेल रहे किसानों को अच्छी खासी आय  प्राप्त हो सकती है। खास बात यह है कि इन फसलों की उत्पादन लागत न्यूनतम है। 


सीमैप द्वारा की गयी यह खोज सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। इस नई खोज से विदर्भ के किसानों में उम्मीद की किरण जगी है। इसका प्रयोग शुरूआत में सूखाग्रस्त विदर्भ क्षेत्र के जिलों में ही किया जा रहा है। जहां इसके सार्थक परिणाम सामने आने की उम्मीद की जा रही है। 

बाद में इसका प्रयोग अन्य सूखाग्रस्त और बंजर भूमि पर करने की योजना है। फिलहाल सूखाग्रस्त विदर्भ को संकट से उबारने के लिए जुलाई के पहले सप्ताह में नीबू घास और खस घास के 26 लाख पौधे और रोजा घास का 155 किलो बीज महाराष्ट्र के विदर्भ भेजने की सीमैप ने पूरी तैयारी कर ली है।


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के आग्रह पर महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के लिए तीन प्रकार के औषधीय पौधों को तैयार किया गया है। यह वहां के किसानों की आय के लिए एक मजबूत आधार होगा। नींबू और खस घास के साथ रोजा घास की फसल वहां के मौसम के अनुकूल मानी गई है। जुलाई में 26 लाख पौधे नींबू और खस के भेजे जा रहे हैं जबकि 155 किलो रोशा घास का बीज महाराष्ट्र के विदर्भ में भेजने की तैयारी की गई है। 

 - डा. वीआर सिंह, पंत विवि के सीमैप के प्रमुख वैज्ञानिक

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