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शहीद इमाम हुसैन की याद में निकाले ताजिया
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खटीमा में ताजिये निकालते लोग।
- फोटो : KHATIMA
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पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में यौम ए आशूरा के मौके पर ऑनलाइन मुशायरा और जिक्रे शोहदा ए कर्बला का आयोजन किया गया। इसमें कर्बला के शहीदों की शान में कलाम पेश किए गए।
इमाम हुसैन की याद में शनिवार रात ऑनलाइन तरही मनकबती मुशायरा हुआ। मुशायरे की सदारत मौलाना इरफानुल हक कादरी ने की। संचालन शहजादा अब्सार सिद्दीकी ने किया। सरपरासती मेहंदी हसन ने की। कनवीनर डॉ. सिराज अहमद थे। रविवार को नूरी मस्जिद में ऑनलाइन जिक्रे शोहदा ए कर्बला का आयोजन किया गया।
मो. अज्जम मलिक सुब्हानी ने अपनी शानदार आवाज में हजरत इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश करते हुए कहा कि ‘टूटे हुए दिलों का सहारा हुसैन हैं, डूबे न जो फलक पे वो तारा हुसैन हैं, यह भी तुम्हें ख्याल न आया यजीदियो, सरकारे दो जहां का नवासा हुसैन हैं।’ आखिर में मौलाना मोहम्मद इरफानुल हक कादरी ने विस्तार से हजरत इमाम हुसैन और उनके दूसरे साथियों की शहादत पर रोशनी डाली और कहा कि करबला की जंग सही और गलत के बीच थी। सच्चा हुसैनी वही है जो उनके बताए हुए मार्ग पर चले।
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शहीद इमाम हुसैन की याद में निकाले ताजिए
खटीमा। शहीद इमाम हुसैन की याद में ताजिए निकाले गए। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नौसर, पचपेड़ा, कंचन पुरी जमौर आदि स्थानों से निकाले गए ताजिए भैंसहा जमौर स्थित करबला में दफनाए गए। इधर, खटीमा, इस्लामनगर, गोटिया से भी छोटे-छोटे ताजिए लोहियापुल स्थित करबला में दफनाए गए।
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इमाम हुसैन की याद में शनिवार रात ऑनलाइन तरही मनकबती मुशायरा हुआ। मुशायरे की सदारत मौलाना इरफानुल हक कादरी ने की। संचालन शहजादा अब्सार सिद्दीकी ने किया। सरपरासती मेहंदी हसन ने की। कनवीनर डॉ. सिराज अहमद थे। रविवार को नूरी मस्जिद में ऑनलाइन जिक्रे शोहदा ए कर्बला का आयोजन किया गया।
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मो. अज्जम मलिक सुब्हानी ने अपनी शानदार आवाज में हजरत इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश करते हुए कहा कि ‘टूटे हुए दिलों का सहारा हुसैन हैं, डूबे न जो फलक पे वो तारा हुसैन हैं, यह भी तुम्हें ख्याल न आया यजीदियो, सरकारे दो जहां का नवासा हुसैन हैं।’ आखिर में मौलाना मोहम्मद इरफानुल हक कादरी ने विस्तार से हजरत इमाम हुसैन और उनके दूसरे साथियों की शहादत पर रोशनी डाली और कहा कि करबला की जंग सही और गलत के बीच थी। सच्चा हुसैनी वही है जो उनके बताए हुए मार्ग पर चले।
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शहीद इमाम हुसैन की याद में निकाले ताजिए
खटीमा। शहीद इमाम हुसैन की याद में ताजिए निकाले गए। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नौसर, पचपेड़ा, कंचन पुरी जमौर आदि स्थानों से निकाले गए ताजिए भैंसहा जमौर स्थित करबला में दफनाए गए। इधर, खटीमा, इस्लामनगर, गोटिया से भी छोटे-छोटे ताजिए लोहियापुल स्थित करबला में दफनाए गए।