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चूड़ामल प्रकरण के मुकदमा वापसी का शासनादेश हुआ जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:54 PM IST
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चूड़ामल केस
- फोटो : Amar Ujala
बीज प्रमाणीकरण संस्था के अध्यक्ष तिलकराज बेहड़ के प्रयासों से शासन ने चूड़ामल प्रकरण में हुए बवाल के 90 आरोपियों के खिलाफ हुए मुकदमे के वापसी का शासनादेश जारी कर दिया है। जिसके नामजद रंपुरावासियों ने राहत की सांस लेते हुए बेहड़ का आभार जताया।
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चूड़ामल प्रकरण में पत्रकारों से वार्ता करते हुए संस्थाध्यक्ष बेहड़ ने कहा कि वर्ष 2006 में रम्पुरा निवासी चूड़ामल की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी, जिस पर रम्पुरा के लोगों ने रंपुरा चौकी का घेराव किया था। जिसके चलते पुलिस ने रंपुरा के लोगों पर लाठीचार्ज किया और 35 लोगों को नामजद कर मुकदमा दर्ज कर लिया था। चूंकि उस वक्त की तत्कालीन कांग्रेस की सरकार थी, तो सरकार ने मामले की सीबीसीआईडी जांच के आदेश जारी किए थे।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में जैसे ही भाजपा की सरकार आई, तो सरकार ने 35 लोगों से बढ़ाकर 90 लोगों पर मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित कर दी थी। बताया कि नामजद सभी आरोपी गरीब परिवार और निर्दोष होने के कारण मामला उनकी ओर से वर्तमान की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत के समक्ष रखी गई थी।
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जिस पर सीएम के आदेश पर डीएम व एसएसपी से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट के बाद गृह विभाग ने न्याय विभाग की सहमति को भेजा था। उन्होंने कहा कि सीएम रावत ने गरीबों के प्रति उदारता बरतते हुए सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापसी का शासनादेश जारी कर दिया। इस मौके पर सुशील गाबा, प्रदेष संगठन सचिव कोमिल राम कोली, जगदीश तनेजा , नत्थू लाल कोली, चन्द्रसेन कोली, प्रेमवती कोली, राजकुमार कोली, रामवतार कोली, विरमा कोली, केदार कोली, धनष्याम कोली, कल्लू राम कोली, गब्बर कोली, प्रांजल गाबा, सियाराम कोली, बनारसी दास, प्रेम कोली सहित कई लोग मौजूद थे।