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हालात : ईएनटी सर्जन तो है लेकिन ओटी की व्यवस्था नहीं
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डॉ.प्रियांक चौहान, ईएनटी सर्जन, उप जिला चिकित्सालय काशीपुर। संवाद
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय में नाक-कान-गला संबंधित बीमारियों के लिए मुख्यालय ने ईएनटी सर्जन तो उपलब्ध करा दिया लेकिन सर्जरी से संबंधित कई उपकरण आज तक उपलब्ध नहीं कराए। साथ ही कई महत्वपूर्ण दवाई भी मुख्यालय से नहीं मिलने पर डॉक्टर को बाहर से दवा लिखनी पड़ रही है।
सरकारी अस्पताल में ईएनटी सर्जन की तैनाती तो हो गई लेकिन गंभीर केस में ऑपरेशन के लिए ओटी की व्यवस्था नहीं है। साथ ही कई जरूरी दवाई की आज तक मुख्यालय से सप्लाई नहीं की गई। इसके चलते रोगियों को कई बार ईएनटी से संबंधित दवाई बाहर से खरीदनी पड़ती है।
अस्पताल में तैनात ईएनटी सर्जन डॉ. प्रियांक चौहान ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 40-50 मरीजों की ओपीडी होती हैं। बताया कि ईएनटी से संबंधित छोटे ऑपरेशन तो कर लिए जाते हैं। बड़े ऑपरेशन के लिए ओटी और बड़े उपकरणों का अभाव है। इसके लिए मुख्यालय को लिखने के साथ ही स्थानीय नैनी ग्रुप से भी सहयोग मांगा है। उम्मीद है एक-दो महीने में ईएनटी संबंधित उपकरण और ओटी की व्यवस्था हो जाएगी।
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डॉ. चौहान ने बताया कि नाक-कान के माइनर आपरेशन तो कर देते हैं लेकिन गले से संबंधित आपरेशन और जांच के लिए एंडोस्कोपी उपलब्ध नहीं है। इसके लिए नैनी ग्रुप से सहयोग मांगा गया है। प्राइवेट में एंडोस्कोपी कराने पर एक हजार रुपये खर्च आता है, जबकि अस्पताल में यह जांच 260 रुपये में हो जाएगी।
कोट
ईएनटी से संबंधित कई दवाई ऐसी हैं जो मुख्यालय से नहीं आ पाती हैं। अस्पताल को एक बार में पच्चीस हजार की दवा बाहर से खरीदने की अनुमति है। ईएनटी संबंधित जो ड्राप या दवा उपलब्ध होती है वह देते हैं जो नहीं होती हैं वह जन औषधि केंद्र से लिखते हैं।
- डॉ. कैमाश राणा, सीएमएस, एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय, काशीपुर।
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सरकारी अस्पताल में ईएनटी सर्जन की तैनाती तो हो गई लेकिन गंभीर केस में ऑपरेशन के लिए ओटी की व्यवस्था नहीं है। साथ ही कई जरूरी दवाई की आज तक मुख्यालय से सप्लाई नहीं की गई। इसके चलते रोगियों को कई बार ईएनटी से संबंधित दवाई बाहर से खरीदनी पड़ती है।
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अस्पताल में तैनात ईएनटी सर्जन डॉ. प्रियांक चौहान ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 40-50 मरीजों की ओपीडी होती हैं। बताया कि ईएनटी से संबंधित छोटे ऑपरेशन तो कर लिए जाते हैं। बड़े ऑपरेशन के लिए ओटी और बड़े उपकरणों का अभाव है। इसके लिए मुख्यालय को लिखने के साथ ही स्थानीय नैनी ग्रुप से भी सहयोग मांगा है। उम्मीद है एक-दो महीने में ईएनटी संबंधित उपकरण और ओटी की व्यवस्था हो जाएगी।
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डॉ. चौहान ने बताया कि नाक-कान के माइनर आपरेशन तो कर देते हैं लेकिन गले से संबंधित आपरेशन और जांच के लिए एंडोस्कोपी उपलब्ध नहीं है। इसके लिए नैनी ग्रुप से सहयोग मांगा गया है। प्राइवेट में एंडोस्कोपी कराने पर एक हजार रुपये खर्च आता है, जबकि अस्पताल में यह जांच 260 रुपये में हो जाएगी।
कोट
ईएनटी से संबंधित कई दवाई ऐसी हैं जो मुख्यालय से नहीं आ पाती हैं। अस्पताल को एक बार में पच्चीस हजार की दवा बाहर से खरीदने की अनुमति है। ईएनटी संबंधित जो ड्राप या दवा उपलब्ध होती है वह देते हैं जो नहीं होती हैं वह जन औषधि केंद्र से लिखते हैं।
- डॉ. कैमाश राणा, सीएमएस, एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय, काशीपुर।

डॉ. कैमाश राणा, सीएमएस, एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय। संवाद- फोटो : KASHIPUR