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सिरसा मार्ग की कांट-छांट से सिडकुल कामगारों में मायूसी
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Tue, 12 Jul 2016 12:33 AM IST
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सिरसा मार्ग
- फोटो : अमर उजाला
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आर्थिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण सिरसा मार्ग की लंबाई में कटौती होने से इसकी पहुंच सिडकुल तक ना होकर टैगोर नगर गांव तक रह गई है। साथ ही सूखी नदी मेें काजवे ना बनने से सिडकुल के उद्योगों में रोजाना जाने वाले हजारों कामगारों की उम्मीदों पर कुठाराघात होता दिख रहा है। कामगारों को सिडकुल तक दो किमी की दूरी 22 किमी तय करनी पड़ेगी।
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शक्तिफार्म को किच्छा सहित अन्य शहरों से जोड़ने के लिए 60 की दशक में निर्मित वन-वे सिरसा मार्ग की चौड़ीकरण की मांग 80 के दशक से उठने लगी थी। सितारगंज सिडकुल में दर्जनों उद्योगों की स्थापना के बाद इस सड़क के चौड़ीकरण के साथ ही इसके उद्योगों तक पहुंच की मांग ने जोर पकड़ा।
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कारण सीधी सड़क के अभाव में यहां के हजारों कामगारों को रोजाना 2 किमी की दूरी के लिए 22 किमी का सफर तय करना पड़ता है। वर्ष 2007 में इस मार्ग में बस दुर्घटना में एक विवाहिता की मौत के बाद सड़क निर्माण की मांग ने आंदोलन का रूप लिया। जिसके तहत दर्जनों बार धरना प्रदर्शन किया गया।
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सत्ता में रहे नुमाइंदों ने भी चुनाव के दौरान इस महत्वाकांक्षी सड़क को बनाने का आश्वासन देकर लोगों को रिझाया। तो विरोधियों ने इसे सत्ता पक्ष की विफलता के रूप में पेश किया। पूर्व विधायक नारायण पाल ने भी अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान इस सड़क को बनवाने की खूब चेष्टा की।
2012 के चुनाव में विधायक बने किरण मंडल के इस्तीफे के बाद यहां से उपचुनाव लड़ रहे तत्कालीन मुख्य मंत्री विजय बहुगुणा के मुख्य चुनावी वायदे में इस सड़क के साथ ही सूखी नदी में काजवे का निर्माण शामिल होने से लोगों को दशकों पुरानी मांग पूरी होती दिखी।
2013 में जारी डीपीआर में 7 मीटर चौड़ी व 22 किमी लंबी इस सड़क के सिडकुल तक पहुंच से लोगों के सपनों को मानो पंख लग गए। अक्टूबर 2014 से इसका निर्माण कार्य आरंभ होने पर इसके तय समय सीमा अप्रैल 2017 तक यातायात आरंभ होने के कयास लगाए जाने लगे।
निर्माण कार्य आरंभ हुए 21 माह बीतने के बाद इस सड़क को वित्तीय व तकनीकी स्वीकृति देने वाली एडीबी ने सड़क की लंबाई 3 किमी व चौड़ाई डेढ़ मीटर कम किए जाने के साथ ही काजवे समाप्त करने की जानकारी देकर यहां के लोगों की उम्मीदों को तार तार किया है।
स्वाभाविक तौर पर लोगों में पनपे आक्रोश ने आंदोलन का रूप ले लिया है। व्यापार मंडल ने सड़क की कांट-छांट को नामंजूर करते हुए 15 जुलाई को बाजार बंद का ऐलान किया है। वहीं पूर्व विधायक नारायण पाल ने भी 20 जुलाई से अनशन पर बैठने की चेतावनी देकर एडीबी की धड़कन तेज कर दी है।