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थप्पड़ का बदला लेने के लिए किया था सरिता का कत्ल
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Tue, 01 Nov 2016 01:03 AM IST
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rape
- फोटो : Demo
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नौ दिन पूर्व हुए सरिता हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया। छेड़छाड़ का विरोध करने पर सरिता के थप्पड़ मारने से खार खाए सिडकुल कर्मी ने अपने साथियों के साथ उससे गैंगरेप के बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
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पुलिस ने मुख्य अभियुक्त और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी अभी फरार है। केस के खुलासे के लिए एएसपी सिटी और सीओ के निर्देशन में 16 सदस्यीय पुलिस टीम जुटी थी।
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बता दें ट्रांजिट कैंप निवासी प्रीकॉल कंपनी में ठेकाकर्मी सरिता प्रजापति की बीती 22 अक्टूबर को दिनदहाड़े सिडकुल गोल चौराहे के गैंगरेप के बाद हत्या कर शव सेक्टर-12 के पीछे बहने वाले नाले में फेंक दिया गया था।
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मामले की छानबीन के लिए एसएसपी सेंथिल अबुदई ने एएसपी पंकज भट्ट और सीओ मंजूनाथ टीसी के नेतृत्व में टीम गठित की। घटना के जल्द खुलासे के लिए श्रमिकों और क्षेत्रवासियों ने पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सोमवार को एसएसपी कार्यालय सभागार में डीआईजी (कुमाऊं रेंज) अजय रौतेला ने मामले का खुलासा किया। बताया कि 15 दिन पूर्व सिडकुल स्थित बैराक फैक्ट्री में काम करने वाले कृष्णा कालोनी निवासी वेदप्रकाश उर्फ बाबा ने सरिता के साथ छेड़छाड़ की थी, जिस पर सरिता ने उसे थप्पड़ मार दिया था।
कुछ दिन बाद बाबा ने सरिता से मांफी मांग ली। उसके बाद उनमें बातचीत होने लगी। घटना वाले दिन सरिता ने बाबा को अपने आफिस से पीएफ आफिस जाने और वापस फैक्ट्री में आने की बात बताई।
उसी दिन बाबा भी अपनी फैक्ट्री के सीनियर अफसर तथा गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड को 15 मिनट के लिए फैक्ट्री से बाहर जाने की बात कहकर निकला था। वह करीब ढाई घंटे बाद कंपनी में वापस आया। डीआईजी के अनुसार चूंकि घटना वाले दिन सरिता को पीएफ आफिस से निकलने के बाद 12.34 पर गोल चौराहे स्थित टंकी के पास देखा गया था।
छानबीन करने पर पता चला कि उसी दिन 12.32 पर बाबा का दोस्त ट्रांजिट कैंप निवासी जितेंद्र कुमार उर्फ लंबू और सुनील सिंह अपनी बाइक से पहले टंकी चौक से वीएचबी फैक्ट्री तक आये और सरिता को देखने के बाद वापस टंकी चौक की तरफ मुड़ गए।
संदेह होने पर पुलिस ने तीनों को 31 अक्तूबर को हिरासत में ले लिया। पुलिस पूछताछ में बाबा ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि सरिता द्वारा मारे गये थप्पड़ का बदला लेने के लिए उसने सरिता से दुष्कर्म और उसकी हत्या की योजना बनाई।
योजना को अंजाम देने के लिए 22 अक्तूबर को तीनों वहां पहुंचे। टंकी चौक के पास उन्होंने सरिता को पकड़ लिया। दुष्कर्म के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। पुलिस ने हत्याभियुक्तों के पास से मृतका का मोबाइल, पासबुक, पर्स तथा पीएफ फार्म की छायाप्रति भी बरामद की है।
हत्याभियुक्त ने 300 रुपए में बेचा सरिता को मोबाइल, वही बन गया क्लू
सरिता हत्याकांड के मामले में पुलिस को कई दिनों तक कई जिलों की खाक छानने के बाद भी कोई अहम सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने दोबारा अपनी जांच के दायरे को घटनास्थल के आसपास केंद्रित कर दिया।
पुलिस को एक महिला सिडकुल कर्मी से ही अहम सुराग मिले। पुलिस ने जब मृतका के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया तो मोबाइल सिडकुल की ही किसी कंपनी में काम करने वाली युवती के पास मिला।
युवती को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने के बाद उसने बताया उसने यह मोबाइल को बाबा के दोस्त सुनील से 300 रुपये में खरीदा है। चूंकि सुनील बाबा के साथ ही ट्रांजिट केंप में रहता था, पुलिस ने सुनील को अपने निशाने पर ले लिया जिसके बाद घटना की परत दर परत खुलती चली गई।
मृतका की मां ने भी किया था युवक के थप्पड़ मारने का जिक्र
सरिता हत्याकांड के मामले में घटना वाले दिन सरिता की मां ने घटनास्थल पर पहुंचने के बाद इस बात का जिक्र किया था कि कुछ समय पूर्व से पड़ोस में ही रहने वाला एक युवक अक्सर सरिता के साथ छेड़खानी करता था जिसके चलते सरिता ने सरेराह उसकी पिटाई कर दी थी।
अमर उजाला ने भी अपनी खबर में प्रमुखता से इस बात का जिक्र किया था, लेकिन मृतका की मां द्वारा कही बात पर पुलिस गंभीरता से विचार नहीं कर सकी। आखिरकार पुलिस द्वारा 8 दिन बाद किये गये खुलासे में यही बात कही गई कि एक युवक ने थप्पड़ का बदला लेने के लिए ही सरिता का कत्ल कर दिया।
टीम पर हुई इनामों की बौछार
सरिता हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम के उत्साहवर्धन के लिए डीजीपी एमए ए गणपति ने 20 हजार, डीआईजी अजय रौतेला ने पांच हजार और एसएसपी सेंथिल अबुदई ने ढाई हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।
खुलासा करने वाली टीम के सदस्य
सरिता हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम में प्रशिक्षु सीओ शेखर चंद्र सुयाल, पंतनगर एसओ राजेश यादव, एसओ पुलभट्टा, हरेंद्र चौधरी, एसओ ट्रांजिट केंप सुशील कुमार, एसएसआई प्रकाश दानू, चौकी प्रभारी सिडकुल नरेश पाल, सीआईयू प्रभारी विकास चौधरी, एसआई जसवंत सिंह, हेड कांस्टेबल प्रकाश भगत, कांस्टेबल प्रमोद रौतेला, उमेश पंत, महेंद्र डंगवाल, फिरोज खान, मोहम्मद यामीन, अमित कुमार, उमेश राज, इमदाद हुसैन, बबलू गोस्वामी, पवन सिंह, अब्दुल मालिक और मनमोहन सिंह थे।