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नेपाली माओवाद, चीनी भाषा को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट बनाने में जुटा खुफिया तंत्र
Tue, 02 Jul 2019 12:05 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Tue, 02 Jul 2019 12:05 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
नेपाल सीमा से सटे जिलों में चीनी भाषा का प्रभाव बढ़ने और नेपाली माओवाद को चीन का नैतिक समर्थन प्राप्त होने की आशंका को लेकर खुफिया तंत्र भी ग्राउंड रिपोर्ट बनाने में जुट गया है। शासन द्वारा सीमा पर अलर्ट जारी करने के बाद पुलिस मुख्यालय देहरादून से खुफिया तंत्र को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश मिले हैं।
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कुमाऊं परिक्षेत्र में यूएसनगर, पिथौरागढ़ और चंपावत जिले नेपाल की सीमा से सटे हैं। इनमें टनकपुर, बनबसा, चंपावत, और खटीमा को बेहद संवेदनशील माना गया है। उक्त सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए एसएसबी को तैनात किया गया है लेकिन इंटेलिजेंस सहित अन्य खुफिया एजेंसियों को भी यहां देशी और विदेशी सुरक्षा के लिए सक्रिय किया गया है।
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इधर, खटीमा का मेलाघाट, नानकमत्ता का हंसपुर खत्ता, सूखी ढांग और सितारगंज का कुछ क्षेत्र पूर्व में माओवाद से भी प्रभावित रहा है। नेपाल का वर्तमान माओवादी नेतृत्व हिमाचल प्रदेश और दार्जिलिंग के साथ ही उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों को ग्रेटर नेपाल बताकर उन पर अपना अधिकार होने की बात कहता है।
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चीन के साथ भी वर्तमान में भारत की रजनीतिक दूरियां बढ़ने से चीन नेपाल को अपना समर्थन दे रहा है। इसके चलते नेपाल सीमा पर चीनी भाषा और नेपाली माओवाद का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मामले में शासन की ओर से अलर्ट जारी करने के बाद पुलिस मुख्यालय देहरादून ने भी सीमा पर मौजूद खुफिया एजेंसियों को इस संबंध में ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए खुफिया एजेंसियां कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है।