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बैंक, एनएच निर्माण कंपनी के अफसरों की भी मिलीभगत

Wed, 22 Mar 2017 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर Updated Wed, 22 Mar 2017 12:54 AM IST
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Compliance with officials of Bank, NH Construction Company
घोटाला - फोटो : अमर उजाला

नेशनल हाइवे भूमि अधिग्रहण घोटाले में बैंक और सड़क निर्माण की कार्यदायी कंपनी के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। बैंक की मिलीभगत से कंपनी का एक अधिकारी खाताधारक की गैरहाजिरी में भी खाते से पैसे निकाल लेता था। यहां तक कि किसान से सेल्फ वाले चेक भी ले लिए जाते थे और खाते में पैसा आने के बाद अपने हिस्से की रकम लेने के बाद चेक उन्हें वापस कर देते थे। ये मामले प्रकाश में आए तो हेराफेरी करने वाला अफसर कंपनी छोड़कर चला गया। घोटाले में शामिल अधिकारियों की कॉल डिटेल, बैंकों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जाए तो एसएलओ से मिलकर करोड़ों कमाने के चक्कर में हेराफेरी करने वाले अधिकारी सामने आ जाएंगे। सितारगंज से काशीपुर तक फोरलेन सड़क, सितारगंज से टनकपुर तक टू-लेन सड़क निर्माण के लिए 2011 में गजट नोटिफिकेशन हुआ। 

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इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा सड़क निर्माण की जद में आने वाली भूमि के अधिग्रहण के एवज में भू-स्वामियों को सर्किल रेट के दोगुना, चार गुना दाम पर मुआवजा दिया जाना था। इसके लिए जिला मुख्यालय पर भूमि अध्यापित अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद सितारगंज से खटीमा तक भूमि अधिग्रहण के नाम पर कृषि भूमि को अकृषि भूमि करने का खेल शुरू हो गया। एसएलओ, कंपनी के एक अधिकारी, बैंकों के अफसरों ने सांठगांठ कर भूमि अधिग्रहण के नाम पर मुआवजे में घोटाला शुरू कर दिया। कई बार ऐसा हुआ कि जिस किसान पर पैसे न मिलने का भरोसा होता था तो उस किसान को अधिकारी उसके बैंक खाते से कुछ रकम जमा करते थे। कई ऐसे केसों में अधिकारी बैंकों में बैठकर ही लेनदेन करते थे। कंपनी के अधिकारी द्वारा एसएलओ तक रकम पहुंचाने का काम भी किया जाता था। कंपनी को इसका पता चला तो यह अधिकारी कंपनी छोड़कर चला गया लेकिन, वह अभी भी यहां से नहीं गया। सितारगंज, रुद्रपुर में रहता है। इस मामले की भी जांच होनी चाहिए।
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भूस्वामी की बिना जानकारी के बैंक की मिलीभगत से निकाले थे 53.11 लाख रुपये
भूमि अधिग्रहण मुआवजे के मामले में पांच माह पूर्व बैंक की मिलीभगत से किसान के खाते से 53.11 लाख रुपये हड़प लिए गए थे। मामला खुलने पर भूस्वामी ने बैंक, एसडीएम कार्यालय में शिकायत की थी और कोतवाली में तहरीर भी दी थी। यह मामला सुर्खियां भी बना था लेकिन, इस मामले को दबा दिया गया। 19 नवंबर को बघौरा गांव के जनजाति के किसान कुंवर सिंह राणा ने कोतवाली में तहरीर दी थी। इसमें उसने कहा था कि चीकाघाट गांव में उसके खेत नंबर पांच रकबा 0.02000 वर्ग मीटर, खेत नंबर सात रकबा 0.0019 वर्ग मीटर जमीन एनएच 125 के चौड़ीकरण की जद में आई थी। इसके एवज में भूमि अधिग्रहण विभाग द्वारा 53 लाख 11 हजार 845 रुपये मुआवजा दिया जाना था लेकिन, चीनीमिल के एक कर्मचारी ने बैंक अधिकारी, भूमि अध्याप्ति अधिकारी रुद्रपुर से सांठगांठ कर उसके नाम से शामिल खाता खुलवाया जबकि, भूस्वामी न तो खाते के लिए आवेदन किया था और न ही कहीं पर हस्ताक्षर किए थे। तीन मार्च को एनएचएआई द्वारा उस खाते में मुआवजे की रकम भेजी गई। इसे बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से उसी दिन पांच किस्तों में खाते से निकालकर चीनीमिल के कर्मचारी ने हड़प कर लिया था। किसान के तहरीर देने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। ब्यूरो
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दो एसडीएम समेत कई कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज
 एनएच भूमि अधिग्रहण घोटाले के मामले में दो एसडीएम, तहसीलदार समेत कई पटवारियों पर भी गाज गिर सकती है। 2012 में कार्यरत एसडीएम के हस्ताक्षर से जारी आदेश के साथ अकृषि भूमि की पत्रावलियां उसी साल के मिशलबंद अभिलेख में 2016 में दर्ज की गई हैं। इससे 2012, 2016 में कार्यरत एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी आदि कई कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। प्रशासन अगर, भूमि अधिग्रहण के नाम पर बैकडेट में भूमि अकृषि किए जाने के मामलों की जांच करता है तो 2014-15 में भी बैकडेट के कई मामले सामने आ सकते हैं।

प्रशासन की रिपोर्ट में राजस्व अहलमद संतराम के बयानों से ये तो साफ हो गया कि भूमि अधिग्रहण का करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा हुआ। इसके लिए कृषि भूमि को अकृषि बनाने के लिए मिशलबंद में अमल दरामद की गई। पटवारियों के भी नाम प्रकाश में आ गए लेकिन, 2011-12 की खुर्दबुर्द मिशलबंद में और अप्रैल 2016 में किस एसडीएम के कार्यकाल के दौरान यह घोटाला हुआ। इसका प्रशासन ने खुलासा नहीं किया लेकिन, तहरीर में दिए गए वर्ष के अनुसार 2011-12 में तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया यहां कार्यरत थे। मिशलबंद में दर्ज अकृषि के आदेश पर उनके हस्ताक्षर दिखाए गए। अप्रैल 2016 में अनिल कुमार शुक्ला तैनात थे। इनके कार्यकाल में उनके अधीनस्थों ने करोड़ों के घोटाले का खेल खेला।


कुमाऊं कमिश्नर ने भी अपनी जांच के निष्कर्ष के बाद यह माना है कि बाजपुर, काशीपुर, जसपुर की तहसीलों के साथ ही सितारगंज तहसील क्षेत्र में भी बड़ा घोटाला हुआ है। इसमें एसएलओ के साथ एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी आदि कई कर्मचारियों की मिलीभगत थी। इससे 2012, 2016 में कार्यरत एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। यहां तक तो मिशलबंद की छेड़छाड़ से सामने आने पर यह अधिकारी जांच के घेरे में आ गए लेकिन, भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लेनदेन का मामला 2014 में भी हुआ था। उस दौरान भी क्षेत्र में तमाम जमीनों को अकृषि दर्ज किया गया था। इनकी जांच की गई तो 2014 के एसडीएम का फर्जीवाड़ा भी सामने आएगा।

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