फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Chit fund managers make mortgages

चिट फंड कंपनी के प्रबंधकों को बंधक बनाया

Sun, 09 Apr 2017 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर Updated Sun, 09 Apr 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
Chit fund managers make mortgages
‌च‌िट फंड - फोटो : अमर उजाला

चिट फंड कंपनी के गोल्ड प्रलोभन में फंसकर क्षेत्र के हजारों लोगों ने कपनी में करोड़ रुपये फंसा दिया। कंपनी के प्रबंधक ऑफिस में ताला डालकर गायब हो गए। शनिवार की रात प्रबंधक के आने और कार्यालय में रखा गोल्ड लेकर भागने की भनक लगते ही कई लोगों ने प्रबंधक को बंधक बना दिया। कंपनी के एमडी, डायरेक्टरों को बुलाने को कहा। जब कंपनी के डायरेक्टर, प्रबंधक पहुंचे तो लोगों ने उन्हें घेर कर कोतवाली ले आए और पुलिस के हवाले कर दिया। इस दौरान लोगों ने कोतवाली परिसर मे कंपनी मालिकों के खिलाफ जमकर हंगामा किया।

विज्ञापन


स्टेशन रोड पर एक चिट फंड कंपनी का कार्यालय है इस कंपनी की कार्यप्रणाली ही संदिग्ध है। बताया जाता है कि कंपनी द्वारा लोगों को पांच हजार रुपये जमा करने के बाद 33 महीने में 21 हजार पांच सौ रुपये लौटाने का वायदा किया जाता है। लोगों ने अधिक मुनाफे के लालच में पड़ कर कई खाते खोले और बड़ी रकम निवेश कर दी। जो लोगों को बचत करने और भारी मुनाफा मिलने के नाम पर निवेशक लाते हैं, उनको एजेंट कहा जाता है। कंपनी उनको प्रति केस कमीशन देती है। एक प्रकार से यह चेन सिस्टम है। कंपनी की पोल तब खुलनी शुरू हुई जब लोगों के 33 माह पूरे होने लगे और रुपया वापस नहीं मिला। पहले तो एजेंटों को भुगतान हुआ। बाद में वह भी बंद हो गया। 
विज्ञापन


इधर कंपनी के अधिकारी गायब हो गए आठ-नौ लड़कियां ऑफिस में रखी थी, उनको भी वेतन नहीं मिला। मूल निवेशकों को भुगतान न होने पर एजेंटों का कमीशन बंद होने से नए निवेशक भी नहीं आए तो कंपनी का कारोबार ठप होने लगा। बताया जाता है कि निवेशकों ने भुगतान के लिए एजेंटों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। तभी एजेंटों ने कंपनी के अधिकारियों पर दबाव बनाने लगे। नतीजा यह हुआ कि निवेशकों, एजेंटों ने कंपनी के चार निदेशकों और एक एमडी को कोतवाली में बैठा दिया। दोनों पक्षों में दिनभर समझौता वार्ता चली, लेकिन समाधान नहीं निकला। एजेंट चाहते हैं कि उनका पूरा भुगतान का चेक या सोना दिया जाए लेकिन प्रबंधक इसके लिए तैयार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


घर में रहना किया मुश्किल
एजेंटों ने बताया कि कंपनी के काशीपुर, नजीबाबाद, अकबरपुर, फैजाबाद, मेरठ शामली, कुरुक्षेत्र में भी लोगों को सब्जबाग दिखाने का कारोबार है। इन सभी स्थानों पर करीब 25 हजार से अधिक निवेशक हैं और काशीपुर क्षेत्र की करीब ढाई करोड़ की देनदारी है। एक एजेंट की पत्नी पुलिस के सामने फूट-फूट कर रो पड़ी। उसने कहा कि उन्होंने जिनका रुपये निवेश कराया। अब भुगतान को लेकर उन लोगों ने उनका घर में रहना मुश्किल कर दिया है।

प्रबंधकों और एजेंटों में फैसला
पुलिस के सामने प्रबंधकों, एजेंटों में फैसला हो गया। फैसले के अनुसार जिस निवेशक के खाते में जितना रुपया जमा हो चुका है, उसे घटाकर भुगतान कल तक किया जाएगा। भुगतान के रूप में चेक भी दिए जाएगा। 


एमडी कंपनी का मालिक नहीं है
एजेंटों ने बताया जो कंपनी का मालिक कोई सफेदपोश बड़ा आदमी, पर्दे के पीछे है। इसी कारण कुछ समय पहले ही प्रबंधक का कहना कि मेरे पास रुपया नहीं है, लेकिन कुछ ही देर बाद वह भुगतान करने को तैयार हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed