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ट्रेन हादसे के प्रयास में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर।
Updated Mon, 29 Jan 2018 12:07 AM IST
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काशीपुर में घटना स्थल की जांच करती टीम।
- फोटो : Amar Ujala
काशीपुर-लालकुआं संभाग के बीच रेलवे ट्रैक पर रैलिंग पड़ी होने के मामले की जांच शुरू हो गई है। आरपीएफ ने रातभर घटना स्थल पर गश्त कर संदिग्धों से पूछताछ की। घटना के बाद आरपीएफ ने अज्ञात के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। घटना क्षेत्र यूपी का होने के चलते स्वार चौकी में भी तहरीर सौंपी गई है।
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बता दें कि शनिवार देर शाम ट्रेन संख्या 55304 डाउन काठगोदाम से मुरादाबाद जा रही थी। शाम करीब 7:10 बजे हेमपुर इस्माइल के पास रेलवे ट्रैक पर एक रैलिंग पड़ी दिखने पर लोको पायलट ने जब तक ब्रेक लगाया, ट्रेन का इंजन रैलिंग पर चढ़ गया थी। रेल कर्मियों ने ट्रैक से रैलिंग हटाकर गाड़ी में रख लिया। सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेन को दूसरे लोको पायलट से काशीपुर स्टेशन लाया गया। घटना के बाद रेलवे की एक जांच टीम में शामिल आरपीएफ इंस्पेक्टर ओपी मीणा, लालकुआं के सीनियर सेक्सन इंजीनियर रेलवे पथ एसके सुमन, टीआई एसके राय और रणजीत कुमार ने घटना स्थल का निरीक्षण किया।
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आरपीएफ ने रात में करीब दर्जनभर संदिग्ध लोगों से पूछताछ की। इसके बाद आरपीएफ ने जानबूझकर रेलवे यात्रियों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करने, रेलवे परिचालन में बाधा पहुंचाने की धारा 154/174/147 रेलवे अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर मीणा ने बताया कि करीब दर्जनभर संदिग्धों से पूछताछ की गई है। बताया कि पूरे मामले को लेकर उच्चाधिकारी गंभीर हैं और डीआरएम समेत रेलवे आईजी घटना की जानकारी ले रहे हैं। इसके अलावा जिस जगह हादसा होने से बचा वह क्षेत्र यूपी के स्वार का बताया जाता है। लिहाजा इसे देखते हुए रेलवे अधिकारियों ने लोको पायलट राजेश कुमार के माध्यम से एक तहरीर स्वार चौकी भी सौंपी है।
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कम स्पीड और ओवर ब्रिज होने से बचा बड़ा हादसा
ट्रेन की कम स्पीड होने और कुछ ही दूरी पर ओवर ब्रिज होने के चलते एक बड़ा हादसा होने से बच गया। जब ट्रेन सरकरा स्टेशन से चली तो ट्रेन की स्पीड उस समय काफी कम थी, जिस स्थान पर हादसा हुआ वह सरकरा स्टेशन से महज 300 मीटर की दूरी पर है। इतना ही नहीं उस स्थान पर गोलाई क्षेत्र भी था। साथ ही कोहरा भी लगा हुआ था, जिस कारण ऐहतियातन भी ट्रेन की स्पीड काफी कम थी। आरपीएफ इंस्पेक्टर मीणा ने बताया कि ट्रेन में 12 डिब्बे लगे थे। लोको पायलट ने रैलिंग देख ली थी लिहाजा उसने ब्रेक लगा दिए थे, लेकिन जब तक ब्रेक पूरी तरह लगते, इंजन रैलिंग पर चढ़ चुका था पर इससे ट्रेन नहीं पलट सकती।
शरारती तत्वों का हो सकता है हाथ
मोटर मार्ग की टूटी रैलिंग को रेलवे ट्रैक पर बिछाया गया था। आरपीएफ को संदेह है कि रैलिंग अधिक भारी होने के चलते कुछ लोगों ने इसके दो टुकड़े करने के लिए रैलिंग को रेलवे ट्रैक पर बिछा दिया होगा, ताकि इसके कटने से वह हल्की हो सके और आसानी से ले जाई सके। हालांकि आरपीएफ अन्य बिंदुओं को भी जांच के दायरे में रखकर जांच कर रही है।
आरपीएफ इंस्पेक्टर ओपी मीणा ने बताया कि जिस प्रकार से रैलिंग लगाई गई थी, इससे प्रतीत होता है कि एंगल को दो टुकड़े करने के उद्देश्य से रेलवे ट्रैक पर रखा गया होगा। जिस स्थान पर हादसा हुआ है वहां कई प्रकार के नशीले इंजेक्शन भी मिले है। इससे प्रतीत होता है कि वहां नशेड़ी किस्म के लोग नशा करते हैं। आरपीएफ सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। बताया कि कई बार उस क्षेत्र में दिशा चिन्ह लगाए गए हैं लेकिन वह या तो तोड़ दिए जाते हैं या चोरी हो जाते हैं।