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मासूम परिवार पर कहर बनकर बरसी आग

Sun, 09 Apr 2017 11:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर Updated Sun, 09 Apr 2017 11:28 PM IST
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 Burning fire on innocent family
अाग - फोटो : अमर उजाला

शनिवार की रात मासूम परिवार पर आग कहर बनकर टूटी। आग ने सुहागिन की मांग सूनी कर दी तो दूसरी तरफ तीन बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया। हृदयविदारक इस हादसे से पूरा गांव शोक में डूबा है। विश्वनाथ अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर कुछ बनाना चाहता था। बच्चे भी अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात पढ़ाई में जुटे थे, लेकिन, प्रकृति की मार ने एक पल  में सब कुछ बदल दिया। अस्पताल में मृतक की पत्नी पूनम के बूढ़े मां-बाप का भी रो-रोकर बुरा हाल है।

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   दशकों से विश्वनाथ लखीमपुर यूपी में रहता था और वहां की एक कंपनी में जॉब करता था। करीब 21 वर्ष पहले विश्वनाथ की यहां कंपनी में रामनगरा थाना खटीमा निवासी महिला कर्मी पूनम से मुलाकात हुई और दोनों ने प्रेम विवाह कर घर बसा लिया। करीब तीन साल पहले विश्वनाथ यहां सिडकुल में नौकरी करने की इच्छा लेकर बरुआबाग गांव में रहने लगा और फिर जमीन खरीदकर कच्चा मकान बना लिया। करीब 15 दिन पहले परिवार का एकमात्र सहारा विश्वनाथ लखीमपुर की कंपनी बंद होने पर नवरात्र के उपलक्ष्य में  अपने घर चला आया और अब वह परिवार के साथ यहां रहकर सिडकुल में ही नौकरी तलाश रहा था। उसका सपना था कि वह परिवार के बीच रहकर तीनों बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला सके और उन्हें किसी मुकाम तक पहुंचाए। 
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शनिवार को सब कुछ ठीक-ठाक था। रात को विश्वनाथ बच्चों से हंसी, ठिठोली करने के बाद परिवार के साथ घर में सो गया, लेकिन, उसे क्या पता था कि यह रात उसके परिवार पर कहर बनकर टूटने वाली है। एक पल में विश्वनाथ के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। विश्वनाथ दुनिया से चला गया तो पत्नी पूनम, तीनों बच्चे जिंदगी, मौत से लड़ रहे हैं। आगजनी के इस भीषण हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। रविवार को सारा दिन गांव में मातम सा छाया रहा। पूनम के बूढ़े पिता निरापद विश्वास और मां रेखा विश्वास ने उन्हें देखा तो बिलख पड़े। दो अन्य बहनों, दो भाइयों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। विश्वनाथ की मौत के बाद परिवार के लोगों के इलाज के साथ ही उनके भरण-पोषण की भी समस्या खड़ी हो गई है।

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