70 ठेका श्रमिकों को बाहर किया
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सिडकुल की कोरस प्रिंटर कंपनी से ठेका श्रमिकों को हटाने पर बखेड़ा खड़ा हो गया। नाराज श्रमिकों ने प्रबंधन पर गुपचुप ढंग से फैक्ट्री शिफ्ट करने और बिना नोटिस निकालने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने सहायक श्रमायुक्त को शिकायती पत्र सौंपकर गैर कानूनी शिफ्टिंग पर रोक लगाने की मांग की है। इधर, कंपनी प्रबंधक ने शिफ्टिंग की बात को गलत करार देते हुए अनुरक्षण के लिए मशीनों को बाहर भेजने और श्रमिकों को हटाने का मामला ठेकेदार पर डालते हुए पल्ला झाड़ दिया। उपश्रमायुक्त ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए बुलाया है।
सिडकुल के सेक्टर दो में स्थित कोरस प्रिंटर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी स्टेशनरी का सामान बनाती है। शुक्रवार को कंपनी प्रबंधन ने काम न होने का हवाला देते हुए करीब 70 ठेका श्रमिकों को अंदर नहीं घुसने दिया। कांग्रेस नेता सुशील गाबा के नेतृत्व में गुस्साए श्रमिक फैक्ट्री गेट पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि काम से निकाले गए श्रमिक 11-12 वषों से काम कर रहे हैं। प्रबंधन ने तानाशाही तरीके से बिना नोटिस दिए उन्हें नौकरी से हटा दिया है।
मशीनों को गुपचुप ढंग से बाहर ले जाकर कंपनी को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी से हटाए गए अधिकतर श्रमिकों में महिलाएं हैं। कहा कि कंपनी को गुपचुप ढंग से शिफ्ट करने की सूचना श्रम विभाग को भी लिखित में दी जा रही है। हंगामे की सूचना पर सिडकुल चौकी इंचार्ज केजी मठपाल फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस के कहने पर कंपनी प्रबंधक रमेश गिरि श्रमिकों के बीच पहुंचे तो उन्हें आक्रोश झेलना पड़ा। गिरि ने कहा कि कंपनी को शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। कंपनी के तीन में से दो प्लांटों में काम चल रहा है।
एक प्लांट में मशीनों को अपग्रेड करने के लिए बाहर भेजा जा रहा है, इस वजह से उत्पादन बंद है। इसकी सूचना ठेका श्रमिकों के ठेकेदार को पहले ही दी जा चुकी है। वर्तमान में रोल के कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। जब काम होगा तो श्रमिकों को रखा जाएगा। इधर, श्रमिकों ने यह बात लिखित में देने को कहा तो प्रबंधक ने इनकार कर दिया। इस दौरान अनीता सिंह, निर्मला पाल, ललिता, रमा, पुतुल अधिकारी, संध्या, राजू सिंह, पुष्पा, मीनू, जगत सिंह, बसंती, राजबाला, अमित शर्मा आदि थे।
फैक्ट्री में खपाए 12 साल, अब आंखों में आंसू
कोरस फैक्ट्री के बाहर धरने पर बैठी महिलाओं का कहना था कि ज्यादातर ठेका श्रमिकों को नौकरी करते हुए 10 से 12 साल हो चुके हैं। कंपनी ने उन्हें पक्का तक नहीं किया है। न्यूनतम वेतन का भुगतान भी नहीं होता है। कहा कि इतने साल काम करने के बाद अचानक उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना अन्याय है। अपनी व्यथा सुनाते हुए कई महिला श्रमिकों की आंखें भर आईं और गला रुंध गया। उनका कहना था कि कंपनी से निकालने से पहले उन्हें सूचित तो किया जाना चाहिए था।
कोरस फैक्ट्री में बिना नोटिस श्रमिकों को हटाने की जानकारी मिली है। दोनों पक्षों को बुलाकर वार्ता के लिए समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। श्रमिकों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। - उम्मेद सिंह चौहान, उपश्रमायुक्त, श्रम विभाग।
एक घंटे कराया इंतजार, वार्ता में नहीं पहुंचा प्रबंधन
कोरस फैक्ट्री में उपजे श्रमिक असंतोष को थामने के लिए श्रम विभाग ने शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे दोनों पक्षों को वार्ता के लिए बुलाया था। उपश्रमायुक्त ने फैक्ट्री प्रबंधन को बुलाने के लिए श्रम अधिकारी को भेजा था। तय समय पर श्रमिकों के प्रतिनिधि तो वार्ता में पहुंच गए, लेकिन प्रबंधन का कोई अधिकारी वार्ता में नहीं पहुंचा। इसके लिए उपश्रमायुक्त और श्रमिकों ने एक घंटे तक इंतजार भी किया। उप श्रमायुक्त उम्मेद सिंह चौहान ने बताया कि वार्ता में प्रबंधन के लोग नहीं पहुंचे थे। अब विभाग की ओर से कंपनी को वार्ता के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। इधर, श्रमिकों ने सुनवाई होने तक फैक्ट्री गेट पर बेमियादी धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
समझौते का पालन नहीं होने से श्रमिकों में रोष
शिमला पिस्तौर स्थित आईपी सॉफ्टकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के श्रमिकों ने कारखाना प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। कहा कि 25 जुलाई को श्रमिकों ने गैर कानूनी मिल बंदी, स्थानांतरण, जबरन त्याग पत्र पर रोक लगाने सहित अन्य समस्याओं को लेकर मांग पत्र दिया था। इस पर सहायक श्रमायुक्त की मध्यस्थता में 31 जुलाई को समझौता हुआ। लेकिन, अभी तक समझौते का पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है। कहा कि कंपनी फैक्ट्री को स्थानांतरित करने की तैयारी कर रही है। जो गैर कानूनी और श्रमिक हितों के खिलाफ है। उन्होंने समझौते को लागू करने, गैर कानूनी शिफ्टिंग रोकने सहित अन्य समस्याओं के निस्तारण की मांग की है। वहां जय सिंह सैनी, मनोज बालयान, बालम सिंह राणा, सुनील कुमार, विवेक शर्मा आदि थे।