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धोखाधड़ी के मुकदमें में दायर अपील एडीजे कोर्ट ने की खारिज
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काशीपुर। धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले में आरोपियों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दायर अपील द्वितीय एडीजे विनोद कुमार की कोर्ट ने सुनवाई के बाद निरस्त कर दी। कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त करने संबंधी अवर न्यायालय के निर्णय को सही ठहराया है।
सीओ काशीपुर के निर्देश पर एसआई पीडी जोशी ने 27 मई, 2005 को दलित किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में जांच की। इसमें पाया गया कि पीड़िता की कक्षा आठ पास की टीसी धर्मपुर शेरुआ मुरादाबाद के सद्भावना जूनियर हाईस्कूल से जारी हुई थी जबकि शेरुआ धर्मपुर में इस नाम का कोई विद्यालय नहीं मिला।
जांच में टीसी फर्जी और कूटरचित होना पाई गई। इस मामले में आरोपी मुन्ना, जबर सिंह, महेंद्र सिंह, गामा पहलवान, खलील अहमद के खिलाफ धारा 420, 467, 468 का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। मुकदमों की सुनवाई एसीजेएम कोर्ट में हुई।
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अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि पीड़िता की फर्जी टीसी तैयार कर निबंधक कार्यालय में विवाह के लिए आवेदन किया गया है जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता आनंदस्वरूप रस्तोगी ने कहा कि पीड़िता की वास्तविक और सही टीसी लगाई गई है। सुनवाई के दौरान एक आरोपी खलील की मृत्यु हो गई। इस कारण उसकी फाइल अलग कर दी गई।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद 29 अप्रैल, 2019 को अदालत ने आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अवर न्यायालय के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से अपील की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद द्वितीय एडीजे ने अपील खारिज कर निचली अदालत के फैसले की पुष्टि कर दी।
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सीओ काशीपुर के निर्देश पर एसआई पीडी जोशी ने 27 मई, 2005 को दलित किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में जांच की। इसमें पाया गया कि पीड़िता की कक्षा आठ पास की टीसी धर्मपुर शेरुआ मुरादाबाद के सद्भावना जूनियर हाईस्कूल से जारी हुई थी जबकि शेरुआ धर्मपुर में इस नाम का कोई विद्यालय नहीं मिला।
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जांच में टीसी फर्जी और कूटरचित होना पाई गई। इस मामले में आरोपी मुन्ना, जबर सिंह, महेंद्र सिंह, गामा पहलवान, खलील अहमद के खिलाफ धारा 420, 467, 468 का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। मुकदमों की सुनवाई एसीजेएम कोर्ट में हुई।
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अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि पीड़िता की फर्जी टीसी तैयार कर निबंधक कार्यालय में विवाह के लिए आवेदन किया गया है जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता आनंदस्वरूप रस्तोगी ने कहा कि पीड़िता की वास्तविक और सही टीसी लगाई गई है। सुनवाई के दौरान एक आरोपी खलील की मृत्यु हो गई। इस कारण उसकी फाइल अलग कर दी गई।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद 29 अप्रैल, 2019 को अदालत ने आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अवर न्यायालय के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से अपील की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद द्वितीय एडीजे ने अपील खारिज कर निचली अदालत के फैसले की पुष्टि कर दी।