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Udham Singh Nagar News: बिजली बिल, रजिस्ट्री और विकास शुल्क में निगम को मिले हिस्सेदारी
Wed, 05 Nov 2025 01:15 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 05 Nov 2025 01:15 AM IST
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काशीपुर। शहरी विकास सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष महापौर दीपक बाली ने तीन बिंदुओं का मांग पत्र सौंपा। इस पर मुख्यमंत्री ने विचार कर निर्णय लेने की बात कही है।
मंगलवार को कार्यक्रम में महापौर दीपक बाली ने तीन प्रमुख बिंदुओं की मांग रखी। उन्होंने कहा कि नगर निकाय अपनी सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की मुफ्त सेवा देते हैं, जबकि हर महीने इसका पूरा बिजली बिल उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। ऊर्जा निगम नगर निकाय की जमीनों पर अपने सब स्टेशन व ट्रांसफार्मर लगाता है लेकिन इसके एवज में कोई किराया नहीं देता है। ऊर्जा निगम की ओर से उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिल में से कम से कम दो प्रतिशत राशि नगर निकायों को दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नगर निकाय क्षेत्र में होने वाली जमीन, मकान या दुकान की रजिस्ट्री से उपनिबंधक कार्यालय की ओर से जो विकास शुल्क वसूला जाता है। इसका दो प्रतिशत हिस्सा नगर निकायों को दिया जाए।
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उन्होंने जिला विकास प्राधिकरण की ओर से जब भी किसी व्यावसायिक भवन के नक्शे को मंजूरी दी जाती है तो उससे विकास शुल्क वसूला जाता है। इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा नगर निकायों को मिलना चाहिए। जिस प्रकार राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में किसी भी आवेदन या सेवा के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज अनिवार्य होते हैं, उसी प्रकार नगर निकाय का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) भी अनिवार्य किया जाए।
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मंगलवार को कार्यक्रम में महापौर दीपक बाली ने तीन प्रमुख बिंदुओं की मांग रखी। उन्होंने कहा कि नगर निकाय अपनी सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की मुफ्त सेवा देते हैं, जबकि हर महीने इसका पूरा बिजली बिल उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। ऊर्जा निगम नगर निकाय की जमीनों पर अपने सब स्टेशन व ट्रांसफार्मर लगाता है लेकिन इसके एवज में कोई किराया नहीं देता है। ऊर्जा निगम की ओर से उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिल में से कम से कम दो प्रतिशत राशि नगर निकायों को दी जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि नगर निकाय क्षेत्र में होने वाली जमीन, मकान या दुकान की रजिस्ट्री से उपनिबंधक कार्यालय की ओर से जो विकास शुल्क वसूला जाता है। इसका दो प्रतिशत हिस्सा नगर निकायों को दिया जाए।
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उन्होंने जिला विकास प्राधिकरण की ओर से जब भी किसी व्यावसायिक भवन के नक्शे को मंजूरी दी जाती है तो उससे विकास शुल्क वसूला जाता है। इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा नगर निकायों को मिलना चाहिए। जिस प्रकार राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में किसी भी आवेदन या सेवा के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज अनिवार्य होते हैं, उसी प्रकार नगर निकाय का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) भी अनिवार्य किया जाए।