{"_id":"5ff610458ebc3e31d70108a4","slug":"contract-to-pick-up-garbage-could-not-be-done-even-after-four-months-in-municipal-corporation-kashipur-news-hld4101575145","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगरनगिम में 4 माह बाद भी नही हो सका कूड़ा उठाने का ठेका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगरनगिम में 4 माह बाद भी नही हो सका कूड़ा उठाने का ठेका
विज्ञापन
काशीपुर में डाक्टर लाईन की सड़क पर पड़ा कूड़े का ढ़ेर।
- फोटो : KASHIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशीपुर। नगर निगम प्रशासन की ओर से चार माह बाद भी डोर टू डोर कूड़ा एकत्र करने का ठेका न दिए जाने से शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। शहर में जहां-तहां कूड़े के ढेर लग गए हैं। टेंडर में अधिक राशि मांगे जाने पर कूड़ा एकत्र करने के लिए आमंत्रित की गई टेंडर प्रक्रिया फिर से लटक गई है। काशीपुर निगम में डोर टू डोर कूड़ा एकत्र करने का ठेका पूर्व में जीरो वेस्ट कंपनी को दिया गया था।
कूड़ा निस्तारण में अनियमितताओं व ठेके की दरों को लेकर हुए विवाद के चलते निगम प्रशासन ने एक सितंबर 2020 को कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया था। इसके बाद निगम ने दो माह की अल्प अवधि के लिए कूड़ा निस्तारण का ठेका दिया। यह अवधि समाप्त होने के बाद निगम ने अब तक दो बार कूड़ा निस्तारण के आमंत्रित किए थे लेकिन टेंडर में अंकित की गई दरें निगम की ओर से तय दरों से कहीं अधिक होना पाई गईं। निगम के वित्त नियंत्रक जुनैद अहमद का कहना है कि टेंडरों की टेक्निकल जांच की जा रही है।
वहीं बताया जा रहा है कि टेंडर डालने वाले रुद्रपुर के ठेकेदार ने कूड़ा निस्तारण के लिए 25 लाख रुपये प्रति माह की मांग की है। जबकि निगम प्रशासन इस राशि को बहुत अधिक बता रहा है। ठेकेेदार के साथ टेंडर की राशि कम करने पर बात चल रही है। निगम के सहायक आयुक्त आलोक उनियाल ने बताया कि ठेकेेदार के साथ बात नहीं बनती है तो नए सिरे से टेंडर आमंत्रित करने पर विचार किया जाएगा।
विज्ञापन
ठेका नहीं होने से डोर टू डोर कूड़ा एकत्र करने की व्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में लोग सड़कों व खाली पड़े भूखंडों में कूड़ा फेंक रहे हैं। गलियों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगने और नालियों में कचरा एकत्र होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
कूड़ा निस्तारण में अनियमितताओं व ठेके की दरों को लेकर हुए विवाद के चलते निगम प्रशासन ने एक सितंबर 2020 को कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया था। इसके बाद निगम ने दो माह की अल्प अवधि के लिए कूड़ा निस्तारण का ठेका दिया। यह अवधि समाप्त होने के बाद निगम ने अब तक दो बार कूड़ा निस्तारण के आमंत्रित किए थे लेकिन टेंडर में अंकित की गई दरें निगम की ओर से तय दरों से कहीं अधिक होना पाई गईं। निगम के वित्त नियंत्रक जुनैद अहमद का कहना है कि टेंडरों की टेक्निकल जांच की जा रही है।
विज्ञापन
वहीं बताया जा रहा है कि टेंडर डालने वाले रुद्रपुर के ठेकेदार ने कूड़ा निस्तारण के लिए 25 लाख रुपये प्रति माह की मांग की है। जबकि निगम प्रशासन इस राशि को बहुत अधिक बता रहा है। ठेकेेदार के साथ टेंडर की राशि कम करने पर बात चल रही है। निगम के सहायक आयुक्त आलोक उनियाल ने बताया कि ठेकेेदार के साथ बात नहीं बनती है तो नए सिरे से टेंडर आमंत्रित करने पर विचार किया जाएगा।
विज्ञापन
ठेका नहीं होने से डोर टू डोर कूड़ा एकत्र करने की व्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में लोग सड़कों व खाली पड़े भूखंडों में कूड़ा फेंक रहे हैं। गलियों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगने और नालियों में कचरा एकत्र होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।