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50 दिन में बढ़ा सिडकुल कॉनकोर का कारोबार
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर।
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:15 AM IST
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कंटेनर
- फोटो : अमर उजाला
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रुद्रपुर। नोटबंदी ने जहां अधिकतर कारोबार को प्रभावित किया है वहीं पंतनगर सिडकुल का वर्ष 2015 में रेलवे के साथ हुए सिडकुल के करार में सिडकुल का ज्वाइंट वेंचर लॉजिस्टिक हब (कॉनकोर) के लिए नोटबंदी वरदान साबित हो रही है। नोटबंदी से पहले जहां कॉनकोर के जरिए (रेल मार्ग) से सिडकुल के कच्चे-पक्के माल का आदान-प्रदान मात्र 10 से 20 फीसदी तक ही हो पा रहा था अब वह पूरे सौ प्रतिशत के आंकड़े पर आ पहुंचा है।
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वर्तमान में नोटबंदी के बाद से जहां ट्रकों के जरिए माल का आदान-प्रदान एकाएक 50 फीसदी से अधिक घट गया था वहीं सिडकुल कॉनकोर के कारोबार में भारी उछाल आ गया। इसका मुख्य कारण कैशलेस पर व्यापार होना रहा है। शुरुआती दौर में जहां कॉनकोर से कंटेनरों से माल दो-दो, तीन-तीन दिन में एक-एक मालगाड़ी से आता-जाता था वहीं अब यह कारोबार पूरे चरम पर है।
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पंतनगर सिडकुल में कॉनकोर के जरिए एक दिन में दो-दो मालगाड़ियों से सिडकुल के कच्चे-पक्के माल का आयात-निर्यात हो रहा है। वर्तमान में सिडकुल की कंपनियों का सबसे ज्यादा माल का आदान-प्रदान कॉनकोर से ही हो रहा है। उधर ट्रक ट्रांसपोर्ट कारोबार नोटबंदी के 50 दिन के भीतर 65 प्रतिशत तक घट गया है। सिडकुल की बड़े ट्रांसपोर्ट कंपनियां इस समय बड़े घाटे के दौर से गुजर रही हैं।
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ट्रक ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक पहले एक सप्ताह में ढाई लाख रुपए राशि बैंकों से निकालने की लिमिट थी वह अब सप्ताह में मात्र 50 हजार रुपए ही निकालने के कारण ट्रकों का डीजल आदि का खर्चा वहन नहीं हो पा रहा है। इसलिए लंबे रूटों के लिए जाने वाले ट्रक माल लेकर नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण उनके व्यापार पर व्यापक असर पड़ गया है। सिडकुल के ट्रांसपोर्टर एवीजी लॉजिस्टिक के प्रबंधक रामकृपाल यादव का कहना है कि नोटबंदी के कारण सबसे ज्यादा मार उनके कारोबार पर पड़ रही है।
बैंकों से रुपए कम मिलने के कारण कारोबार 65 प्रतिशत तक घट गया है। पहले 90 लाख से एक करोड़ रुपए की बिलिंग प्रतिमाह होती थी, वह पूरे दिसंबर में मात्र 38 लाख रुपए तक ही हो पाई है। सप्ताह में मात्र 50 हजार रुपए की निकासी की लिमिट ने व्यापार चौपट कर दिया है। वहीं एसआर लॉजस्टिक कंपनी के स्वामी प्रवीण ओता का कहना है कि नोटबंदी के 50 दिन बाद भी कारोबार 50 फीसदी के घाटे पर अटका है। अगर बैंक नकदी निकासी की लिमिट बढ़ाएं तो ट्रकों से माल का आदान-प्रदान भी बढ़ाया जाएगा।