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एसडीएम की रिपोर्ट दरकिनार कर बांटा था करोड़ों का मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:58 PM IST
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एनएच 74 में हुए भूमि मुआवजे घोटाले की जांच में अफसरों के साठगांठ के मामले उजागर हो रहे हैं। काशीपुर की तीन जमीनों का अकृषि में करोड़ों रुपयों का मुआवजा एसडीएम की रिपोर्ट को दरकिनार कर तत्कालीन एसएलओ ने बांट दिया। एसडीएम की रिपोर्ट में उस जमीन में खेती होना दर्शाया गया था।
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एनएच घोटाले की जांच कर रही एसआईटी जसपुर और काशीपुर की जांच के बाद अब बाजपुर और रुद्रपुर तहसील की जांच कर रही है। अब तक एसआईटी मामले में दो पीसीएस अफसरों समेत 12 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। घोटाले में जेल भेजे गए तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह ने काशीपुर के तीन मामलों में मुआवजा वितरण करते समय एसडीएम की रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया था।
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सूत्रों के मुताबिक अगस्त 2016 में काशीपुर के तत्कालीन एसडीएम ने एसएलओ डीपी सिंह को तीन संदिग्ध जमीनों के संबंध में रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कहा गया था कि जमीनों के अनुमति पत्र स्पष्ट नहीं है। तीनों जमीन कृषि है। लिहाजा इन जमीनों के संबंध में अकृषि की दर से मुआवजा वितरण नहीं किया जाए। एसडीएम की रिपोर्ट को डीपी ने रिसीव भी किया था।
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इस रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम ने बहुत जरूरी का नोट लिखकर एसएलओ के पास भेजा था लेकिन एसडीएम की रिपोर्ट को दरकिनार कर तत्कालीन एसएलओ डीपी ने 20 अगस्त 2016 को तीनों जमीनों का मुआवजा वितरण कर दिया। मुआवजे की रकम 45 करोड़ रुपयों से अधिक थी।
मुआवजा वितरण होने के छह दिन बाद तत्कालीन एसडीएम ने एक और रिपोर्ट भेजी थी। इस रिपोर्ट में जिक्र किया गया था कि तीनों जमीनें कृषि योग्य हैं और उनमें खेती हो रही थी लेकिन इस रिपोर्ट पर कार्रवाई के बजाय उसे दरकिनार कर दिया गया। ऐसे ही कई और मामलों में अफसरों ने किसानों से मोटा कमीशन लेेकर करोड़ों का मुआवजा बांटा था। अब यही मुआवजा अफसरों के साथ ही किसानों की गले की फांस बन रहा है।