{"_id":"617d725d29529f43c31cd26d","slug":"compensation-is-not-sufficient-kashipur-news-hld4431490123","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर उजड़ गए मुआवजा चार हजार।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर उजड़ गए मुआवजा चार हजार।
विज्ञापन
काशीपुर में पत्रकार वार्ता करते मारवाह, साथ में व्यापारी नेता आशीष अरोरा।
- फोटो : KASHIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशीपुर। ऑल इंडिया केंद्रीय गुरु सिंह सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तरविंदर सिंह मारवाह ने कहा कि आपदा में लोगों के घर उजड़ गए और सरकार मुआवजा के नाम पर मजाक कर रही है। 3500 रुपये से चार हजार रुपये में क्या होगा। किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं और सरकार मुआवजा तक तय नहीं कर पाई है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने 10 दिन के भीतर पीड़ितों को उनका हक नहीं दिया तो गुरु सिंह सभा आंदोलन करेगी। धरना दिया जाएगा और प्रदर्शन होंगे।
कुमाऊं दौरे के बाद शनिवार को मारवाह व्यापारी नेता आशीष अरोड़ा बॉबी के कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि 15 दिन से वह अल्मोड़ा, नैनीताल सहित कई जिलों के दौरे पर थे। उन्होंने आपदा पीड़ितों की आपबीती सुनी, किसी का मकान ढह गया, लोग बेघर हो गए हैं और सरकार मुआवजा दे रही है, 3500 रुपये। आज के दौर में कौन सा घर 3500 रुपये में बनता है।
कई लोगों ने तो सरकार के चेक लेने से ही इनकार कर दिया है। ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि सरकार या उसका कोई नुमाइंदा उनका हाल जानने नहीं आया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं और सरकार मुआवजा तक तय नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि भारी संख्या में पर्यटक नैनीताल, अल्मोड़ा सहित अन्य स्थानों पर फंसे हुए थे। सिंह सभा और किसानों ने उन्हें बचाने में सहयोग किया और शरण दी। पहली बार वह देख रहे हैं कि इतनी बड़ी आपदा उत्तराखंड में आई है और केंद्र सरकार से कोई टीम नहीं भेजी गई। सरकार अपने कान बंद करके बैठी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने 10 दिन के भीतर पीड़ितों को उनका हक नहीं दिया तो गुरु सिंह सभा आंदोलन करेगी। धरना दिया जाएगा और प्रदर्शन होंगे।
कुमाऊं दौरे के बाद शनिवार को मारवाह व्यापारी नेता आशीष अरोड़ा बॉबी के कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि 15 दिन से वह अल्मोड़ा, नैनीताल सहित कई जिलों के दौरे पर थे। उन्होंने आपदा पीड़ितों की आपबीती सुनी, किसी का मकान ढह गया, लोग बेघर हो गए हैं और सरकार मुआवजा दे रही है, 3500 रुपये। आज के दौर में कौन सा घर 3500 रुपये में बनता है।
विज्ञापन
कई लोगों ने तो सरकार के चेक लेने से ही इनकार कर दिया है। ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि सरकार या उसका कोई नुमाइंदा उनका हाल जानने नहीं आया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं और सरकार मुआवजा तक तय नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि भारी संख्या में पर्यटक नैनीताल, अल्मोड़ा सहित अन्य स्थानों पर फंसे हुए थे। सिंह सभा और किसानों ने उन्हें बचाने में सहयोग किया और शरण दी। पहली बार वह देख रहे हैं कि इतनी बड़ी आपदा उत्तराखंड में आई है और केंद्र सरकार से कोई टीम नहीं भेजी गई। सरकार अपने कान बंद करके बैठी है।
विज्ञापन