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हरदा की नजर जिले की सभी सीटों पर
भास्कर पोखरियाल/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Thu, 02 Feb 2017 11:02 PM IST
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जिले की किच्छा विधानसभा सीट पर चुनावी समर में उतरे मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए जहां अपनी सीट नाक का सवाल है, वहीं जिले की अन्य सीटों पर भी उनका फोकस है। हरीश रावत चुनाव प्रचार के साथ-साथ डैमेज कंट्रोल और विरोधियों की रणनीति को भांपने में जुटे हुए हैं। बुधवार को सीएम रावत ने यशपाल आर्य के करीबी माने जाने वाले रुद्रपुर के युवा कांग्रेसी नेता हिमांशु गावा को भी प्रदेश संगठन में पद की ताजपोशी देकर आखिरकार मना ही लिया। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि सीएम की निगाहें रुद्रपुर सीट पर भी हैं।
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लंबी जद्दोजहद के बाद जिले की किच्छा विधानसभा सीट से चुनावी दंगल में उतरे हरीश रावत के लिए इस सीट पर शुरूआत में राह आसान नजर नहीं आ रही थी। किच्छा सीट पर जिस तरह से टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त थी, उससे बड़े स्तर पर बगावत के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन हरीश रावत ने काफी हद तक नियंत्रण पाने में कामयाब हो गए हैं। वर्तमान में किच्छा में पार्टी का कोई भी ऐसा नेता नहीं है जो हरीश रावत के सामने खुलकर विरोध कर रहा हो। कई दावेदारों ने तो हरीश रावत के समर्थन में खुलकर प्रचार भी शुरू कर दिया है। गदरपुर सीट से टिकट कटने के बाद हरीश रावत के खिलाफ खुलकर सामने आईं शिल्पी अरोरा को भी मना लिया।
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शिल्पी ने किच्छा सीट के साथ-साथ गदरपुर सीट से भी अपना नामांकन वापस ले लिया है। सीएम की नजर अकेले किच्छा सीट पर नहीं है, बल्कि जिले की सभी सीटों पर है। जसपुर से लेकर खटीमा तक की नौ विधानसभा सीटों पर सीएम ने रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए अपने खास सलाहकारों को लगाया है। किच्छा सीट पर मोर्चा खुद संभालने के बाद रुद्रपुर सीट पर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी तिलकराज बेहड़ से लंबे समय से नाराज चल रहे हिमांशु गावा को भी मना लिया है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष पद की कुर्सी छिनने के बाद से नाराज चल रहे गावा को सीधे प्रदेश महामंत्री पद का दायित्व सौंपकर रावत ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
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दरअसल गावा रुद्रपुर में यशपाल आर्य के करीबी माने जाते हैं। यशपाल आर्य के पार्टी छोड़ने के बाद गावा के भी भाजपा में जाने की अटकलें पिछले कई दिनों से चल रही थी। बृहस्पतिवार को गावा को प्रदेश महामंत्री बनाए जाने के बाद अब इन अटकलों पर पूरी तरह विराम लग गया। इससे अब गाबा की नाराजगी से रुद्रपुर में पार्टी को होने वाले नुकसान की भरपाई भी हो सकेगी।
दूसरी तरफ गदरपुर में पूर्व विधायक महाजन की नाराजगी दूर करने के लिए भी सीएम ने अपने स्तर से प्रयास किए थे, जिसके फलस्वरूप महाजन को मनाने में बेहड़ कामयाब हो गए। जिले में अन्य सीटों पर भी पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के लिए रावत पूरी नजर रखे हुए हैं।
अपनी सीट पर प्रचार के साथ-साथ अन्य सीटों पर प्रत्याशियों के समर्थन में रावत का रोड शो इस बात का संकेत दे रहा है कि हरीश रावत जिले की किसी सीट को गंवाना नहीं चाहते। हरीश रावत की रणनीति ने विरोधियों की बेचैनी भी बढ़ा दी है। इसकी वजह यह भी है कि टिकट फाइनल होने के बाद जिन सीटों पर भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा था, उन सीटों पर भी अब मुकाबला कांटे का माना जाने लगा है। जिले में रावत की रणनीति क्या गुल खिलाएगी यह तो 15 फरवरी के बाद ही पता चलेगा लेकिन फिलहाल इतना तय है कि जिले में रावत की घुसपैठ से भाजपा की राह अब आसान नहीं होगी।