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Udham Singh Nagar News: खाली चेक को सिक्योरिटी के तौर पर देने का दावा फेल, सजा बरकरार
Fri, 10 Jul 2026 12:51 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 10 Jul 2026 12:51 AM IST
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रुद्रपुर। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास्तव ने चेक बाउंस मामले में आरोपी की याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ यह कह देने से कि चेक सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर दिया गया था, आरोपी दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता।
उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी फरहीन खान ने रुद्रपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से किसान गोल्ड लोन योजना के तहत 6,29,845 रुपये का कृषि ऋण लिया था। ऋण का भुगतान नहीं होने पर बैंक की ओर से तकादा किया गया जिसके बाद आरोपी ने 4.50 लाख रुपये का चेक जारी किया। बैंक में चेक लगाने के बाद बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर बैंक ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। चतुर्थ अपर सिविल जज/एसीजेएम रुद्रपुर की अदालत ने 31 मार्च 2023 को आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास और 6.60 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसमें से 6.50 लाख रुपये बैंक को मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए थे।
अपील की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बैंक ने लोन के समय सुरक्षा के रूप में लिए गए हस्ताक्षरयुक्त खाली चेक का दुरुपयोग किया है। वहीं, बैंक ने खाते का विवरण और अन्य दस्तावेज पेश कर इस दावे का खंडन किया। सत्र न्यायालय ने कहा कि जब चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार हैं, तो कानून यह मानकर चलता है कि वह वैध देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किया गया था। आरोपी इस धारणा को साक्ष्यों से खंडित नहीं कर सका। अदालत ने अपील निरस्त करते हुए आरोपी को निचली अदालत के समक्ष तत्काल आत्मसमर्पण कर सजा भुगतने के निर्देश दिए।
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उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी फरहीन खान ने रुद्रपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से किसान गोल्ड लोन योजना के तहत 6,29,845 रुपये का कृषि ऋण लिया था। ऋण का भुगतान नहीं होने पर बैंक की ओर से तकादा किया गया जिसके बाद आरोपी ने 4.50 लाख रुपये का चेक जारी किया। बैंक में चेक लगाने के बाद बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर बैंक ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। चतुर्थ अपर सिविल जज/एसीजेएम रुद्रपुर की अदालत ने 31 मार्च 2023 को आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास और 6.60 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसमें से 6.50 लाख रुपये बैंक को मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए थे।
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अपील की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बैंक ने लोन के समय सुरक्षा के रूप में लिए गए हस्ताक्षरयुक्त खाली चेक का दुरुपयोग किया है। वहीं, बैंक ने खाते का विवरण और अन्य दस्तावेज पेश कर इस दावे का खंडन किया। सत्र न्यायालय ने कहा कि जब चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार हैं, तो कानून यह मानकर चलता है कि वह वैध देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किया गया था। आरोपी इस धारणा को साक्ष्यों से खंडित नहीं कर सका। अदालत ने अपील निरस्त करते हुए आरोपी को निचली अदालत के समक्ष तत्काल आत्मसमर्पण कर सजा भुगतने के निर्देश दिए।
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