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शारदा सागर जलाशय से अतिक्रमणारियों को हटने के लिए कराई मुनादी
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खटीमा के सिसैया बंधा में मुनादी कराती यूपी सिंचाई विभाग एवं पुलिस टीम। संवाद
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा। शारदा सागर जलाशय में बसे लगभग 293 परिवारों को जलाशय छोड़ने के लिए मुनादी कराई गई है। जलाशय खाली करने की मुनादी कर रही टीम को ग्रामीणों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।
शुक्रवार को पुलिस के साथ अतिक्रमण क्षेत्र में टीम के साथ पहुंचे सहायक अभियंता द्वितीय उपखंड खटीमा शारदा सागर खंड पीलीभीत ने लाउडस्पीकर से डैम खाली करने की मुनादी कराई। उन्होंने यहां बसे अतिक्रमणकारियों को अवगत कराया कि तीन बार नोटिस एवं दो बार मुनादी के बाद भी जलाशय खाली नहीं कराया गया है। पहले 10 मई 2022 तक का समय दिया गया। टीम ने मुनादी में एक सप्ताह का समय बताते हुए स्वयं अतिक्रमण हटाने को कहा। इधर ग्रामीणों ने अपना जीना व मरना इसी जलाशय की भूमि पर बताते हुए किसी भी स्थिति में जलाशय खाली नहीं करने की चेतावनी दी। कहा कि जलाशय से सिंचाई के लिए पानी कम पड़ रहा है। अतिक्रमण हटाते ही जलाशय में पानी भरा जाएगा।
मुनादी कर रही सिंचाई विभाग की टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। उन्हें पुलिस ने समझाकर आगे निकाला। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगली बार सिंचाई विभाग की टीम को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। सिसैया, बंधा, बलुआ खैरानी, बगुलिया, झाउपरसा में घूम-घूम कर मुनादी की गई। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि वह 70 वर्षों से यहां बसे हैं। यदि हटाना था तो उन्हें सरकारी सुविधाएं क्यों दीं।
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उन्हें लगातार नहीं हटाने का आश्वासन दिया जाता रहा। विरोध करने वालों में शीला देवी, प्रभु कुमार, हंस राज, ब्रिजु, छोटे लाल, शिवनाथ, शोभा देवी, गुड्डी देवी, देवकी देवी, रेशमा देवी, रामाशीश, शिबू लाल, जोगेंद्र, गोविंद, मीना देवी, मालती देवी, मीरा, सुनरी, बिंदु, दुर्गावती, चंपा, रामजनन, राम छबीला, सुरेश नाथ, राकेश नाथ, रामप्रीत, तीरथ, मोहन राय, शनिचर, संजय चंद्रभान, रामबचन, धर्मावती, आशा देवी, सुंदरी, हेमवंती देवी आदि थे। मुनादी कराने वाली टीम में सिंचाई विभाग के अपर अभियंता भूपेंद्र सिंह, अतुल कुमार वार्ष्णेय, लेखराज, झनकईया थाने के उपनिरीक्षक प्रदीप शर्मा, मनोज सिंह देव आदि थे।
- शारदा सागर जलाशय के भीतर लगभग 70 वर्षों से बसे हैं। उत्तराखंड सरकार ने यहां बसे परिवारों को बिजली, पानी, सीसी मार्ग, आंगनबाड़ी केंद्र आदि सुविधाएं दी हैं। आज तक यूपी सरकार को पानी की जरूरत नहीं थी अब अचानक पानी की जरूरत पड़ गई। इस परिस्थितियों में वे लोग कहां जाएंगे। कहीं जाना संभव नहीं है।
- रतन कुमार राय।
- बचपने से यहां रहते आ रहे हैं। अब तीसरी पीढ़ी में यहां से कहां जाएंगे। भारतीय नागरिक हैं। यूपी सरकार लिखकर दे कि हम भारतीय नागरिक नहीं है। इसके बदले अन्य कहीं जमीन दी जाए हम वहां चले जाएंगे।- रामप्रीत गौतम ।
- हमें पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने यहां बसाया था। समय-समय पर यहां से नहीं हटाने का आश्वासन मिलता रहा है। शारदा सागर डैम का अभी बंटवारा तक नहीं हुआ। उत्तराखंड सरकार आश्वासन देती है लेकिन यूपी सरकार हटाने में लगी है। तीन नोटिस दे चुकी है। दोबारा मुनादी कराकर हटने को कहा गया है। हम कहां जाएंगे और कहां नहीं जाएंगे। यहीं पर सब कुछ है।
- सुरेश कुमार।
- शारदा सागर डैम में जल संचय होना है। यहां बसे लोगों को तीन बार नोटिस दिया गया है और तीन बार मुनादी की जा चुकी है लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है। एक सप्ताह तक अतिक्रमण नहीं हटा तो पुलिस प्रशासन के साथ हटाने की कार्रवाई की जाएगी।- राज कुमार सहायक अभियंता द्वितीय उत्तराखंड शारदा सागर खंड पीलीभीत।
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शुक्रवार को पुलिस के साथ अतिक्रमण क्षेत्र में टीम के साथ पहुंचे सहायक अभियंता द्वितीय उपखंड खटीमा शारदा सागर खंड पीलीभीत ने लाउडस्पीकर से डैम खाली करने की मुनादी कराई। उन्होंने यहां बसे अतिक्रमणकारियों को अवगत कराया कि तीन बार नोटिस एवं दो बार मुनादी के बाद भी जलाशय खाली नहीं कराया गया है। पहले 10 मई 2022 तक का समय दिया गया। टीम ने मुनादी में एक सप्ताह का समय बताते हुए स्वयं अतिक्रमण हटाने को कहा। इधर ग्रामीणों ने अपना जीना व मरना इसी जलाशय की भूमि पर बताते हुए किसी भी स्थिति में जलाशय खाली नहीं करने की चेतावनी दी। कहा कि जलाशय से सिंचाई के लिए पानी कम पड़ रहा है। अतिक्रमण हटाते ही जलाशय में पानी भरा जाएगा।
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मुनादी कर रही सिंचाई विभाग की टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। उन्हें पुलिस ने समझाकर आगे निकाला। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगली बार सिंचाई विभाग की टीम को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। सिसैया, बंधा, बलुआ खैरानी, बगुलिया, झाउपरसा में घूम-घूम कर मुनादी की गई। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि वह 70 वर्षों से यहां बसे हैं। यदि हटाना था तो उन्हें सरकारी सुविधाएं क्यों दीं।
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उन्हें लगातार नहीं हटाने का आश्वासन दिया जाता रहा। विरोध करने वालों में शीला देवी, प्रभु कुमार, हंस राज, ब्रिजु, छोटे लाल, शिवनाथ, शोभा देवी, गुड्डी देवी, देवकी देवी, रेशमा देवी, रामाशीश, शिबू लाल, जोगेंद्र, गोविंद, मीना देवी, मालती देवी, मीरा, सुनरी, बिंदु, दुर्गावती, चंपा, रामजनन, राम छबीला, सुरेश नाथ, राकेश नाथ, रामप्रीत, तीरथ, मोहन राय, शनिचर, संजय चंद्रभान, रामबचन, धर्मावती, आशा देवी, सुंदरी, हेमवंती देवी आदि थे। मुनादी कराने वाली टीम में सिंचाई विभाग के अपर अभियंता भूपेंद्र सिंह, अतुल कुमार वार्ष्णेय, लेखराज, झनकईया थाने के उपनिरीक्षक प्रदीप शर्मा, मनोज सिंह देव आदि थे।
- शारदा सागर जलाशय के भीतर लगभग 70 वर्षों से बसे हैं। उत्तराखंड सरकार ने यहां बसे परिवारों को बिजली, पानी, सीसी मार्ग, आंगनबाड़ी केंद्र आदि सुविधाएं दी हैं। आज तक यूपी सरकार को पानी की जरूरत नहीं थी अब अचानक पानी की जरूरत पड़ गई। इस परिस्थितियों में वे लोग कहां जाएंगे। कहीं जाना संभव नहीं है।
- रतन कुमार राय।
- बचपने से यहां रहते आ रहे हैं। अब तीसरी पीढ़ी में यहां से कहां जाएंगे। भारतीय नागरिक हैं। यूपी सरकार लिखकर दे कि हम भारतीय नागरिक नहीं है। इसके बदले अन्य कहीं जमीन दी जाए हम वहां चले जाएंगे।- रामप्रीत गौतम ।
- हमें पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने यहां बसाया था। समय-समय पर यहां से नहीं हटाने का आश्वासन मिलता रहा है। शारदा सागर डैम का अभी बंटवारा तक नहीं हुआ। उत्तराखंड सरकार आश्वासन देती है लेकिन यूपी सरकार हटाने में लगी है। तीन नोटिस दे चुकी है। दोबारा मुनादी कराकर हटने को कहा गया है। हम कहां जाएंगे और कहां नहीं जाएंगे। यहीं पर सब कुछ है।
- सुरेश कुमार।
- शारदा सागर डैम में जल संचय होना है। यहां बसे लोगों को तीन बार नोटिस दिया गया है और तीन बार मुनादी की जा चुकी है लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है। एक सप्ताह तक अतिक्रमण नहीं हटा तो पुलिस प्रशासन के साथ हटाने की कार्रवाई की जाएगी।- राज कुमार सहायक अभियंता द्वितीय उत्तराखंड शारदा सागर खंड पीलीभीत।