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साढ़े तीन साल से जंग खा रही हैं करोड़ों की मशीनें
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पेटियों में बंद पड़ी करोड़ों की मशीनें।
- फोटो : KASHIPUR
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सेप्ट एज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए आईं करोड़ों की मशीनें लगभग साढ़े तीन साल से जंग खा रही हैं। काम समय से पूरा न होने के चलते यह पेटियों में बंद निर्माणाधीन प्लांट में डंप हैं। इसके चलते सरकार को करोड़ों की क्षति होने की आशंका है।
सीवर से खाद बनाने और गंदे पानी को साफ कर ढेला में प्रवाहित करने वाला सेप्ट एज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट काशीपुर में बनाया जाना है। इसकी शुरूआत 25 अक्तूबर 2017 को हुई थी। पहले इसे 35 करोड़ 24 लाख से बनाया जाना था लेकिन बाद में यह लागत 37 करोड़ 20 लाख हो गई।
प्लांट सुचारु करने के लिए 18 महीने का समय था। ऐसे में प्लांट अप्रैल 2019 में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन प्लांट अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गईं मशीनें जंग खा रही हैं। इनकी वारंटी निकल जाने और गुणवत्ता खराब होने जाने की आशंका है। संबंधित विभाग पेयजल निगम ठेकेदार पर पेनाल्टी भी डाल चुका है लेकिन अभी तक ठेकेदार प्लांट का निर्माण पूरा नहीं कर सका है।
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प्लांट सुचारु होने में देरी हो रही है क्योंकि फाउंडेशन बनाने आदि में काफी समय लग गया था। ठेकेदार पर पेनाल्टी भी डाली जा चुकी है। अगर मशीनें खराब होती हैं या वारंटी निकलती है तो संबंधित ठेकेदार जिम्मेदार होगा क्योंकि प्लांट सुचारु होने के बाद भी कई साल तक ठेकेदार की जिम्मेदारी में रहेगा। -शुभम द्विवेदी, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम, काशीपुर।
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सीवर से खाद बनाने और गंदे पानी को साफ कर ढेला में प्रवाहित करने वाला सेप्ट एज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट काशीपुर में बनाया जाना है। इसकी शुरूआत 25 अक्तूबर 2017 को हुई थी। पहले इसे 35 करोड़ 24 लाख से बनाया जाना था लेकिन बाद में यह लागत 37 करोड़ 20 लाख हो गई।
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प्लांट सुचारु करने के लिए 18 महीने का समय था। ऐसे में प्लांट अप्रैल 2019 में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन प्लांट अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गईं मशीनें जंग खा रही हैं। इनकी वारंटी निकल जाने और गुणवत्ता खराब होने जाने की आशंका है। संबंधित विभाग पेयजल निगम ठेकेदार पर पेनाल्टी भी डाल चुका है लेकिन अभी तक ठेकेदार प्लांट का निर्माण पूरा नहीं कर सका है।
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प्लांट सुचारु होने में देरी हो रही है क्योंकि फाउंडेशन बनाने आदि में काफी समय लग गया था। ठेकेदार पर पेनाल्टी भी डाली जा चुकी है। अगर मशीनें खराब होती हैं या वारंटी निकलती है तो संबंधित ठेकेदार जिम्मेदार होगा क्योंकि प्लांट सुचारु होने के बाद भी कई साल तक ठेकेदार की जिम्मेदारी में रहेगा। -शुभम द्विवेदी, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम, काशीपुर।

निर्माणाधीन प्लांट।- फोटो : KASHIPUR