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परीक्षा को डर नहीं, अवसर समझें परीक्षार्थी : निर्मल
Tue, 17 Feb 2026 12:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 17 Feb 2026 12:04 AM IST
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खटीमा। 17 फरवरी 2026 से शुरू हो रही सीबीएसई बोर्ड की मुख्य परीक्षा देशभर के लाखों विद्यार्थियों के स्कूली जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। राजीव गांधी नवोदय विद्यालय के विज्ञान के शिक्षक निर्मल न्योलिया कहते हैं कि परीक्षा विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालयों सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। परीक्षार्थी परीक्षा को डर नहीं, अवसर समझें क्योंकि यह वह समय है जब पूरे शैक्षणिक वर्ष की तैयारी को शांत मन से प्रस्तुत करना होता है।
परीक्षा कक्ष में प्रश्नपत्र को ध्यान से पढ़कर उत्तर लिखें जिसके लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय बोर्ड की ओर से आवंटित किया गया है लेकिन इसका फायदा उन बच्चों को नहीं मिल पाता जो देर से परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं। याद रखें अंक आपकी क्षमता का एक हिस्सा मात्र हैं, आपकी संपूर्ण पहचान नहीं, इसलिए प्रश्नपत्र के प्रत्येक हिस्से और पूछे गए निर्धारित प्रश्न के प्रत्येक हिस्से का उत्तर देने से न चूकें। परीक्षा के दिनों में अभिभावकों से अपेक्षा रहती है कि इस समय बच्चों की तुलना नहीं बल्कि सहयोग करें। वे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखें। बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। संभव हो तो अपने बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करें। परीक्षा कक्ष में प्रवेश और निकलते वक्त आपकी एक मुस्कान और विश्वास भरे शब्द बच्चों के मनोबल को कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और विद्यालयों की जिम्मेदारी पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होती इसलिए इस दौरान विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान धैर्यपूर्वक करें।
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परीक्षा कक्ष में प्रश्नपत्र को ध्यान से पढ़कर उत्तर लिखें जिसके लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय बोर्ड की ओर से आवंटित किया गया है लेकिन इसका फायदा उन बच्चों को नहीं मिल पाता जो देर से परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं। याद रखें अंक आपकी क्षमता का एक हिस्सा मात्र हैं, आपकी संपूर्ण पहचान नहीं, इसलिए प्रश्नपत्र के प्रत्येक हिस्से और पूछे गए निर्धारित प्रश्न के प्रत्येक हिस्से का उत्तर देने से न चूकें। परीक्षा के दिनों में अभिभावकों से अपेक्षा रहती है कि इस समय बच्चों की तुलना नहीं बल्कि सहयोग करें। वे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखें। बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। संभव हो तो अपने बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करें। परीक्षा कक्ष में प्रवेश और निकलते वक्त आपकी एक मुस्कान और विश्वास भरे शब्द बच्चों के मनोबल को कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और विद्यालयों की जिम्मेदारी पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होती इसलिए इस दौरान विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान धैर्यपूर्वक करें।
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