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लॉकडाउन से निजी बस ऑपरेटरों को रोजी रोटी के लाले
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काशीपुर में रोडवेज डिपो में खड़ी बसें।
- फोटो : KASHIPUR
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रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने के कारण परिवहन निगम की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। निगम ने करीब डेढ़ लाख टैक्स बचाने के लिए 25 बसों को आगामी आदेशों तक सरेंडर कर दिया है।
रोडवेज डिपो में 34 निगम और 9 अनुबंधित बसों का बेड़ा है। हरिद्वार, टनकपुर, हल्द्वानी, देहरादून, चंडीगढ, दिल्ली, बरेली, लखनऊ, मुज्जफरनगर आदि मार्गों पर बसों का संचालन होता था जिससे प्रतिदिन डिपो को साढ़े पांच से साढ़े छह लाख रुपये की आय होती थी। लॉकडाउन के कारण संचालन ठप हो गया था।
पूर्व से घाटे में चलने वाले निगम की आर्थिक स्थिति और बदतर हो गई। डिपो को चार महीने से लगातार लाखों रुपये का टैक्स एआरटीओ कार्यालय में जमा करना पड़ रहा था। इससे विभाग पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। बसों के संचालन की कोई उम्मीद नजर नहीं आने पर मुख्यालय ने बसों को सरेंडर करने के निर्देश जारी किए। दो दिन में 25 बसों को सरेंडर किया जा चुका है।
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प्रभारी सहायक महाप्रबंधक आरसी पांडे ने बताया कि निगम की 16 बसों का एआरटीओ कार्यालय में टैक्स जमा कर दस्तावेज सरेंडर कर दिए हैं। इससे निगम का हर महीने जमा होने वाला टैक्स बचेगा। डिपो में 18 बसें संचालन के लिए रखी गई हैं। संचालन के निर्देश प्राप्त होने पर भविष्य में बसों को एआरटीओ से रिलीज कराना पड़ेगा।
बाह्य श्रोत, संविदा आदि के तहत कार्यरत चालक-परिचालक सहित अन्य कर्मी मुख्यालय के अग्रिम आदेशों तक घर बैठेंगे। रोडवेज डिपो में सुल्तानपुर पट्टी से मात्र एक बस यूके 18पीए 0298 संचालित होती थी। जबकि बस संख्या यूके 07पीए 3947, 3948, 3967, 4015, 4025, 4026, 4043, 4122 बिजनौर यूपी की संचालित होती थी। यह सभी बसें भी सरेंडर कर दी गई हैं।
लॉकडाउन से निजी बस ऑपरेटरों को रोजी-रोटी का संकट
शक्तिफार्म। लॉकडाउन से निजी बस ऑपरेटरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बस ऑपरेटरों ने सरकार की गलत नीतियों और जर्जर हो चुके सिरसा मार्ग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। परेशान बस ऑपरेटरों ने बसों का परमिट एवं अन्य दस्तावेजों को परिवहन विभाग के सुपुर्द कर बसों का संचालन करने एवं टैक्स भरने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
निजी बसों का संचालन बीते 21 मार्च से पूर्णरूप से ठप है। बस यूनियन के अध्यक्ष ओमप्रकाश दुआ ने कहा कि शक्तिफार्म से किच्छा, सितारगंज के लिए 12 बसें संचालित हो रही थीं लेकिन लॉकडाउन के वजह से बस स्वामी टैक्स जमा करने में असमर्थ हैं। बस ऑपरेटर सरकार की गलत नीतियों का शिकार हैं वहीं जर्जर हो चुके सिरसा एवं सितारगंज मार्ग से त्रस्त हैं। शक्तिफार्म से सितारगंज एवं सिरसा मार्ग पर आए दिन बसें दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं जिसका जिम्मेदार बसों को ही ठहराया जाता है।
शासन द्वारा बस संचालित करने को बनी नीति के तहत बसों में सीटों के सापेक्ष 50 फीसदी सवारी बिठाने व किराया दोगुना किए जाने का प्रावधान रखा। इसका नतीजा है कि बस स्वामी बस के परमिट समेत अन्य दस्तावेजों को परिवहन विभाग में समर्पण करने को मजबूर हैं। अब तक 12 में से 7 बस मालिकों ने अपने दस्तावेजों को परिवहन विभाग के समक्ष सरेंडर कर दिया है।
दुआ ने कहा कि निजी बस ऑपरेटरों को हो रही इन दिक्कतों एवं टैक्स माफी की मांग को लेकर शासन- प्रशासन से लेकर परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों तक को पत्र प्रेषित किया गया लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने परिवहन विभाग के एआरटीओ पर भी बस ऑपरेटरों के खिलाफ नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
करीब 36 कर्मचारियों के परिवार प्रभावित
शक्तिफार्म। नगर से चलने वाली 12 बसों से करीब 36 लोगों को रोजगार मिलता था लेकिन 21 मार्च के बाद से ही इन निजी बसों का संचालन पूर्णरूप से ठप है। ये लोग बेरोजगार हो गए हैं। इससे इनके परिवार वालों के सामने भी भरण पोषण का संकट आ गया है। वही बसें न चलने से आमजन को भी आवागमन में कठिनाइयां हो रही हैं। संवाद
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रोडवेज डिपो में 34 निगम और 9 अनुबंधित बसों का बेड़ा है। हरिद्वार, टनकपुर, हल्द्वानी, देहरादून, चंडीगढ, दिल्ली, बरेली, लखनऊ, मुज्जफरनगर आदि मार्गों पर बसों का संचालन होता था जिससे प्रतिदिन डिपो को साढ़े पांच से साढ़े छह लाख रुपये की आय होती थी। लॉकडाउन के कारण संचालन ठप हो गया था।
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पूर्व से घाटे में चलने वाले निगम की आर्थिक स्थिति और बदतर हो गई। डिपो को चार महीने से लगातार लाखों रुपये का टैक्स एआरटीओ कार्यालय में जमा करना पड़ रहा था। इससे विभाग पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। बसों के संचालन की कोई उम्मीद नजर नहीं आने पर मुख्यालय ने बसों को सरेंडर करने के निर्देश जारी किए। दो दिन में 25 बसों को सरेंडर किया जा चुका है।
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प्रभारी सहायक महाप्रबंधक आरसी पांडे ने बताया कि निगम की 16 बसों का एआरटीओ कार्यालय में टैक्स जमा कर दस्तावेज सरेंडर कर दिए हैं। इससे निगम का हर महीने जमा होने वाला टैक्स बचेगा। डिपो में 18 बसें संचालन के लिए रखी गई हैं। संचालन के निर्देश प्राप्त होने पर भविष्य में बसों को एआरटीओ से रिलीज कराना पड़ेगा।
बाह्य श्रोत, संविदा आदि के तहत कार्यरत चालक-परिचालक सहित अन्य कर्मी मुख्यालय के अग्रिम आदेशों तक घर बैठेंगे। रोडवेज डिपो में सुल्तानपुर पट्टी से मात्र एक बस यूके 18पीए 0298 संचालित होती थी। जबकि बस संख्या यूके 07पीए 3947, 3948, 3967, 4015, 4025, 4026, 4043, 4122 बिजनौर यूपी की संचालित होती थी। यह सभी बसें भी सरेंडर कर दी गई हैं।
लॉकडाउन से निजी बस ऑपरेटरों को रोजी-रोटी का संकट
शक्तिफार्म। लॉकडाउन से निजी बस ऑपरेटरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बस ऑपरेटरों ने सरकार की गलत नीतियों और जर्जर हो चुके सिरसा मार्ग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। परेशान बस ऑपरेटरों ने बसों का परमिट एवं अन्य दस्तावेजों को परिवहन विभाग के सुपुर्द कर बसों का संचालन करने एवं टैक्स भरने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
निजी बसों का संचालन बीते 21 मार्च से पूर्णरूप से ठप है। बस यूनियन के अध्यक्ष ओमप्रकाश दुआ ने कहा कि शक्तिफार्म से किच्छा, सितारगंज के लिए 12 बसें संचालित हो रही थीं लेकिन लॉकडाउन के वजह से बस स्वामी टैक्स जमा करने में असमर्थ हैं। बस ऑपरेटर सरकार की गलत नीतियों का शिकार हैं वहीं जर्जर हो चुके सिरसा एवं सितारगंज मार्ग से त्रस्त हैं। शक्तिफार्म से सितारगंज एवं सिरसा मार्ग पर आए दिन बसें दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं जिसका जिम्मेदार बसों को ही ठहराया जाता है।
शासन द्वारा बस संचालित करने को बनी नीति के तहत बसों में सीटों के सापेक्ष 50 फीसदी सवारी बिठाने व किराया दोगुना किए जाने का प्रावधान रखा। इसका नतीजा है कि बस स्वामी बस के परमिट समेत अन्य दस्तावेजों को परिवहन विभाग में समर्पण करने को मजबूर हैं। अब तक 12 में से 7 बस मालिकों ने अपने दस्तावेजों को परिवहन विभाग के समक्ष सरेंडर कर दिया है।
दुआ ने कहा कि निजी बस ऑपरेटरों को हो रही इन दिक्कतों एवं टैक्स माफी की मांग को लेकर शासन- प्रशासन से लेकर परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों तक को पत्र प्रेषित किया गया लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने परिवहन विभाग के एआरटीओ पर भी बस ऑपरेटरों के खिलाफ नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
करीब 36 कर्मचारियों के परिवार प्रभावित
शक्तिफार्म। नगर से चलने वाली 12 बसों से करीब 36 लोगों को रोजगार मिलता था लेकिन 21 मार्च के बाद से ही इन निजी बसों का संचालन पूर्णरूप से ठप है। ये लोग बेरोजगार हो गए हैं। इससे इनके परिवार वालों के सामने भी भरण पोषण का संकट आ गया है। वही बसें न चलने से आमजन को भी आवागमन में कठिनाइयां हो रही हैं। संवाद