{"_id":"5900f6994f1c1bbc62c0c053","slug":"brokers-turning-farmers-hardwork-into-blackmoney","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों की मेहनत को ब्लैक मनी बना रहे आढ़ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों की मेहनत को ब्लैक मनी बना रहे आढ़ती
अमर उजाला ब्यूरो, खटीमा।
Updated Thu, 27 Apr 2017 01:05 AM IST
विज्ञापन
अपनी समस्या बतातें किसान।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसान से गेहूं खरीद में व्यापारी हेराफेरी करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। गेहूं खरीद का भुगतान चेक से न कर नगद किया जा रहा है। इससे किसानों की मेहनत की कमाई ब्लैक मनी साबित हो रही है। किसानों ने इस मुद्दे को भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के सह संयोजक राजवीर सिंह के समक्ष उठाकर जांच की मांग की।
प्रतापपुर निवासी किसान बलविंदर सिंह ने प्रकोष्ठ के सह संयोजक राजवीर सिंह को बताया कि उनके पास गांव में 22 एकड़ जमीन है। पिछली बार धान क्रय केंद्र को दी गई फसल का उन्हें आधा भुगतान 31 मार्च को मिला जबकि दो ट्राली धान का भुगतान अभी नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि इस बार गेहूं की फसल के लिए उन्होंने खटीमा व नानकमता की आढ़तों व मिलों के चक्कर काटे, लेकिन किसी ने 6-आर जारी कर गेहूं खरीदने की बात नहीं मानी। आखिरकार उन्हें विवश होकर राइस मिलर को गेहूं बेच दिया।
विज्ञापन
उसने बगैर 6-आर काटे 1610 रुपये प्रति कुंतल की दर से गेहूं खरीदा। साथ ही 1450 रुपये लेबर चार्ज के रूप में काटे। व्यापारी ने उन्हें भुगतान चेक के माध्यम से करने बजाय दो लाख 58 हजार 965 रुपये नगद दे दिए। किसान ने कहा कि जब वह इस रकम को बैंक में जमा करेंगे तो आय के श्रोत बताने में दिक्कत हो सकती है।
किसान ने सब्जी आढ़ती को बेचे गए 93 हजार 930 रुपये के आलू का भी मामला बताया, जिसमें आढ़ती ने किसान को चेक व आढ़त संबंधी कोई रसीद नहीं देने की बात कही। किसान ने बताया कि सरकारी मशीनरी, राइस मिलर और आढ़तियों की मिलीभगत से सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
भाजपा नेता राजवीर सिंह ने मामले को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के समक्ष रखकर किसानों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
विज्ञापन
प्रतापपुर निवासी किसान बलविंदर सिंह ने प्रकोष्ठ के सह संयोजक राजवीर सिंह को बताया कि उनके पास गांव में 22 एकड़ जमीन है। पिछली बार धान क्रय केंद्र को दी गई फसल का उन्हें आधा भुगतान 31 मार्च को मिला जबकि दो ट्राली धान का भुगतान अभी नहीं मिला।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि इस बार गेहूं की फसल के लिए उन्होंने खटीमा व नानकमता की आढ़तों व मिलों के चक्कर काटे, लेकिन किसी ने 6-आर जारी कर गेहूं खरीदने की बात नहीं मानी। आखिरकार उन्हें विवश होकर राइस मिलर को गेहूं बेच दिया।
विज्ञापन
उसने बगैर 6-आर काटे 1610 रुपये प्रति कुंतल की दर से गेहूं खरीदा। साथ ही 1450 रुपये लेबर चार्ज के रूप में काटे। व्यापारी ने उन्हें भुगतान चेक के माध्यम से करने बजाय दो लाख 58 हजार 965 रुपये नगद दे दिए। किसान ने कहा कि जब वह इस रकम को बैंक में जमा करेंगे तो आय के श्रोत बताने में दिक्कत हो सकती है।
किसान ने सब्जी आढ़ती को बेचे गए 93 हजार 930 रुपये के आलू का भी मामला बताया, जिसमें आढ़ती ने किसान को चेक व आढ़त संबंधी कोई रसीद नहीं देने की बात कही। किसान ने बताया कि सरकारी मशीनरी, राइस मिलर और आढ़तियों की मिलीभगत से सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
भाजपा नेता राजवीर सिंह ने मामले को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के समक्ष रखकर किसानों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।