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आपदा को अवसर में बदलकर ब्लॉगर बन गए जितेंद्र
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काशीपुर ब्लॉग लिखने वाले जितेंद्र अरोरा।
- फोटो : KASHIPUR
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आपदा से अमूमन लोग घबरा और हार जाते हैं लेकिन कुछ लोग आपदा में भी अवसर खोजकर कामयाब हो जाते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण काशीपुर में साइबर कैफे चलाने वाले जितेंद्र अरोरा ने दिया है। कैफे का कारोबार कम होने के बाद जितेंद्र ने कमाई के लिए इंटरनेट के कई माध्यमों का सहारा लिया। लेकिन सफलता नहीं मिली इसके बाद जितेंद्र को कोरोना हो गया। और उन्होंने घर पर ही ब्लॉग लिखना शुरू किया। आज वह ब्लॉग लिखकर एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति माह कमा रहे हैं।
जितेंद्र ने बताया कि वह काशीपुर में पिछले 16 वर्षों से साइबर कैफे चला रहे हैं। पहले कैफे काफी अच्छा चलता था लेकिन अब लोगों के पास खुद का इंटरनेट हो गया है। इससे साइबर कैफे का काम कम हो गया। पैसे कमाने के लिए जितेंद्र ने इंटरनेट में फेसबुक, यूट्यूब, मोबाइल एप का सहारा लिया लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसी दौरान कोरोना संक्रमण का दौर शुरू हुआ तो जितेंद्र को कोरोना हो गया और एक माह के लिए वह घर में ही कैद हो गए।
इसी दौरान जितेंद्र ने ब्लॉग लिखने शुरू किए। कुछ ही समय में जितेंद्र ने कुछ युवक, युवतियों को भी अपनी वेबसाइट के लिए ब्लॉग टाइप करने का काम दिया। जिससे वह रोजाना पांच से अधिक ब्लॉग पोस्ट करने लगे। अधिक ब्लॉग लिखने के साथ ही उन्होंने अपने ब्लॉग को रैंक करवाना भी शुरू किया। जिससे आज वह सिर्फ ब्लॉग लिखकर ही काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं।
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जितेंद्र ने बताया कि वह काशीपुर में पिछले 16 वर्षों से साइबर कैफे चला रहे हैं। पहले कैफे काफी अच्छा चलता था लेकिन अब लोगों के पास खुद का इंटरनेट हो गया है। इससे साइबर कैफे का काम कम हो गया। पैसे कमाने के लिए जितेंद्र ने इंटरनेट में फेसबुक, यूट्यूब, मोबाइल एप का सहारा लिया लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसी दौरान कोरोना संक्रमण का दौर शुरू हुआ तो जितेंद्र को कोरोना हो गया और एक माह के लिए वह घर में ही कैद हो गए।
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इसी दौरान जितेंद्र ने ब्लॉग लिखने शुरू किए। कुछ ही समय में जितेंद्र ने कुछ युवक, युवतियों को भी अपनी वेबसाइट के लिए ब्लॉग टाइप करने का काम दिया। जिससे वह रोजाना पांच से अधिक ब्लॉग पोस्ट करने लगे। अधिक ब्लॉग लिखने के साथ ही उन्होंने अपने ब्लॉग को रैंक करवाना भी शुरू किया। जिससे आज वह सिर्फ ब्लॉग लिखकर ही काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं।
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