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उत्तराखंड : सम्मान न मिलने से आहत लोकतंत्र सेनानी, कहा- यूपी की तर्ज पर बने एक्ट

Fri, 26 Jun 2020 03:58 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Fri, 26 Jun 2020 03:58 PM IST
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bed felling loktantra senani, demand act as up
काशीपुर में लोकतंत्र सेनानी महेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल व केके अग्रवाल। - फोटो : AMAR UJALA

सरकार द्वारा सम्मान न दिए जाने से लोकतंत्र सेनानी आहत हैं। उनका कहना है कि उत्तराखंड में भी यूपी की तर्ज पर एक्ट बनाया जाना चाहिये, ताकि आने वाली सरकारों में भी उनके हित संरक्षित रह सके।

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कांग्रेस सरकार के समय 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल लगाया गया था। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले हजारों लोगों को मीसा के तहत जेल में बंद कर दिया गया था। अलग राज्य उत्तराखंड बनने पर 971 लोगों को मीसा व डीआईआर बंदियों के रूप में चिह्नित किया गया।
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इनमें 21 बंदी ऊधमसिंह नगर के थे। वर्तमान में इनमें से मात्र तीन लोकतंत्र सेनानी महेश चंद्र अग्रवाल, सुशील कुमार व कृष्ण कुमार अग्रवाल ही जीवित हैं। आपातकाल के खिलाफ जेल गए 18 लोगों का निधन हो चुका है। उत्तराखंड सरकार द्वारा मीसा के तहत बंद लोगों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया गया।
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तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. उमाकांत पंवार ने 14 जून 2018 को सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर लोकतंत्र सेनानियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा था। सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को 16 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों सरीखे सम्मान से वे अभी महरूम है। उनका दर्द है कि यूपी में भी भाजपा सरकार है औऱ उत्तराखंड में भी।

आपातकाल का विरोध करने वाले अधिकांश आरएसएस के स्वयंसेवक है। इसके बावजूद सरकार उन्हें कोई तवज्जों नही दे रही है, जबकि यूपी सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए कानून बना दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी लोकतंत्र सेनानी परिषद गठित हो, उन्हें यूपी की तर्ज पर सम्मान पत्र मिले।


लोकतंत्र सेनानियों का अन्तिम संस्कार राजकीय सम्मान से हो और उनकी विधवा व बच्चों को भी पेंशन दी जाए। लोकतंत्र सेनानी महेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि आजीविका चलाने के लिए सेनानियों को कृषि भूमि, पेट्रोल पंप आदि का आवंटन हो और उन्हें रेलवे और रोडवेज आदि में एक सहयोगी समेत यात्रा पास दिया जाए।

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